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किसान बाेले-लखीमपुर खीरी मामले में करें कार्रवाई, नहीं तो लेंगे बड़ा फैसला
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सोनीपत के राई स्थित एक ढाबा पर पत्रकारों से बातचीत करते किसान नेता।
- फोटो : Sonipat
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सोनीपत। लखीमपुर खीरी मामले में संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने अपने तेवर एक बार फिर कड़े कर लिए हैं। किसान नेताओं ने साफ कहा है कि मामले के दोषियों के खिलाफ सरकार कड़ी कार्रवाई करे, नहीं तो किसान बड़ा फैसला लेने पर मजबूर होंगे। मामले को लेकर गठित एसआईटी की रिपोर्ट पर भी कार्रवाई नहीं हो सकी।
बुधवार सुबह राई स्थित ढाबे पर मोर्चा की बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए जगजीत सिंह दल्लेवाल, हरेंद्र सिंह लखुवाल व अभिमन्यु कोहाड़ ने कहा कि लखीमपुर खीरी मामले में सरकार निष्पक्ष कार्रवाई नहीं कर रही। सरकार से मिलीभगत कर लखीमपुर खीरी मामले के आरोपी गवाहों को ही निशाना बना रहे हैं। पीड़ित परिवारों को धमकाया जा रहा है। सरकार एसआईटी की रिपोर्ट को नजरअंदाज कर रही है, जबकि किसानों के साथ बातचीत के दौरान कहा गया था कि एसआईटी की जांच रिपोर्ट पर कार्रवाई की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद आशीष मिश्र की जमानत को रद्द किया जाना इस बात का प्रमाण है कि सरकार आरोपियों को बचाने के लिए अलग-अलग हथकंडे अपना रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार लगातार केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र उर्फ टेनी व उसके बेटे आशीष मिश्र को बचा रही है। केंद्र सरकार में मंत्री रहते अजय मिश्र उर्फ टेनी कार्रवाई नहीं होने दे रहे हैं। ऐसे में अब किसान आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे। यदि सरकार ने तुरंत कोई कदम नहीं उठाया तो किसान आगे की रणनीति बनाएंगे। उन्होंने कहा कि हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, गुजरात व महाराष्ट्र से किसान संगठन मोर्चा में शामिल हो रहे हैं।
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चुनाव लड़ने वाले नेताओं पर आगामी बैठक में फैसला
एसकेएम नेताओं ने कहा कि जो किसान नेता पंजाब में चुनाव लड़े थे, उन्हें 15 मई तक के लिए पहले ही निलंबित किया जा चुका है। उन सभी को लेकर आगामी बैठक में फैसला लिया जाएगा।
जत्थेबंदियों के साथ हुए रवाना
राई में ढाबे पर हुई बैठक में जत्थेबंदियों के अलावा मोर्चा के पदाधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में किसान नेताओं ने लखीमपुर खीरी रवाना होने का निर्णय लिया और वहां पहुंचकर किसानों संग बैठक करने की बात कही। पत्रकारों से बातचीत के बाद किसान नेता लखीमपुर के लिए रवाना हो गए। वहां पर 5 मई को बैठक की जाएगी।
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बुधवार सुबह राई स्थित ढाबे पर मोर्चा की बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए जगजीत सिंह दल्लेवाल, हरेंद्र सिंह लखुवाल व अभिमन्यु कोहाड़ ने कहा कि लखीमपुर खीरी मामले में सरकार निष्पक्ष कार्रवाई नहीं कर रही। सरकार से मिलीभगत कर लखीमपुर खीरी मामले के आरोपी गवाहों को ही निशाना बना रहे हैं। पीड़ित परिवारों को धमकाया जा रहा है। सरकार एसआईटी की रिपोर्ट को नजरअंदाज कर रही है, जबकि किसानों के साथ बातचीत के दौरान कहा गया था कि एसआईटी की जांच रिपोर्ट पर कार्रवाई की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद आशीष मिश्र की जमानत को रद्द किया जाना इस बात का प्रमाण है कि सरकार आरोपियों को बचाने के लिए अलग-अलग हथकंडे अपना रही है।
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उन्होंने कहा कि सरकार लगातार केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र उर्फ टेनी व उसके बेटे आशीष मिश्र को बचा रही है। केंद्र सरकार में मंत्री रहते अजय मिश्र उर्फ टेनी कार्रवाई नहीं होने दे रहे हैं। ऐसे में अब किसान आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे। यदि सरकार ने तुरंत कोई कदम नहीं उठाया तो किसान आगे की रणनीति बनाएंगे। उन्होंने कहा कि हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, गुजरात व महाराष्ट्र से किसान संगठन मोर्चा में शामिल हो रहे हैं।
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चुनाव लड़ने वाले नेताओं पर आगामी बैठक में फैसला
एसकेएम नेताओं ने कहा कि जो किसान नेता पंजाब में चुनाव लड़े थे, उन्हें 15 मई तक के लिए पहले ही निलंबित किया जा चुका है। उन सभी को लेकर आगामी बैठक में फैसला लिया जाएगा।
जत्थेबंदियों के साथ हुए रवाना
राई में ढाबे पर हुई बैठक में जत्थेबंदियों के अलावा मोर्चा के पदाधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में किसान नेताओं ने लखीमपुर खीरी रवाना होने का निर्णय लिया और वहां पहुंचकर किसानों संग बैठक करने की बात कही। पत्रकारों से बातचीत के बाद किसान नेता लखीमपुर के लिए रवाना हो गए। वहां पर 5 मई को बैठक की जाएगी।