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अस्पताल में डायलिसिस सेंटर के कर्मचारियों ने नहीं किया उपचार, तीन घंटे तक परेशान रहे मरीज
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अस्पताल में डायलिसिस सेंटर के बाहर खड़े मरीज व उनके तीमारदार
- फोटो : Sonipat
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सोनीपत। नागरिक अस्पताल में चल रहे डायलिसिस सेंटर के कर्मचारियों को चार माह से वेतन नहीं मिल रहा। ऐसे में सेंटर के कर्मचारियों ने तीन घंटे तक हड़ताल रखी। इससे डायलिसिस कराने के लिए पहुंचे मरीजों की डायलिसिस नहीं होने से परेशानी का सामना करना पड़ा। सुबह 7 बजे से 10 बजे तक डायलिसिस नहीं होने के कारण मरीज सेंटर के बाहर तड़पते रहे। इसके बाद उन्होंने मामले की सूचना डीएमएस डॉ. संदीप लठवाल व पीएमओ डॉ. जयभगवान को दी। इसके पश्चात अधिकारियों ने डायलिसिस सेंटर चला रहे कंपनी के अधिकारियों से बात की और कर्मचारियों के खातों में वेतन देने को कहा। इसके बाद कर्मचारियों के काम पर लौटने के बाद डायलिसिस का काम शुरू हो सका।
नागरिक अस्पताल में पीपीपी मोड़ पर डायलिसिस सेंटर चलाया जा रहा है, जिसके मरीज डायलिसिस करवाने के लिए पहुंचते हैं। किडनी के मरीजों को महीने में 8 से 10 बार डायलिसिस करवाना पड़ता है। प्राइवेट अस्पतालों में डायलिसिस करवाने के लिए करीब 3 हजार रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं। वीरवार को रोजाना की तरह मरीज के साथ उनके तीमारदार अस्पताल में डायलिसिस कराने के पहुंचे तो वहां पर कर्मचारियों ने मरीजों की डायलिसिस करने से मना कर दिया। अस्पताल में सुबह 7.30 बजे से डायलिसिस कराने के लिए लोग पहुंचा शुरू हो गए थे। कर्मचारियों ने मरीजों व उनके तीमारदार जोगेंद्र, टिंकू व चिराग आदि को बताया कि पिछले चार माह से वेतन नहीं मिल रहा है। ऐसे में परिवार का खर्च निकालना तक मुश्किल हो गया है। इस समस्या को लेकर वह कंपनी प्रबंधन को कई बार शिकायत दे चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं होने के कारण उन्हें मजबूरन हड़ताल करने के लिए मजबूर होना पड़ा। कर्मचारियों के डायलिसिस कराने से मना करने पर मरीज सुबह 10 बजे तक सेंटर के बाद तड़पते रहे। इसके बाद मरीजों की तीमारदार पहले डीएमएस डॉ. संदीप लठवाल से मिले। फिर उन्होंने पीएमओ डॉ. जयभगवान जाटान से मुलाकात की। इसके बाद लोगों ने बताया कि कर्मचारियों की अनदेखी का खामियाजा डायलिसिस कराने के लिए आने वाले मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। वीरवार को तीन घंटे तक डायलिसिस नहीं होने के कारण मरीजों को तड़पते रहे। इस पर पीएमओ ने कंपनी अधिकारियों से बात करके कर्मचारियों के खाते में वेतन डालने को कहा, ताकि अस्पताल में डायलिसिस कराने के लिए आने वाले मरीजों को किसी भी परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।
वर्जन :::
डायलिसिस सेंटर के कर्मचारियों ने चार महीने से वेतन नहीं मिलने से हड़ताल कर रखी थी। मामला संज्ञान में आने के बाद कंपनी अधिकारियों से बात की और उनके खातों में वेतन डलवाने के लिए कहा है। सुबह 10 बजे डायलिसिस सेंटर में कर्मचारी दोबारा काम पर लौट गए।
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-डॉ. जयभगवान जाटान, पीएमओ।
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नागरिक अस्पताल में पीपीपी मोड़ पर डायलिसिस सेंटर चलाया जा रहा है, जिसके मरीज डायलिसिस करवाने के लिए पहुंचते हैं। किडनी के मरीजों को महीने में 8 से 10 बार डायलिसिस करवाना पड़ता है। प्राइवेट अस्पतालों में डायलिसिस करवाने के लिए करीब 3 हजार रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं। वीरवार को रोजाना की तरह मरीज के साथ उनके तीमारदार अस्पताल में डायलिसिस कराने के पहुंचे तो वहां पर कर्मचारियों ने मरीजों की डायलिसिस करने से मना कर दिया। अस्पताल में सुबह 7.30 बजे से डायलिसिस कराने के लिए लोग पहुंचा शुरू हो गए थे। कर्मचारियों ने मरीजों व उनके तीमारदार जोगेंद्र, टिंकू व चिराग आदि को बताया कि पिछले चार माह से वेतन नहीं मिल रहा है। ऐसे में परिवार का खर्च निकालना तक मुश्किल हो गया है। इस समस्या को लेकर वह कंपनी प्रबंधन को कई बार शिकायत दे चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं होने के कारण उन्हें मजबूरन हड़ताल करने के लिए मजबूर होना पड़ा। कर्मचारियों के डायलिसिस कराने से मना करने पर मरीज सुबह 10 बजे तक सेंटर के बाद तड़पते रहे। इसके बाद मरीजों की तीमारदार पहले डीएमएस डॉ. संदीप लठवाल से मिले। फिर उन्होंने पीएमओ डॉ. जयभगवान जाटान से मुलाकात की। इसके बाद लोगों ने बताया कि कर्मचारियों की अनदेखी का खामियाजा डायलिसिस कराने के लिए आने वाले मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। वीरवार को तीन घंटे तक डायलिसिस नहीं होने के कारण मरीजों को तड़पते रहे। इस पर पीएमओ ने कंपनी अधिकारियों से बात करके कर्मचारियों के खाते में वेतन डालने को कहा, ताकि अस्पताल में डायलिसिस कराने के लिए आने वाले मरीजों को किसी भी परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।
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डायलिसिस सेंटर के कर्मचारियों ने चार महीने से वेतन नहीं मिलने से हड़ताल कर रखी थी। मामला संज्ञान में आने के बाद कंपनी अधिकारियों से बात की और उनके खातों में वेतन डलवाने के लिए कहा है। सुबह 10 बजे डायलिसिस सेंटर में कर्मचारी दोबारा काम पर लौट गए।
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-डॉ. जयभगवान जाटान, पीएमओ।