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गैंगरेप से किसान आंदोलन पर लगा दाग धोने के लिए सभी धरनों के मंच से नेता सफाई देने में जुटे

Wed, 12 May 2021 12:10 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 12 May 2021 12:10 AM IST
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In order to wash away the stains on the agitation from the gangrape, the leaders of all the dharnas are engaged in cleaning the platform
बंगाल की युवती के साथ टीकरी बॉर्डर पर सामूहिक दुष्कर्म का मामला सामने आने के बाद किसान आंदोलन की साख देशभर में खराब हुई है। संयुक्त किसान मोर्चा के नेता खुद भी यह समझ गए हैं और वह किसान आंदोलन पर लगा यह दाग धोने के लिए सभी धरनों के मंच से सफाई दे रहे हैं। जितने बॉर्डरों पर धरना चल रहा है, उन सभी पर दो दिन से केवल सामूहिक दुष्कर्म का मुद्दा छाया हुआ है। हालांकि अब युवती के पिता के कानूनी कार्रवाई करने पर किसान नेता दावा कर रहे हैं कि पीड़ित को न्याय जरूर दिलाया जाएगा। वह पीड़ित परिवार के साथ खड़े हैं। किसान नेता जहां किसी भी तरह स डैमेज कंट्रोल मे जुटे हुए हैं, वहीं किसानों के टेंट की छानबीन की तैयारी हो रही है।
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बंगाल से किसान आंदोलन में शामिल होने आई युवती के साथ टीकरी बॉर्डर पर किसान सोशल आर्मी के नेताओं के सामूहिक दुष्कर्म करने का मामला सामने आने के बाद से हड़कंप मचा हुआ है। जिसमें संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं को 2 मई से मामले की जानकारी होने के बावजूद पुलिस को शिकायत नहीं देने की बात सामने आई तो किसान मोर्चा के नेता भी घेरे में आ गए। उन पर भी सवाल उठने शुरू हो गए हैं। इसका बड़ा असर किसान आंदोलन पर पड़ता दिखाई दे रहा है। इस घटना के साथ ही पूरा मामला पहले ही किसान नेताओं की जानकारी में होने के बावजूद कार्रवाई नहीं करने से आंदोलन की साख धूमिल हो गई है। जिस तरह से आंदोलन में कई राज्यों के किसान व अन्य संगठनों के लोग शामिल है, उस तरह ही इस घटना से आंदोलन की साख भी पूरे देश में खराब हुई है। यह खुद संयुक्त किसान मोर्चा के नेता भी जानते हैं। यही कारण है कि कुंडली, टीकरी, गाजीपुर समेत अन्य जिन जगहों पर धरना चल रहा है, वहां पिछले दो दिन से युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म का मुद्दा छाया हुआ है। धरनास्थलों के मुख्य मंच से किसान नेता भी अब डैमेज कंट्रोल में जुटे हैं। अब मामला तूल पकड़ने पर आरोपियों को कड़ी सजा दिलाकर युवती को न्याय दिलाने का दावा कर रहे हैं।
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किसान नेताओं का कहना है कि वह पहले से आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कराना चाहते हैं और अब भी पूरी तरह से युवती के परिवार के साथ खड़े हैं। युवती के परिवार को जिस तरह की मदद उनसे चाहिए, वह हर तरह से करने के लिए तैयार हैं।
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आंदोलन में धरनास्थलों पर सैकड़ों टेंट लगे, काफी को किसान नेता भी नहीं जानते
कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली के बॉर्डरों पर धरनास्थलों पर सैकड़ों टेंट लगे हुए हैं। जिनमें से काफी ऐसे भी किसान हैं, जिनको खुद किसान नेता नहीं जानते हैं। अब इस घटना के बाद किसान नेता इस तरह ही पल्ला झाड़ रहे हैं। उनका दावा है कि वह किसान सोशल आर्मी व उनके नेताओं को नहीं जानते हैं। उनका संयुक्त किसान मोर्चा से कोई मतलब नहीं है। सवाल उठाए जा रहे हैं कि टेंट की जांच पहले ही होनी चाहिए। इसलिए कहा जा रहा है कि धरनास्थलों पर टेंट की जांच कराई जा सकती है।
जब यह मामला किसान मोर्चा के नेताओं की जानकारी में आया तो उसी समय साफ कहा गया था कि इसमें युवती के पिता रिपोर्ट करें और किसान मोर्चा उनका पूरा साथ देेगा। यह भी साफ था कि अगर पिता रिपोर्ट नहीं कराएंगे तो किसान मोर्चा कराएगा। युवती के पिता ने निर्णय लेने में कुछ देरी की, लेकिन हम पूरी तरह से पीड़ित परिवार के साथ हैं और उनकी केस लड़ने में आर्थिक व कानूनी रूप हर मदद करेंगे। जहां तक टेंट लगाने वालों की जांच की बात है तो यह भीड़ ज्यादा होने के कारण मुमकिन नहीं था। अब यह मामला होने के बाद सब कुछ किया जाएगा। किसान आंदोलन पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ा है, जिसके लिए सभी के सामने सच्चाई बताई जा रही है। -राकेश टिकैत, राष्ट्रीय प्रवक्ता भाकियू

किसान मोर्चा के नेताओं को 2 मई को इस बारे में बताया गया था। जिसके तुरंत बाद ही टीकरी बॉर्डर कमेटी ने बैठक करके टेंट उखड़वा दिए और उनका बहिष्कार किया था। जहां तक कानूनी कार्रवाई की बात थी तो वह युवती के पिता को करनी थी। उसके लिए किसान मोर्चा ने साथ रहने की बात कही थी। वह कह रहे थे कि किसान आंदोलन को नुकसान भी नहीं होना चाहिए और बेटी को न्याय भी मिले। इसलिए ही युवती के पिता ने निर्णय लेने में कुछ देरी की। -जोगिंदर सिंह उगराहां, सदस्य संयुक्त किसान मोर्चा
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