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किसानों पर दर्ज मुकदमे तुरंत वापस ले सरकार : एसकेएम
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सोनीपत। संयुक्त किसान मोर्चा के नेता 28 अगस्त को बसताड़ा टोल पर लाठीचार्ज करने और बाद में 25 सौ से अधिक किसानों के खिलाफ मुकदमे दर्ज करने के मामले में सख्त रुख अपना रहे हैं। एसकेएम ने भाजपा-जजपा सरकार से किसानों के खिलाफ दर्ज सभी मुकदमों को तत्काल बिना शर्त वापस लेने की मांग की है।
उधर, ऑल इंडिया लॉयर्स यूनियन (एआईएलयू) ने हरियाणा सरकार की इस कार्रवाई के खिलाफ 2 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट से हरियाणा भवन तक विरोध मार्च निकालने की घोषणा की है।
संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य जगजीत सिंह डल्लेवाल और जोगिंदर सिंह उगराहां ने कुंडली बॉर्डर धरनास्थल पर कहा कि हरियाणा सरकार अंबाला, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, करनाल, झज्जर, सिरसा, सोनीपत, कैथल और अन्य स्थानों के विभिन्न पुलिस स्टेशनों में 25 सौ से अधिक आंदोलनकारियों के खिलाफ दर्ज मुकदमे तत्काल और बिना शर्त वापस ले। उनका कहना है कि शर्मनाक तरीके से पंचकूला में 80 वर्षीय बुजुर्ग महिला किसान राजविंदर कौर को भी नामजद किया गया है। प्रदेश के किसानों के खिलाफ सरकार की यह शर्मनाक करतूत है। एक तरफ तो सीएम कह रहे हैं कि वह विरोध के नाम पर हिंसा नहीं होने देंगे जबकि सरकार कानून व्यवस्था के नाम पर बेरहमी से हिंसक कार्रवाई कर रही है।
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आज एआईएलयू निकालेगी विरोध मार्च
सरकार के किसान विरोधी और बर्बर व्यवहार के खिलाफ करनाल बार एसोसिएशन के सदस्यों ने 28 अगस्त 2021 को विरोध प्रदर्शन किया था और एसडीएम आयुष सिन्हा और लाठीचार्ज की घटनाओं में शामिल अन्य दोषियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की थी। अब ऑल इंडिया लॉयर्स यूनियन (एआईएलयू) ने भी घोषणा की है कि 2 सितंबर को एक विरोध प्रदर्शन आयोजित करेंगे। एआईएलयू ने कहा कि वह वीरवार को सुप्रीम कोर्ट से हरियाणा भवन तक विरोध मार्च निकालेंगे।
दिल्ली पुलिस के सामने पेश न हों किसान
संयुक्त किसान मोर्चा के लीगल पैनल के कन्वीनर प्रेम सिंह भांगु ने कहा कि दिल्ली पुलिस ने 26 जनवरी से संबंधित मामलों में जांच में शामिल होने के लिए किसानों को सीआरपीसी की धारा 160 के तहत नए नोटिस जारी किए हैं। उन्होंने दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई को असंवैधानिक करार दिया। उनका कहना है कि इन नोटिसों को प्राप्त करने वाले किसानों का नाम एफआईआर में नहीं था और न ही उन्होंने किसी हिंसक घटना में भाग लिया है। उन्होंने कहा कि यह दिल्ली पुलिस की एक आपत्तिजनक व धमकाने की रणनीति है जिसकी निंदा की जानी चाहिए। एसकेएम के लीगल पैनल ने किसानों से कहा है कि वह जांच अधिकारियों के सामने पेश न हों। यह स्पष्ट है कि दिल्ली पुलिस उन्हें फंसाने का इरादा कर काम कर रही है।
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उधर, ऑल इंडिया लॉयर्स यूनियन (एआईएलयू) ने हरियाणा सरकार की इस कार्रवाई के खिलाफ 2 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट से हरियाणा भवन तक विरोध मार्च निकालने की घोषणा की है।
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संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य जगजीत सिंह डल्लेवाल और जोगिंदर सिंह उगराहां ने कुंडली बॉर्डर धरनास्थल पर कहा कि हरियाणा सरकार अंबाला, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, करनाल, झज्जर, सिरसा, सोनीपत, कैथल और अन्य स्थानों के विभिन्न पुलिस स्टेशनों में 25 सौ से अधिक आंदोलनकारियों के खिलाफ दर्ज मुकदमे तत्काल और बिना शर्त वापस ले। उनका कहना है कि शर्मनाक तरीके से पंचकूला में 80 वर्षीय बुजुर्ग महिला किसान राजविंदर कौर को भी नामजद किया गया है। प्रदेश के किसानों के खिलाफ सरकार की यह शर्मनाक करतूत है। एक तरफ तो सीएम कह रहे हैं कि वह विरोध के नाम पर हिंसा नहीं होने देंगे जबकि सरकार कानून व्यवस्था के नाम पर बेरहमी से हिंसक कार्रवाई कर रही है।
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आज एआईएलयू निकालेगी विरोध मार्च
सरकार के किसान विरोधी और बर्बर व्यवहार के खिलाफ करनाल बार एसोसिएशन के सदस्यों ने 28 अगस्त 2021 को विरोध प्रदर्शन किया था और एसडीएम आयुष सिन्हा और लाठीचार्ज की घटनाओं में शामिल अन्य दोषियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की थी। अब ऑल इंडिया लॉयर्स यूनियन (एआईएलयू) ने भी घोषणा की है कि 2 सितंबर को एक विरोध प्रदर्शन आयोजित करेंगे। एआईएलयू ने कहा कि वह वीरवार को सुप्रीम कोर्ट से हरियाणा भवन तक विरोध मार्च निकालेंगे।
दिल्ली पुलिस के सामने पेश न हों किसान
संयुक्त किसान मोर्चा के लीगल पैनल के कन्वीनर प्रेम सिंह भांगु ने कहा कि दिल्ली पुलिस ने 26 जनवरी से संबंधित मामलों में जांच में शामिल होने के लिए किसानों को सीआरपीसी की धारा 160 के तहत नए नोटिस जारी किए हैं। उन्होंने दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई को असंवैधानिक करार दिया। उनका कहना है कि इन नोटिसों को प्राप्त करने वाले किसानों का नाम एफआईआर में नहीं था और न ही उन्होंने किसी हिंसक घटना में भाग लिया है। उन्होंने कहा कि यह दिल्ली पुलिस की एक आपत्तिजनक व धमकाने की रणनीति है जिसकी निंदा की जानी चाहिए। एसकेएम के लीगल पैनल ने किसानों से कहा है कि वह जांच अधिकारियों के सामने पेश न हों। यह स्पष्ट है कि दिल्ली पुलिस उन्हें फंसाने का इरादा कर काम कर रही है।