लड़कियों की मर्दानगी से सुर्खियों में आया ‘थाना खुर्द’

ब्यूरो/अमर उजाला, सोनीपत Updated Tue, 02 Dec 2014 12:24 AM IST
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कल तक जिस गांव का नाम भी शायद किसी को मालूम न था, आज वो गांव प्रदेश ही नहीं बल्कि देश की जुबान पर चढ़ा हुआ है।
वो भी सिर्फ दो ऐसी वीर बहनों के कारण जोलड़कों की छेड़खानी से तंग आकर मर्दानी बनकर उभरी हैं। थाना खुर्द गांव की रहने वाली यह दोनों बहनें सोमवार को किसी वीआईपी से कम नजर नहीं आई। पूरे गांव में इतने लोग नहीं रहते, जितने की सोमवार को बाहर से इन बहनों को मिलने के लिये आए। प्रदेश का ही नहीं बल्कि देशभर का मीडिया पूजा और आरती के घर पहुंचा हुआ था। हर किसी का मकसद दोनों बहनों से बातचीत करना तथा उनके साथ हुए घटनाक्रम को जानना था। हालांकि रविवार को देर रात आरोपी पक्ष के परिजन भी लड़कियों के घर पहुंचे थे, लेकिन समझौते की बात सिरे नहीं चढ़ पाई।

बस में बैठे किसी यात्री ने नहीं की मदद
उन्होंने बताया कि वे  रोहतक बीसीए में पढ़ती हैं। घटनाक्रम के बारे में बताया कि वे बस का इंतजार कर रही थीं, यहां पर तीन लड़के खड़े थे। उन्होंने उनकी तरफ एक पर्ची डाली, परंतु उन्होंने उसे नहीं उठाया। इस पर उनमें से एक ने उनको गाली भी दी। इसके बाद बस आ गई और वे लड़के भी उनके पीछे बस में चढ़ गए। उन्होंने उनके साथ छेड़खानी जारी रखी। जिससे उनके सब्र का बांध टूट गया और उन्होंने हाथ उठाना ही उचित समझा। लेकिन उन्हें इस बात की हैरानी है कि बस बैठे किसी भी व्यक्ति ने उनकी मदद नहीं की।

लड़कें और लड़कियों में न समझें फर्क
इन वीरांगना बहनों के पिता राजेश का कहना है कि उन्होंने अपनी लड़कियों को लड़कों की तरह पाला है। कभी उन्हें यह अहसास नहीं होने दिया कि वे लड़कियां हैं। उन्होंने कहा कि हमें लड़के और लड़की में कोई फर्क नहीं समझना चाहिए। इसलिए लड़कियों की परवरिश लड़कों की तरह से करनी चाहिए। उन्हें अपनी दोनों बेटियों पर गर्व है। उन्होंने कहा कि उनकी लड़कियों ने कभी भी उनसे कोई बात नहीं छिपाई। उनके साथ जो कुछ भी होता है वे हमें बता देती हैं। हमने भी कभी उन्हें किसी प्रकार की कमी नहीं आने दी।

लड़कियां नहीं मेरे बेटे हैं : संतोष
माता संतोष ने कहा कि वे उनकी लड़कियां नहीं बल्कि लड़के हैं। उन्हें आज गर्व है कि उन्होंने अपने आत्म सम्मान को बचाने के लिए इस तरह कदम उठा कर कायरता नहीं दिखायी। वे महिलाओं से आह्वान करती हैं कि वे अपनी लड़कियों को भी लड़कों की तरह से प्यार दें। आज लड़कियां किसी भी क्षेत्र में लड़कों से कम नहीं हैं।

देर रात आए थे आरोपियों के परिजन
राजेश ने बताया कि आसन निवासी आरोपी दीपक, कुलदीप और मोहित के परिजन और उनके नजदीकी रविवार देर रात उनके घर पर आए थे। उन्होंने कहा कि देखो जो गलती हो गई सो हो गई। इस बात को यहीं पर खत्म कर दो नहीं उनके बच्चों को भविष्य खराब हो जाएगा। हम तीनों लड़कों को पांच-पांच जूते मार देंगे और लड़कियों से माफी मंगवा देंगे। इस पर उन्होंने शर्त रखी थी कि तीनों लड़के गांव आसन में लड़कियों के पांव पकड़ कर माफी मांगे तो वे तैयार हैं, परंतु इस पर वे राजी नहीं हुए। उन्होंने कहा कि वे थाना खुर्द में मांफी मंगवा सकते हैं और बात यहीं पर रुक गई।

पहले रेस्ट हाउस अब इन बहनों से है पहचान
गांव के सरपंच संजय कुमार का कहना है कि उनके गांव की पहचान अंग्रेजों के जमाने के रेस्ट हाउस से थी, क्योंकि यहां पर अंग्रेजों के लिए विश्राम गृह था। इन दोनों बहनों आरती और पूजा ने वो कर दिखाया जिसकी लड़कियों से आस नहीं होती।  इससे गांव के लोग अपने आप को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। पहले जहां उनके गांव की पहचान रेस्ट हाउस से थी वहीं अब इन दोनों बहनों के जज्बे ने नई पहचान बना दी। उन पर जितना गर्व किया जाए कम है।

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