{"_id":"67e6f7b7ec1bcfde82027eed","slug":"i-prayed-for-peace-after-offering-the-farewell-friday-prayers-sonipat-news-c-197-1-snp1008-134401-2025-03-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sonipat News: अलविदा जुमा की नमाज अदा कर मांगी अमन- शांति","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sonipat News: अलविदा जुमा की नमाज अदा कर मांगी अमन- शांति
Sat, 29 Mar 2025 12:55 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Sat, 29 Mar 2025 12:55 AM IST
विज्ञापन
सोनीपत के जीटी रोड रसोई स्थित मदीना मस्जिद के बाहर लगाए गए पंडाल में अलविदा जुमे की नमाज अदा कर
सोनीपत। जिलेभर की मस्जिदों में रमजान के अलविदा जुमा पर नमाज अदा कर देश में अमन-चैन व शांति की दुआ मांगी गई। नमाजियों की भीड़ को देखते हुए मंस्जिदों में पंडाल लगाए गए। दरी, चटाई व पानी की व्यवस्था की गई। अब 31 मार्च को ईद-उल-फितर पर्व मनाया जाएगा। इसकी तैयारियों मस्जिदों में शुरू हो गई है ।
जीटी रोड रसोई स्थित मदीना मस्जिद के इमाम कारी नसीम कासमी ने बताया कि रमजान के महीने के आखिरी जुमा को अलविदा या जुमातुल विदा कहा जाता है। रमजान का महीना रहमत भरा होता है। जहां इसके जाने से थोड़ा दुख होता है, वहीं ईद के आने की खुशी भी मनाई जाती है। इस माह का हर दिन अहमियत रखता है। लेकिन जुमा को इसकी अहमियत और बढ़ जाती है। रमजान के आखिरी जुमा की नमाज से रमजान के समापन का संदेश मिलता है। रमजान के महीने में दान करने का महत्व है। साथ ही यह हमें बुराई से दूर रहने का संदेश देता है।
जिलेभर की मस्जिदों में अलविदा जुमे की नमाज शांतिपूर्वक हुई। नमाजियों को बाहर सड़क पर न खड़े रहने की भी हिदायत दी गई। अब 31 मार्च को ईद-उल-फितर पर्व मनाया जाएगा। ईद हमारे आपसी प्रेम व भाईचारे को बढ़ावा देने का पर्व है। मस्जिदों में ईद पर्व की व्यवस्थाएं बनाने का दौर जारी रहा। नमाजियों के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं।
विज्ञापन
ईद पर किस मस्जिद में कितने बजे होगी नमाज
मामा भांजा मस्जिद, सोनीपत सुबह 8:15 बजे
मदीना मस्जिद, रसोई सुबह 8:30 बजे
नूरानी मस्जिद, कुंडली सुबह 8:15 बजे
फातिमा मस्जिद, कुंडली सुबह 6:45 बजे
नांगल मस्जिद, सोनीपत सुबह 8:00 बजे
ईदगाह मस्जिद, सोनीपत सुबह 8:30 बजे
विज्ञापन
जीटी रोड रसोई स्थित मदीना मस्जिद के इमाम कारी नसीम कासमी ने बताया कि रमजान के महीने के आखिरी जुमा को अलविदा या जुमातुल विदा कहा जाता है। रमजान का महीना रहमत भरा होता है। जहां इसके जाने से थोड़ा दुख होता है, वहीं ईद के आने की खुशी भी मनाई जाती है। इस माह का हर दिन अहमियत रखता है। लेकिन जुमा को इसकी अहमियत और बढ़ जाती है। रमजान के आखिरी जुमा की नमाज से रमजान के समापन का संदेश मिलता है। रमजान के महीने में दान करने का महत्व है। साथ ही यह हमें बुराई से दूर रहने का संदेश देता है।
विज्ञापन
जिलेभर की मस्जिदों में अलविदा जुमे की नमाज शांतिपूर्वक हुई। नमाजियों को बाहर सड़क पर न खड़े रहने की भी हिदायत दी गई। अब 31 मार्च को ईद-उल-फितर पर्व मनाया जाएगा। ईद हमारे आपसी प्रेम व भाईचारे को बढ़ावा देने का पर्व है। मस्जिदों में ईद पर्व की व्यवस्थाएं बनाने का दौर जारी रहा। नमाजियों के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं।
विज्ञापन
ईद पर किस मस्जिद में कितने बजे होगी नमाज
मामा भांजा मस्जिद, सोनीपत सुबह 8:15 बजे
मदीना मस्जिद, रसोई सुबह 8:30 बजे
नूरानी मस्जिद, कुंडली सुबह 8:15 बजे
फातिमा मस्जिद, कुंडली सुबह 6:45 बजे
नांगल मस्जिद, सोनीपत सुबह 8:00 बजे
ईदगाह मस्जिद, सोनीपत सुबह 8:30 बजे