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Sonipat News: 800 से अधिक स्थानों पर होगा होलिका दहन, होलाष्टक आज से, मांगलिक कार्यों पर रोक

Fri, 07 Mar 2025 01:37 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत Updated Fri, 07 Mar 2025 01:37 AM IST
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Holika Dahan will happen at more than 800 places, Holashtak starts today, auspicious works banned
फोटो 18- सोनीपत के गांव मलिकपुर में होलाष्टक शूरू ​होते ही गाड़ा गया होली का डांडा। संवाद
सोनीपत। जिलाभर के करीब 800 से अधिक स्थानों पर 13 मार्च को होलिका दहन किया जाएगा। होलाष्टक से पूर्व भक्त प्रहलाद व उनकी बुआ होलिका की निशानी के तौर पर होली का डांडा गाड़ा जाता है।
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होलाष्टक शुक्ल पक्ष की अष्टमी 7 मार्च शुक्रवार से प्रारंभ होकर फाल्गुन माह की पूर्णिमा 13 मार्च वीरवार तक जारी रहेगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार होली से पहले इन आठ तिथियों को अशुभ माना जाता है। इनमें मांगलिक कार्य करना वर्जित रहेगा, जबकि भगवान विष्णु की उपासना विशेष फलदायी रहेगी।
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आचार्य मनमोहन मिश्रा व पंडित अमित शौनक ने बताया कि होलाष्टक होली व अष्टक दो शब्दों से बना है। इसका अर्थ आठ होता है। यह अवधि फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी से पूर्णिमा तक रहेगी। इस वर्ष 13 मार्च की रात होलिका दहन होगा, जबकि 14 मार्च को रंगों की होली खेली जाएगी। होलाष्टक में हर दिन एक ग्रह उग्र रहता है, इसलिए इनमें मांगलिक कार्य करना वर्जित माना गया है।
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शास्त्रों के अनुसार अष्टमी को चंद्रमा, नवमी को सूर्य, दशमी को शनि, एकादशी को शुक्र, द्वादशी को गुरु, त्रयोदशी को बुध, चतुर्दशी को मंगल व पूर्णिमा को राहु उग्र होते हैं। इस दिनों में विवाह, सगाई, गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्यों पर रोक रहेगी। होलाष्टक के दौरान भगवान विष्णु व नरसिंह अवतार की उपासना से विशेष फल की प्राप्ति होती है। हर मनोकामना पूर्ण होती है।

होलाष्टक में क्यों नहीं किए जाते शुभ कार्य
होलाष्टक हिरण्यकश्यप व प्रह्लाद की कथा से जुड़ा है। हिरण्यकश्यप स्वयं को भगवान मानता था। उनके पुत्र प्रह्लाद भगवान श्री हरि की भक्ति के पथ पर अग्रसर थे। हिरण्यकश्यप ने फाल्गुन शुक्ल की अष्टमी से प्रह्लाद को कठोर यातनाएं देना शुरू किया। इन आठ दिनों में प्रह्लाद को कई यातना दी गईं, लेकिन वह भगवान की कृपा से बच गए। फाल्गुन पूर्णिमा के दिन होलिका दहन से प्रह्लाद को विजय प्राप्त हुई। यही कारण है कि इन आठ दिनों को पीड़ा, संघर्ष व नकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना गया है।
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