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पिता-पुत्र बेतुके आदमी, उनकी बाताें का कोई अर्थ नहीं : ढांडा

Sun, 22 Jun 2025 12:50 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत Updated Sun, 22 Jun 2025 12:50 AM IST
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Father and son are absurd people, their words have no meaning: Dhanda
फोटो 13- सोनीपत के जटवाड़ा स्थित खिजर मकबरा पर आयोजित जिला स्तरीय योग दिवस कार्यक्रम के दौरान स
सोनीपत। शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और उनके सांसद बेटे दीपेंद्र हुड्डा के प्रदेश में शासक न होने वाले बयान पर चुटकी ली। शिक्षा मंत्री ने कहा कि यह तो कुछ भी कह देंगे। इनके कहने से कुछ नहीं होता है। दोनोें बेतुके आदमी हैं। यह फालतू की बात करते रहते हैं। इनकी बात का कोई अर्थ नहीं है।
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ढांडा ने शनिवार को 11वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम के तहत जटवाड़ा स्थित खिजर मकबरा परिसर में आयोजित जिलास्तरीय कार्यक्रम में भाग लेने के बाद पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस पर जमकर कटाक्ष किया।
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शिक्षा मंत्री ने बोर्ड की परीक्षाओं के नकल मामले में शिक्षकों की संलिप्तता पर कहा कि ऐसा नहीं होता कि आप सीधे तौर पर किसी पर कार्रवाई कर देंगे। इसके लिए पहले रिपोर्ट तैयार की जाती है। रिपोर्ट बनने के बाद ही कार्रवाई की जाती है। इस मामले में तीन लोग पकड़ में आए थे। अगर उनकी नकल कराने में संलिप्तता पाई गई तो उन पर नियमानुसार बोर्ड व विभाग उन पर कार्रवाई करेंगे और कर भी रहे हैं। ऐसा नहीं है कि किसी भी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई है।
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शिक्षा मंत्री ने बताया कि नकल कराने के मामले में अलग-अलग क्षेत्र से लोग हैं। उनकी बातें भी अलग-अलग निकलकर आई हैं। अधिकारी इन्हीं मामलों की जांच कर रहे हैं। आज प्रदेश में कानून व्यवस्था बिल्कुल दुरुस्त है।

हम उर्दू, पंजाबी, संस्कृत के साथ पढ़ाएंगे विदेशी भाषा

शिक्षा मंत्री ने कहा कि हिंदी हमारी राजभाषा है, इसलिए शिक्षा विभाग में सभी अधिकारियों व कर्मचारियों को हिंदी में ही काम करने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें कोई बुराई भी नहीं है। हम किसी दूसरी भाषा का विरोध नहीं करते, लेकिन भाषा का ज्ञान होना जरूरी है।

जितना ज्ञान होगा, उतनी ही हमारे जीवन में सुगमता व सरलता आएगी। जिसे जिस भाषा को पढ़ना या जानना है, वह जानिए। यह पहले भी कहा गया है कि हम लोग उर्दू भी पढ़ाएंगे, पंजाबी, संस्कृत भी पढ़ाएंगे। इसके साथ विदेशी भाषा भी पढ़ाएंगे। सभी भाषाओं का ज्ञान होना जरूरी है, लेकिन काम अपनी भाषा में ही करना। इससे गर्व और गौरव की अनुभूति होती है।
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