फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Sonipat News ›   I was fond of writing in my childhood, wrote a book at the age of 17

बचपन में था लिखने का शौक, 17 साल की उम्र में लिख डाली पुस्तक

Thu, 24 Feb 2022 01:11 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 24 Feb 2022 01:11 AM IST
विज्ञापन
I was fond of writing in my childhood, wrote a book at the age of 17
सोनीपत। हम सबके अंदर एक लेखक मौजूद है। तलाश सिर्फ खुद को ढूंढने की है। यह कहना है सोनीपत के नरेंद्र नगर निवासी रितविका शर्मा का, जिसने बचपन में अपने लिखने के शौक को पहचानकर महज 16 वर्ष, 11 माह व 15 दिन की आयु में पुस्तक लिख डाली। विशेष बात यह है कि रितविका शर्मा ने डार्कनेस टू लाइट, ऑन वॉक ऑफ माइल्स पुस्तक लिख इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड मेें नाम दर्ज करवाया है। उसकी सफलता से परिवार खुश है और अपनी लाडली के हर कदम को मजबूती प्रदान कर रहा है।
विज्ञापन

रितविका शर्मा का जन्म 14 अक्तूबर 2004 को हुआ। पिता प्रवीन शर्मा एम्स में सिक्योरिटी मेें हैं और मां दीपिका शर्मा संस्कृत अध्यापिका हैं। रितविका शर्मा ने बताया कि उसे बचपन से ही लिखने का शौक रहा है। पहले दिन में हुई गतिविधियों को मम्मी-पापा के डांटने को डायरी में लिखती थी। कोरोना काल में बहुत कुछ देखा और समझा भी। इसी दौरान पुस्तक लिखने का विचार आया और इस पर काम शुरू किया। मेरी पुस्तक 29 सितंबर 2021 को प्रकाशित हुई थी। जनवरी में इंडिया बुक आफ रिकार्ड में नाम दर्ज किया है।
विज्ञापन

निराशा से निकलकर खुशनुमा जिंदगी जीने की प्रेरणा देती है पुस्तक
रितविका शर्मा द्वारा लिखित पुस्तक में बताया गया है कि महत्वाकांक्षा पूरी नहीं होने व अन्य कारणों से व्यक्ति तनाव में चला जाता है। जीवन निराशा से भर जाता है और व्यक्ति जीने की इच्छा छोड़ देता है। डार्कनेस टू लाइट पुस्तक लोगों को निराशा भरी जिंदगी से बाहर निकलकर खुशनुमा जिंदगी की शुरुआत करने का संदेश देती है। रितविका ने किताब के माध्यम से व्यक्ति को आत्म मंथन करने के लिए प्रेरित किया है, जिससे व्यक्ति यह समझ सके कि कहां पर गलती होने पर खुशियों से भरा जीवन निराशा में बदल गया। रितविका ने बताया कि पुस्तक को इस तरह से लिखा है कि पढ़ने वाला व्यक्ति घटना को लेकर स्वयं अनुभव कर सके। आत्ममंथन करके पता लगा सकता है कि तनाव हुआ तो क्यों हुआ। इसका पता चलने पर व्यक्ति उससे बाहर निकलने का रास्ता भी निकाल लेता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

बुजुर्गों से मिले अनुभव के आधार पर चली कलम
रितविका का कहना है कि पुस्तक नानी द्वारा बताए अनुभवों और व्यक्ति के जीवन भर के संघर्ष के आधार पर लिखी हुई है। मैं बचपन में बुजुर्गों के बीच बैठकर बातचीत करती और उनके अनुभव सुनने में हमेशा रुचि लेती थी। बुजुर्ग ही बताते थे कि किस तरह से उनके साथ घटना हुई और उससे बाहर कैसे निकलकर जीवन की नई शुरुआत की। मुझे लगा कि बुजुर्गों के अनुभव व्यक्ति को तनाव से बाहर निकालने में काफी मददगार साबित हो सकते हैं।

मम्मी-पापा को भी लगता था कि बेटी तनाव में तो नहीं चली गई
रितविका बताती हैं कि दिन में मैं जो भी अनुभव करती थी उसे लिखने बैठ जाती थी। परिजनों से उस विषय में बातचीत करने लगती थी। जिससे मम्मी-पापा को भी लगने लगा था कि कहीं बेटी तनाव में तो नहीं रहती। इसलिए जब भी बातें करती तो उससे पहले कहना पड़ता था कि मैं किसी प्रकार के तनाव मेें नहीं हूं। पुस्तक लिखने में मेरी नानी सरला देवी और मां दीपिका शर्मा ने सहयोग दिया। उन्हीं की प्रेरणा से आज में इस सफलता हासिल कर पाई हूं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed