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बारिश में आरओबी पर दोबारा धंसी सड़क, रिटेनिंग वाल से मिट्टी पानी में बही
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बारिश में गोहाना रोड आरओबी पर दोबारा धंसी सड़क। संवाद
- फोटो : Sonipat
सोनीपत। अधिकारियों की लापरवाही के कारण बारिश में रविवार को गोहाना रोड रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) पर सड़क दोबारा धंस गई। आरओबी की रिटेनिंग वाल से मिट्टी पानी में बह गई। आरओबी पर धंसी सड़क को दुरुस्त करने के नाम पर लीपापोती ही की जा रही है। जिसके चलते सड़क बार-बार धंस रही है। सड़क धंसने की सूचना मिलने के बाद पीडब्ल्यूडी (लोक निर्माण विभाग) की टीम मौके पहुंची और वहां पर पत्थर भरकर गड्ढा बंद कराया।
अधिकारियों की लापरवाही कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। आरओबी पर सड़क की मरम्मत कराने के लिए तीन विभागों के बीच में पेंच फंसा हुआ है। पीडब्ल्यूडी, एनएचएआई व नगर निगम के अधिकारी एक दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। इसी बीच डीसी ललित सिवाच ने अधिकारियों संग सड़क का निरीक्षण भी किया और तीनों विभागों के अधिकारियों की सोमवार को बैठक लेकर सड़क का निर्माण कराने की बात कही। लोक निर्माण विभाग की ओर से गोहाना रोड पर 24 करोड़ रुपये की लागत से आरओबी का निर्माण किया गया था। फरवरी, 2015 में आरओबी से वाहनों का आवागमन शुरू कर दिया गया था। अधिकारियों का कहना है कि हर पांच साल में आरओबी की मरम्मत करने का प्रावधान है। आरओबी बनने के बाद एनएचएआई ने इसे वर्ष 2017 में अपने अधीन ले लिया था। इसके बाद एनएचएआई (भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण) की ओर से पुल की देखरेख तक नहीं की गई। इसके बाद एनएचएआई के अधिकारियों ने फाजिलपुर ट्रक यूनियन से लेकर महाराणा प्रताप चौक, विवेकानंद चौक, मामा भांजा चौक, गीता भवन चौक, गोहाना रोड आरओबी, ककरोई चौक, तिरंगा चौक, छोटूराम चौक होते हुए बड़वासनी तक सड़क नगर निगम के अधिकारियों को मरम्मत करने के लिए सौंप दी थी। साथ ही एनएचएआई के अधिकारियों ने सड़क की देखरेख करने के लिए 2.60 करोड़ रुपये दिए थे।
वहीं निगम के अधिकारियों का कहना है कि आरओबी का निर्माण जिस विभाग ने कराया है तो उसी विभाग की जिम्मेदारी बनती है कि वह आरओबी पर लगातार धंस रही सड़क को रोकने के लिए उचित प्रबंध करें। सड़क की मरम्मत करने के लिए एनएचएआई ने निगम को 2.60 करोड़ रुपये दिए थे। नगर निगम की ओर से आरओबी को छोड़कर पूरी सड़क की मरम्मत करा दी गई थी। आरओबी को ठीक करने के लिए निगम के पास एक्सपर्ट इंजीनियर तक नहीं है।
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पीडब्ल्यूडी, नगर निगम व एनएचएआई के अधिकारियों की आज लेंगे बैठक
आरओबी पर सड़क धंसने के मामले में डीसी ललित सिवाच ने सोमवार को पीडब्ल्यूडी, नगर निगम व एनएचएआई के अधिकारियों की संयुक्त बैठक बुलाई है। जिससे तीनों विभाग अपनी-अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए आरओबी की मरम्मत का काम बेहतर ढंग से कर सके। मरम्मत के लिए 52 लाख रुपये का बजट तैयार किया गया है। वहीं सड़क धंसने की वजह से दुकानदारों को भी परेशानी हो रही है। रिटेनिंग वॉल की मिट्टी पानी में बहकर सीधे उनके दुकानों के सामने जमा हो रही है। जिससे आने-जाने वाले वाहन चालक भी परेशान है। -
आरओबी पर स्ट्रीट लाइट के खुले पड़े तार
गोहाना रोड आरओबी पर स्ट्रीट लाइट के तार भी खुले पड़े है। नगर निगम की ओर से स्ट्रीट लाइट के खुले तारों की तरफ ध्यान नहीं दिया जा रहा है। अधिकारियों की लापरवाही के कारण आरओबी पर कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। गड्ढे में पत्थर भरवाने पहुंचे पीडब्ल्यूडी के जेई विकास ने खुले बिजली के तारों को देखा। इस दौरान उन्होंने कहा कि जल्द ही नगर निगम को पत्र लिखकर बिजली के खुले तारों को बंद कर दिया जाएगा।
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वर्जन
गोहाना रोड आरओबी का निर्माण करने के बाद इसे वर्ष 2017 में एनएचएआई को सौंप दिया गया था। एनएचएआई के अधिकारियों ने आरओबी को अपने अधीन ले लिया था। सड़क धंसने के बाद एनएचएआई के कहने पर विभाग के अधिकारियों ने रोड़े डालकर गड्ढे को भरवा दिया है।
- एनके तोमर, एसई लोक निर्माण विभाग
वर्जन
दो साल पहले आरओबी सहित फाजिलपुर ट्रक यूनियन से लेकर बड़वासनी को सड़क की मरम्मत करने के लिए नगर निगम को जिम्मेदारी दी गई थी। साथ ही निगम को 2.60 करोड़ रुपये भी दे दिए थे। नगर निगम के अधिकारियों के कहने पर एनएचएआई की टीम ने शनिवार को सड़क पर बने गड्ढे पर रोड़े भरवा दिए थे और आवागमन शुरू करा दिया गया था।
आनंद दहिया, डीजीएम एनएचएआई
वर्जन
एनएचएआई ने नगर निगम को आरओबी कभी सौंपा नहीं था। निगम भविष्य में आरओबी में अपने पास हैंडओवर नहीं करेगा। नगर निगम के पास आरओबी के एक्सपर्ट इंजीनियर नहीं है। इसे लेकर लघु सचिवालय में होने वाली बैठक में उच्च अधिकारियों को अवगत कराएंगे।
अशोक रावत, एसई नगर निगम
वर्जन
शहर के बाहर बाईपास का निर्माण होने के बाद आरओबी पीडब्ल्यूडी के पास आ गया था। सड़क निर्माण को लेकर एनएचएआई, पीडब्ल्यूडी व नगर निगम के अधिकारियों ने संयुक्त रूप से बजट तैयार कर लिया है। बारिश रुकने के बाद सड़क का निर्माण कार्य पूरा कराया जाएगा। सड़क निर्माण नहीं होने तक आरओबी से भारी वाहनों के आवागमन पर पूर्ण रोक रहेगी। रोडवेज के जीएम को फोन करके बसों का संचालन दूसरे मार्ग से करने के निर्देश दिए गए है।
- ललित सिवाच, जिला उपायुक्त सोनीपत
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अधिकारियों की लापरवाही कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। आरओबी पर सड़क की मरम्मत कराने के लिए तीन विभागों के बीच में पेंच फंसा हुआ है। पीडब्ल्यूडी, एनएचएआई व नगर निगम के अधिकारी एक दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। इसी बीच डीसी ललित सिवाच ने अधिकारियों संग सड़क का निरीक्षण भी किया और तीनों विभागों के अधिकारियों की सोमवार को बैठक लेकर सड़क का निर्माण कराने की बात कही। लोक निर्माण विभाग की ओर से गोहाना रोड पर 24 करोड़ रुपये की लागत से आरओबी का निर्माण किया गया था। फरवरी, 2015 में आरओबी से वाहनों का आवागमन शुरू कर दिया गया था। अधिकारियों का कहना है कि हर पांच साल में आरओबी की मरम्मत करने का प्रावधान है। आरओबी बनने के बाद एनएचएआई ने इसे वर्ष 2017 में अपने अधीन ले लिया था। इसके बाद एनएचएआई (भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण) की ओर से पुल की देखरेख तक नहीं की गई। इसके बाद एनएचएआई के अधिकारियों ने फाजिलपुर ट्रक यूनियन से लेकर महाराणा प्रताप चौक, विवेकानंद चौक, मामा भांजा चौक, गीता भवन चौक, गोहाना रोड आरओबी, ककरोई चौक, तिरंगा चौक, छोटूराम चौक होते हुए बड़वासनी तक सड़क नगर निगम के अधिकारियों को मरम्मत करने के लिए सौंप दी थी। साथ ही एनएचएआई के अधिकारियों ने सड़क की देखरेख करने के लिए 2.60 करोड़ रुपये दिए थे।
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वहीं निगम के अधिकारियों का कहना है कि आरओबी का निर्माण जिस विभाग ने कराया है तो उसी विभाग की जिम्मेदारी बनती है कि वह आरओबी पर लगातार धंस रही सड़क को रोकने के लिए उचित प्रबंध करें। सड़क की मरम्मत करने के लिए एनएचएआई ने निगम को 2.60 करोड़ रुपये दिए थे। नगर निगम की ओर से आरओबी को छोड़कर पूरी सड़क की मरम्मत करा दी गई थी। आरओबी को ठीक करने के लिए निगम के पास एक्सपर्ट इंजीनियर तक नहीं है।
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पीडब्ल्यूडी, नगर निगम व एनएचएआई के अधिकारियों की आज लेंगे बैठक
आरओबी पर सड़क धंसने के मामले में डीसी ललित सिवाच ने सोमवार को पीडब्ल्यूडी, नगर निगम व एनएचएआई के अधिकारियों की संयुक्त बैठक बुलाई है। जिससे तीनों विभाग अपनी-अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए आरओबी की मरम्मत का काम बेहतर ढंग से कर सके। मरम्मत के लिए 52 लाख रुपये का बजट तैयार किया गया है। वहीं सड़क धंसने की वजह से दुकानदारों को भी परेशानी हो रही है। रिटेनिंग वॉल की मिट्टी पानी में बहकर सीधे उनके दुकानों के सामने जमा हो रही है। जिससे आने-जाने वाले वाहन चालक भी परेशान है। -
आरओबी पर स्ट्रीट लाइट के खुले पड़े तार
गोहाना रोड आरओबी पर स्ट्रीट लाइट के तार भी खुले पड़े है। नगर निगम की ओर से स्ट्रीट लाइट के खुले तारों की तरफ ध्यान नहीं दिया जा रहा है। अधिकारियों की लापरवाही के कारण आरओबी पर कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। गड्ढे में पत्थर भरवाने पहुंचे पीडब्ल्यूडी के जेई विकास ने खुले बिजली के तारों को देखा। इस दौरान उन्होंने कहा कि जल्द ही नगर निगम को पत्र लिखकर बिजली के खुले तारों को बंद कर दिया जाएगा।
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गोहाना रोड आरओबी का निर्माण करने के बाद इसे वर्ष 2017 में एनएचएआई को सौंप दिया गया था। एनएचएआई के अधिकारियों ने आरओबी को अपने अधीन ले लिया था। सड़क धंसने के बाद एनएचएआई के कहने पर विभाग के अधिकारियों ने रोड़े डालकर गड्ढे को भरवा दिया है।
- एनके तोमर, एसई लोक निर्माण विभाग
वर्जन
दो साल पहले आरओबी सहित फाजिलपुर ट्रक यूनियन से लेकर बड़वासनी को सड़क की मरम्मत करने के लिए नगर निगम को जिम्मेदारी दी गई थी। साथ ही निगम को 2.60 करोड़ रुपये भी दे दिए थे। नगर निगम के अधिकारियों के कहने पर एनएचएआई की टीम ने शनिवार को सड़क पर बने गड्ढे पर रोड़े भरवा दिए थे और आवागमन शुरू करा दिया गया था।
आनंद दहिया, डीजीएम एनएचएआई
वर्जन
एनएचएआई ने नगर निगम को आरओबी कभी सौंपा नहीं था। निगम भविष्य में आरओबी में अपने पास हैंडओवर नहीं करेगा। नगर निगम के पास आरओबी के एक्सपर्ट इंजीनियर नहीं है। इसे लेकर लघु सचिवालय में होने वाली बैठक में उच्च अधिकारियों को अवगत कराएंगे।
अशोक रावत, एसई नगर निगम
वर्जन
शहर के बाहर बाईपास का निर्माण होने के बाद आरओबी पीडब्ल्यूडी के पास आ गया था। सड़क निर्माण को लेकर एनएचएआई, पीडब्ल्यूडी व नगर निगम के अधिकारियों ने संयुक्त रूप से बजट तैयार कर लिया है। बारिश रुकने के बाद सड़क का निर्माण कार्य पूरा कराया जाएगा। सड़क निर्माण नहीं होने तक आरओबी से भारी वाहनों के आवागमन पर पूर्ण रोक रहेगी। रोडवेज के जीएम को फोन करके बसों का संचालन दूसरे मार्ग से करने के निर्देश दिए गए है।
- ललित सिवाच, जिला उपायुक्त सोनीपत