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बेटी से दुष्कर्म का प्रयास करने के आरोपों से पिता बरी
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सोनीपत। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट) सुरुचि अतरेजा सिंह की अदालत ने बेटी से दुष्कर्म का प्रयास करने के मामले में सुनवाई के बाद आरोपी पिता को बरी कर दिया। बरी हुए व्यक्ति के अधिवक्ता ने बताया कि पति से अलग होने के लिए महिला ने बेटी से आरोप लगवाए थे।
17 साल की किशोरी ने 19 जनवरी, 2021 को पुलिस को बताया था कि उसका पिता शराब पीकर उसकी मां व उनके साथ मारपीट करता था। जिसके बाद उसकी मां मायके चली गई। उसने अलग होने के लिए केस कर रखा है। किशोरी ने आरोप लगाया था कि उसके पिता ने उसके व उसकी छोटी बहन के साथ दुष्कर्म का प्रयास किया। विरोध करने पर उनके साथ मारपीट की जाने लगी। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था।
वरिष्ठ अधिवक्ता हरिओम शर्मा ने बताया कि एएसजे सुरुचि अतरेजा सिंह की अदालत ने उनके मुवक्किल को बरी कर दिया है। उन्होंने बताया कि इससे पहले इस तरह के केस करेल, दिल्ली, पश्चिमी बंगाल व महाराष्ट्र में भी सामने आए हैं। उन्होंने बताया कि मामले में पुलिस ने जांच की तो नाबालिग बहनों ने मेडिकल जांच से इनकार कर दिया था। मामले में 7 अप्रैल, 2021 को लड़कियों के पिता पर चार्ज लगाया गया था। मामले में सुनवाई के बाद अदालत ने अब लड़कियों के पिता को बरी कर दिया है।
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उन्होंने कहा कि पति व पत्नी को आपसी झगड़े में बच्चों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। इस तरह के झूठे मुकदमे सामाजिक ताने बाने के लिए जहर के समान है। उनके साथ अधिवक्ता अभिनव शर्मा, अधिवक्ता लोकेश दहिया, अधिवक्ता मयंक हंस और अधिवक्ता अंकित कुमार मौजूद रहे।
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17 साल की किशोरी ने 19 जनवरी, 2021 को पुलिस को बताया था कि उसका पिता शराब पीकर उसकी मां व उनके साथ मारपीट करता था। जिसके बाद उसकी मां मायके चली गई। उसने अलग होने के लिए केस कर रखा है। किशोरी ने आरोप लगाया था कि उसके पिता ने उसके व उसकी छोटी बहन के साथ दुष्कर्म का प्रयास किया। विरोध करने पर उनके साथ मारपीट की जाने लगी। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था।
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वरिष्ठ अधिवक्ता हरिओम शर्मा ने बताया कि एएसजे सुरुचि अतरेजा सिंह की अदालत ने उनके मुवक्किल को बरी कर दिया है। उन्होंने बताया कि इससे पहले इस तरह के केस करेल, दिल्ली, पश्चिमी बंगाल व महाराष्ट्र में भी सामने आए हैं। उन्होंने बताया कि मामले में पुलिस ने जांच की तो नाबालिग बहनों ने मेडिकल जांच से इनकार कर दिया था। मामले में 7 अप्रैल, 2021 को लड़कियों के पिता पर चार्ज लगाया गया था। मामले में सुनवाई के बाद अदालत ने अब लड़कियों के पिता को बरी कर दिया है।
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उन्होंने कहा कि पति व पत्नी को आपसी झगड़े में बच्चों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। इस तरह के झूठे मुकदमे सामाजिक ताने बाने के लिए जहर के समान है। उनके साथ अधिवक्ता अभिनव शर्मा, अधिवक्ता लोकेश दहिया, अधिवक्ता मयंक हंस और अधिवक्ता अंकित कुमार मौजूद रहे।