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किसान आंदोलन पर प्रतिदिन 50 लाख रुपये खर्च कर रही सरकार

Sun, 14 Mar 2021 12:10 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 14 Mar 2021 12:10 AM IST
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Government spending 50 lakh rupees daily on farmer movement
अंकित चौहान
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सोनीपत। किसान आंदोलन के कारण नेशनल हाईवे व अन्य रास्ते बंद होने से उद्योगों को केवल नुकसान ही नहीं हो रहा है। बल्कि किसान आंदोलन पर सरकार को प्रतिदिन 50 लाख रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। यह रुपया किसानों के धरनास्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था से लेकर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर खर्च किया जा रहा है। अर्द्घसैनिक बलों का वेतन भी प्रदेश सरकार को वहन करना पड़ रहा है। इस तरह किसान आंदोलन प्रदेश के खजाने पर भी भारी पड़ रहा है।
कृषि कानून रद्द कराने की मांग को लेकर किसानों ने कुंडली व टीकरी बॉर्डर पर डेरा डाला हुआ है। इन दोनों जगहों पर अर्द्घसैनिक बलों की करीब 26 कंपनियां तैनात है तो 4 कंपनी रिजर्व पुलिस की तैनात है जो दोनों जगहों पर सुरक्षा व्यवस्था को संभाल रही है। अर्द्घसैनिक बल के जवान जब किसी राज्य में सुरक्षा व्यवस्था के लिए मांगे जाते है तो उनका वेतन से लेकर खानपान व रहने की सभी व्यवस्था वहां की सरकार को करनी होती है और इस तरह से सुरक्षा व्यवस्था पर हर महीने करीब 13 करोड़ रुपये सरकारी खजाने से खर्च हो रहे है। जबकि अन्य व्यवस्थाओं पर करीब दो करोड रुपये से ज्यादा प्रतिमाह खर्च हो रहे है। वहां स्वास्थ्य विभाग की 20 टीमों को किसानों की सेहत की जांच के लिए लगाया हुआ है तो धरनास्थलों पर 150 से ज्यादा सफाई कर्मी कार्य करते है। वहीं स्थानीय प्रशासन ने 120 शौचालय, करीब 24 पानी के टैंकर, कैमरे, टैंट, गद्दे समेत अन्य व्यवस्थाएं की हुई है। वहां फायर ब्रिगेड की 18 गाडिय़ों को खड़ा किया गया है, जिनपर कर्मी तैनात रहते है। इनमें शौचालय व पानी के टैंकर किसानों के लिए है तो टैंट व गद्दे समेत अन्य चीजें सुरक्षा कर्मियों के लिए है। इनके अलावा भी जब आंदोलन में कोई बड़ा कार्यक्रम होता है तो वहां अधिकारी व सुरक्षा कर्मी लगाए जाते है।
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धरनास्थलों पर व्यवस्थाओं के लिए अलग से मांगना पड़ा बजट
किसानों के धरना देने के कारण वहां व्यवस्थाएं भी पूरी करना जरूरी है, क्योंकि वहां कोई व्यवस्था नहीं होने पर बड़ा मुद्दा बनाया जाता है। धरनास्थलों पर व्यवस्थाओं के लिए स्थानीय प्रशासन को अलग से बजट मांगना पड़ा है। जहां सोनीपत प्रशासन ने करीब 65 लाख रुपये का प्रस्ताव बनाकर सरकार को भेजा है।
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किसानों के धरनास्थलों पर स्वास्थ्य विभाग की टीमों के अलावा शौचालय, सफाई कर्मी, पानी के टैंकर समेत अन्य काफी व्यवस्थाएं की गई है। इनके अलावा अर्द्घसैनिक बल व रिजर्व पुलिस बल के जवानों की ड्यूटी लगाई गई है। उनके खानपान से लेकर रहने की पूरी व्यवस्था प्रशासन को करनी होती है। उनका पूरा खर्च सरकार की ओर से वहन किया जा रहा है और वह खर्च काफी ज्यादा है। श्यामलाल पूनिया, डीसी
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