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एड्स और टीबी के मरीजों को अब रोजाना लेनी होगी दवा
Sonipat
Updated Sun, 21 Aug 2016 12:16 AM IST
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दवाई
- फोटो : demo
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अब टीबी यानी क्षयरोग का उपचार फिक्स डोज कंबिनेशन से होगा। इसकी शुरुआत उन मरीजों से होगी, जिनको एड्स के साथ टीबी भी है। रोगियों को वजन के हिसाब से दवा की मात्रा तय की जाएगी और यह दवा प्रतिदिन दवा लेनी होगी। इसकी शुरुआत सितंबर माह में शुरू होगी।
स्वास्थ्य विभाग में मुताबिक, जिले में उन मरीजों को एड्स है उनकी संख्या 1350 है। जिनमें से 192 मरीज सिविल अस्पताल से उपचार करा रहे है। बाकी लोग दिल्ली व यूपी के अलावा अन्य जिलों से करवा रहे हैं। जबकि एड्स और टीबी दोनों के मरीजों की संख्या 40 से 60 तक है। उनको वर्तमान में सप्ताह में तीन बार दवा मिल रही है। अब मरीजों को तीन दिन की बजाय दवा को रोजाना लेनी पड़ेगा।
पांच राज्यों में टीबी पर शुरू हो चुका है पायलट प्रोजेक्ट
दवा का यह नया तरीका बीमारी को समाप्त करने के लिए पहले के मुकाबले अधिक कारगर होगा। क्षयरोग को समाप्त करने के लिए शुरू किए फिक्स डोज कॉम्बिनेशन कार्यक्रम पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर पांच राज्यों में चलाया जा रहा है। इसमें हिमाचल, महाराष्ट्र, केरल, बिहार और सिक्किम शामिल हैं। अभी तक क्षय रोगियों का उपचार डॉट्स के तहत किया जाता है।
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रोजाना दवा देने के लिए दिया जा रहा प्रशिक्षण
ग्रामीणक्षेत्रों और दूर दराज के रोगियों को इस सुविधा का लाभ पहुंचाने के लिए चिकित्सकों, पैरा मेडिकल स्टाफ, आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के अलावा डॉटस से जुड़े निजी क्लीनिकों को भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
टीबी के मरीजों को दवा देने के लिए पायलट प्रोजेक्ट पांच राज्यों में शुरू हो चुका है। अब एचआईवी पॉजिटिव के साथ साथ जिन मरीजों को टीबी है, उन मरीजों को सितंबर से रुटीन में दवा दी जाएगी। रिवाइज्ड नेशनल ट्यूबर कुलोसिस कंट्रोल प्रोग्राम के तहत यह योजना को सितंबर से आरंभ किया जा रहा है। ताकि टीबी का खात्मा जल्द से जल्द हो।
डॉ. तरुण यादव, जिला क्षय रोग अधिकारी, सोनीपत
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स्वास्थ्य विभाग में मुताबिक, जिले में उन मरीजों को एड्स है उनकी संख्या 1350 है। जिनमें से 192 मरीज सिविल अस्पताल से उपचार करा रहे है। बाकी लोग दिल्ली व यूपी के अलावा अन्य जिलों से करवा रहे हैं। जबकि एड्स और टीबी दोनों के मरीजों की संख्या 40 से 60 तक है। उनको वर्तमान में सप्ताह में तीन बार दवा मिल रही है। अब मरीजों को तीन दिन की बजाय दवा को रोजाना लेनी पड़ेगा।
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पांच राज्यों में टीबी पर शुरू हो चुका है पायलट प्रोजेक्ट
दवा का यह नया तरीका बीमारी को समाप्त करने के लिए पहले के मुकाबले अधिक कारगर होगा। क्षयरोग को समाप्त करने के लिए शुरू किए फिक्स डोज कॉम्बिनेशन कार्यक्रम पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर पांच राज्यों में चलाया जा रहा है। इसमें हिमाचल, महाराष्ट्र, केरल, बिहार और सिक्किम शामिल हैं। अभी तक क्षय रोगियों का उपचार डॉट्स के तहत किया जाता है।
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रोजाना दवा देने के लिए दिया जा रहा प्रशिक्षण
ग्रामीणक्षेत्रों और दूर दराज के रोगियों को इस सुविधा का लाभ पहुंचाने के लिए चिकित्सकों, पैरा मेडिकल स्टाफ, आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के अलावा डॉटस से जुड़े निजी क्लीनिकों को भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
टीबी के मरीजों को दवा देने के लिए पायलट प्रोजेक्ट पांच राज्यों में शुरू हो चुका है। अब एचआईवी पॉजिटिव के साथ साथ जिन मरीजों को टीबी है, उन मरीजों को सितंबर से रुटीन में दवा दी जाएगी। रिवाइज्ड नेशनल ट्यूबर कुलोसिस कंट्रोल प्रोग्राम के तहत यह योजना को सितंबर से आरंभ किया जा रहा है। ताकि टीबी का खात्मा जल्द से जल्द हो।
डॉ. तरुण यादव, जिला क्षय रोग अधिकारी, सोनीपत