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पंजाब का छोटा भाई है हरियाणा, आंदोलन में फर्ज निभा रहे हरियाणवी हरियाणवी

Tue, 23 Feb 2021 12:07 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 23 Feb 2021 12:07 AM IST
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Haryana is the younger brother of Punjab, Haryanvi is doing duty in the movement
कृषि कानून रद्द कराने के लिए चल रहे आंदोलन में किसानों को रिश्तों के साथ बांधकर एकजुट किया जा रहा है। जहां हरियाणा को पंजाब का छोटा भाई कहा जाता है और आंदोलन में हरियाणा के किसानों को छोटे भाई का फर्ज भी बखूबी निभाए जाने की बात कही जा रही है। खरखौदा की किसान महापंचायत में हरियाणा व पंजाब के साथ यूपी के रिश्ते को बताकर एकजुटता पर जोर दिया गया। इसके साथ ही किसी भी प्रदेश के किसानों का उत्पीड़न नहीं होने देने की बात कही गई। सभी के एक साथ खड़े रहने का आह्वान किया गया। किसान नेताओं ने यह भी साफ कहा कि आज खापों के कारण आंदोलन को मजबूती मिली है तो सर छोटूराम व चौधरी चरण सिंह को असली किसान नेता बताया गया।
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संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य अभिमन्यु कोहाड़ ने कहा कि पंजाब के किसान नेताओं व किसानों के मान-सम्मान को कोई ठेस पहुंचाएगा तो हरियाणा वाले सबसे आगे खड़े रहेंगे। किसान का मान-सम्मान बचाने के लिए अपनी गर्दन भी कटाने को तैयार हैं। युद्धवीर सिंह ने कहा कि किसान का मनोबल सर्दी व बारिश में नहीं टूट सका तो सरकार के दबाव से टूटना नामुमकिन है। हरियाणा के लोगों ने हमेशा इतिहास रचा है और इस समय भी पूरे देश के किसानों को उनका हक दिलाने के लिए हरियाणा के लोग नया इतिहास रच रहे है। उन्होंने कहा कि सर छोटूराम व चौधरी चरण सिंह ही असली किसान नेता है और उनके कानूनों को इस तरह से नहीं बदलने देंगे। कहा कि यह बड़ी लड़ाई है और यह लंबी चलेगी। पंजाब के किसान नेता जगजीत सिंह दल्लेवाल ने कहा कि हरियाणा ने आंदोलन में पंजाब का छोटा भाई होने का पूरा फर्ज निभाया है और ट्रैक्टर परेड के बाद से वह शक्ति बनकर खड़ा हुआ है। यूपी भी पड़ोसी भाई की तरह पूरा साथ दे रहा है और इस तरह से यह एकजुटता हमेशा बनी रहनी चाहिए। जगजीत दल्लेवाल ने कहा कि इस आंदोलन में न होश, न जोश खोना है, क्योंकि आंदोलन में छोटी गलती भी भारी पड़ सकती है। किसानों को बचाने के लिए यह आंदोलन जीतना होगा और इसलिए सभी जीतने के लिए लड़ते रहे। कहा कि कृषि कानून रद्द कराने के साथ ही एमएसपी पर कानून बनने के बाद ही किसान वापस जाएगा। इस दौरान मंडी प्रधान नरेश दहिया, संजय गांधी, हिंद केसरी संजय पहलवान, संजय दहिया, कृष्ण दहिया, विरेंद्र उर्फ ढीलू, रणदीप दहिया मौजूद रहे।
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हर धरनास्थल पर मनाई जाएगी गुरु रविदास की जयंती, फसल जुताई नहीं करने की अपील
आंदोलन में दलित वर्ग को जोड़ने पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। जिससे इस पर केवल जाट व सिख का आंदोलन होने की छाप नहीं लग सके। भाकियू नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि इस बार सभी किसान मिलकर गुरु रविदास की जयंती मनाएंगे। इस आंदोलन से ज्यादा से ज्यादा दलित व अन्य समाज को जोड़ा जाएगा।
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उन्होंने कहा कि फसल की कोई जुताई नहीं करे। वह खून-पसीने से तैयार की जाती है। इसलिए इस तरह का कदम नहीं उठाया जाए। वहीं किसानों से आत्महत्या नहीं करने की अपील की गई है।
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