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Sonipat News: इंद्र व भद्रावास योग में 10 जुलाई को मनाया जाएगा गुरु पूर्णिमा पर्व, भद्रा का पाताल में वास
Sat, 05 Jul 2025 01:33 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Sat, 05 Jul 2025 01:33 AM IST
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सोनीपत। आषाढ़ माह की पूर्णिमा पर 10 जुलाई को गुरु पूर्णिमा पर्व मनाया जाएगा। जिसे वेदव्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। इसी दिन महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था। महर्षि वेदव्यास ने गुरु पूर्णिमा पर पहली बार मानव जाति को चारों वेदों का ज्ञान दिया था, जिन्हें प्रथम गुरु भी माना जाता है।
पंडित अमित शौनक ने बताया कि हिंदू धर्म के अनुसार गुरु का स्थान सर्वश्रेष्ठ है, जो हमें ज्ञान की प्राप्ति करवाकर हमारे जीवन को सफल बनाते हैं। इस दिन गुरु का पूजन करने से आशीर्वाद के साथ धन, संपत्ति, सुख-समृद्धि व यश-वैभव की प्राप्ति होती है। सच्चा गुरु वह है, जो शिष्य को अज्ञानता के अंधकार से निकालकर उसका सही मार्गदर्शन करें।
महर्षि वेदव्यास को श्रीमद्भागवत, महाभारत, ब्रह्मसूत्र मीमांसा के अलावा 18 पुराणों का रचयिता माना जाता है। गुरु पूर्णिमा पर गुरु की पूजा का खास महत्व है। हमें घर में विधिवत देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना कर गुरु पूजन कर उनसे आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए। गुरु परिवार में हमारे बड़ों के रूप में भी हो सकते हैं।
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आरोग्य जीवन का मिलेगा वरदान, कष्टों से मुक्ति
पूर्णिमा तिथि 10 जुलाई को रात 01:36 बजे प्रारंभ होकर 11 जुलाई को रात 2:06 बजे तक रहेगी। उदयातिथि के अनुसार गुरु पूर्णिमा 10 जुलाई को मनाई जाएगी। आषाढ़ पूर्णिमा पर इंद्र, भद्रावास योग का संयोग बन रहा है। इस योग में गंगा स्नान कर भगवान विष्णु, वेदव्यास की पूजा-अर्चना करने से मनुष्य को आरोग्य जीवन का वरदान व सभी कष्टों से मुक्ति मिलेगी। पूर्णिमा तिथि के दिन पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र, इंद्र योग रात 9:38 बजे तक, भद्रावास योग दोपहर 1:55 बजे तक रहेगा। इसके पश्चात वैधृति योग प्रारंभ होगा। इस वर्ष भद्रा का पाताल में वास रहेगा। चंद्रमा धनु राशि में संचार करेंगे।
शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त : सुबह 4:10 से 4:50 बजे
विजय मुहूर्त : दोपहर 2:45 से 3:40 बजे
गोधूलि मुहूर्त : शाम 7:21 से 7:41 बजे
निशिता मुहूर्त : रात 12:06 से 12:47 बजे
गुरु पूजन विधि
गुरु पूर्णिमा पर सुबह प्रात:काल स्वच्छ वस्त्र धारण कर पूजा का संकल्प करें। चौकी पर सफेद वस्त्र बिछाकर व्यासपीठ का निर्माण करें, उस पर गुरु की प्रतिमा स्थापित करें। उन्हें चंदन, रौली, पुष्प, फल व प्रसाद अर्पित करें। गुरु महर्षि वेदव्यास के साथ बृहस्पति, शुक्रदेव व शंकराचार्य सहित मन में धारण किए गए गुरुओं का भी पूजन करना विशेष रहेगा। जिनके गुरु जीवित हैं, उनका पूजन कर उनसे आशीर्वाद प्राप्त कर उपहार, वस्त्र, फल, पुष्पमाला, दक्षिणा भेंट कर उनके समक्ष अवगुणों का त्याग करने की प्रतिज्ञा लें। तभी जीवन का कल्याण संभव है।
यह कर सकते हैं उपाय
- विद्यार्थी शिक्षा में आ रही रुकावटों के चलते प्रात:कालीन उठकर बड़ों का आशीर्वाद प्राप्त करें, उनकी अवमानना न करें। भगवान विष्णु व गणेश जी की आराधना करें।
- आर्थिक तंगी से बचने के लिए भगवान सत्यनारायण की कथा करें, इससे घर में सुखों का आगमन होगा।
- सुख-शांति व समृद्धि के लिए गोवंशों को चारा खिलाएं, पक्षियों के लिए छत पर दाना-जल की व्यवस्था करें।
- सफलता पाने के लिए बृहस्पति देव को ऊॅं बृ बृहस्पतये नमः मंत्र का जाप करते हुए पीले पुष्प व प्रसाद अर्पित करें, अटके कार्य पूर्ण होंगे।
- निसंतान दंपती भगवान विष्णु को केसर, पीला चंदन अर्पित करें, जरूरतमंदों को भोजन करवाएं, इससे जल्द संतान की प्राप्ति होगी।
- आध्यात्मिक उन्नति, सुख-समृद्धि के लिए विष्णु सहस्रनाम, लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करें।
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पंडित अमित शौनक ने बताया कि हिंदू धर्म के अनुसार गुरु का स्थान सर्वश्रेष्ठ है, जो हमें ज्ञान की प्राप्ति करवाकर हमारे जीवन को सफल बनाते हैं। इस दिन गुरु का पूजन करने से आशीर्वाद के साथ धन, संपत्ति, सुख-समृद्धि व यश-वैभव की प्राप्ति होती है। सच्चा गुरु वह है, जो शिष्य को अज्ञानता के अंधकार से निकालकर उसका सही मार्गदर्शन करें।
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महर्षि वेदव्यास को श्रीमद्भागवत, महाभारत, ब्रह्मसूत्र मीमांसा के अलावा 18 पुराणों का रचयिता माना जाता है। गुरु पूर्णिमा पर गुरु की पूजा का खास महत्व है। हमें घर में विधिवत देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना कर गुरु पूजन कर उनसे आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए। गुरु परिवार में हमारे बड़ों के रूप में भी हो सकते हैं।
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आरोग्य जीवन का मिलेगा वरदान, कष्टों से मुक्ति
पूर्णिमा तिथि 10 जुलाई को रात 01:36 बजे प्रारंभ होकर 11 जुलाई को रात 2:06 बजे तक रहेगी। उदयातिथि के अनुसार गुरु पूर्णिमा 10 जुलाई को मनाई जाएगी। आषाढ़ पूर्णिमा पर इंद्र, भद्रावास योग का संयोग बन रहा है। इस योग में गंगा स्नान कर भगवान विष्णु, वेदव्यास की पूजा-अर्चना करने से मनुष्य को आरोग्य जीवन का वरदान व सभी कष्टों से मुक्ति मिलेगी। पूर्णिमा तिथि के दिन पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र, इंद्र योग रात 9:38 बजे तक, भद्रावास योग दोपहर 1:55 बजे तक रहेगा। इसके पश्चात वैधृति योग प्रारंभ होगा। इस वर्ष भद्रा का पाताल में वास रहेगा। चंद्रमा धनु राशि में संचार करेंगे।
शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त : सुबह 4:10 से 4:50 बजे
विजय मुहूर्त : दोपहर 2:45 से 3:40 बजे
गोधूलि मुहूर्त : शाम 7:21 से 7:41 बजे
निशिता मुहूर्त : रात 12:06 से 12:47 बजे
गुरु पूजन विधि
गुरु पूर्णिमा पर सुबह प्रात:काल स्वच्छ वस्त्र धारण कर पूजा का संकल्प करें। चौकी पर सफेद वस्त्र बिछाकर व्यासपीठ का निर्माण करें, उस पर गुरु की प्रतिमा स्थापित करें। उन्हें चंदन, रौली, पुष्प, फल व प्रसाद अर्पित करें। गुरु महर्षि वेदव्यास के साथ बृहस्पति, शुक्रदेव व शंकराचार्य सहित मन में धारण किए गए गुरुओं का भी पूजन करना विशेष रहेगा। जिनके गुरु जीवित हैं, उनका पूजन कर उनसे आशीर्वाद प्राप्त कर उपहार, वस्त्र, फल, पुष्पमाला, दक्षिणा भेंट कर उनके समक्ष अवगुणों का त्याग करने की प्रतिज्ञा लें। तभी जीवन का कल्याण संभव है।
यह कर सकते हैं उपाय
- विद्यार्थी शिक्षा में आ रही रुकावटों के चलते प्रात:कालीन उठकर बड़ों का आशीर्वाद प्राप्त करें, उनकी अवमानना न करें। भगवान विष्णु व गणेश जी की आराधना करें।
- आर्थिक तंगी से बचने के लिए भगवान सत्यनारायण की कथा करें, इससे घर में सुखों का आगमन होगा।
- सुख-शांति व समृद्धि के लिए गोवंशों को चारा खिलाएं, पक्षियों के लिए छत पर दाना-जल की व्यवस्था करें।
- सफलता पाने के लिए बृहस्पति देव को ऊॅं बृ बृहस्पतये नमः मंत्र का जाप करते हुए पीले पुष्प व प्रसाद अर्पित करें, अटके कार्य पूर्ण होंगे।
- निसंतान दंपती भगवान विष्णु को केसर, पीला चंदन अर्पित करें, जरूरतमंदों को भोजन करवाएं, इससे जल्द संतान की प्राप्ति होगी।
- आध्यात्मिक उन्नति, सुख-समृद्धि के लिए विष्णु सहस्रनाम, लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करें।