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बंगाल में भाजपा की हार को किसानों ने अपनी नैतिक जीत बताई
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बंगाल समेत पांच राज्यों के चुनाव परिणाम आने के बाद संयुक्त किसान मोर्चा आक्रामक हो गया है। किसान नेताओं ने कहा कि यह चुनाव परिणाम आंदोलन की नैतिक रूप से जीत है। इसके साथ ही बंगाल में भाजपा की हार पर किसानों ने मिठाई बांटी। किसान नेताओं ने कहा कि सरकार को गतिरोध समाप्त करके बातचीत का रास्ता दोबारा खोलना चाहिए, जिससे किसानों की समस्याओं का समाधान हो सके। वहीं किसान नेताओं ने शपथ ग्रहण के बाद ममता बनर्जी के धरनास्थल पर आने का दावा किया है।
किसान नेता जगजीत सिंह दल्लेवाल, बलदेव सिरसा, अभिमन्यु कोहाड़, मंजीत सिंह राय ने कहा कि यह चुनाव परिणाम सरकार को जनता का दिखाया गया आइना है। अगर भाजपा में अब भी घमंड बाकी है तो उसे यूपी की जनता आने वाले दिनों में निकाल देगी। किसान नेताओं ने कहा कि पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल में यह स्पष्ट है कि जनता ने भाजपा की विभाजनकारी सांप्रदायिक राजनीति को खारिज कर दिया है। ऐसे गंभीर संकट के समय में जब देश अपने स्वास्थ्य सेवा संबंधी बुनियादी ढांचे के मामले में आपदा का सामना कर रहा है, उसमें भी व्यवस्था बेहतर करने की जगह सरकार चुनाव में लगी थी।
उन्होंने कहा कि इन राज्यों में भाजपा की हार होना यह दर्शाता है कि नागरिकों ने भाजपा और उसके सहयोगी दलों के सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के एजेंडे को खारिज कर दिया है। किसानों ने पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों के नागरिकों को किसानों को समर्थन देने के लिए आभार प्रकट किया है। उन्होंने अब पूरे भारत के किसानों से अपील कि है कि अपने प्रतिरोध को मजबूत करें और अधिक से अधिक संख्या में आंदोलन में शामिल हों। किसान नेताओं ने कहा कि अब भाजपा की नैतिक जिम्मेदारी है कि आज के परिणामों को स्वीकार करें व किसानों से बातचीत कर तीन कृषि कानून रद्द करें और एमएसपी की कानूनी गारंटी दें।
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किसान नेता जगजीत सिंह दल्लेवाल, बलदेव सिरसा, अभिमन्यु कोहाड़, मंजीत सिंह राय ने कहा कि यह चुनाव परिणाम सरकार को जनता का दिखाया गया आइना है। अगर भाजपा में अब भी घमंड बाकी है तो उसे यूपी की जनता आने वाले दिनों में निकाल देगी। किसान नेताओं ने कहा कि पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल में यह स्पष्ट है कि जनता ने भाजपा की विभाजनकारी सांप्रदायिक राजनीति को खारिज कर दिया है। ऐसे गंभीर संकट के समय में जब देश अपने स्वास्थ्य सेवा संबंधी बुनियादी ढांचे के मामले में आपदा का सामना कर रहा है, उसमें भी व्यवस्था बेहतर करने की जगह सरकार चुनाव में लगी थी।
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उन्होंने कहा कि इन राज्यों में भाजपा की हार होना यह दर्शाता है कि नागरिकों ने भाजपा और उसके सहयोगी दलों के सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के एजेंडे को खारिज कर दिया है। किसानों ने पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों के नागरिकों को किसानों को समर्थन देने के लिए आभार प्रकट किया है। उन्होंने अब पूरे भारत के किसानों से अपील कि है कि अपने प्रतिरोध को मजबूत करें और अधिक से अधिक संख्या में आंदोलन में शामिल हों। किसान नेताओं ने कहा कि अब भाजपा की नैतिक जिम्मेदारी है कि आज के परिणामों को स्वीकार करें व किसानों से बातचीत कर तीन कृषि कानून रद्द करें और एमएसपी की कानूनी गारंटी दें।
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