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किसानों ने कुंडली बॉर्डर पर बसाए सुभाष चंद्र बोस से लेकर चंद्रशेखर आजाद नगर
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कुंडली बॉर्डर पर लगाए गए नगर के संकेतक बोर्ड। संवाद
- फोटो : Sonipat
कृषि कानून रद्द कराने की मांग को लेकर किसानों ने 55 दिन से कुंडली बॉर्डर पर डेरा डाला हुआ है। जहां किसानों के साथियों के अलावा रिश्तेदारों व परिवार वालों का आना-जाना भी लगातार जारी है। किसी परिजन व परिचित के वहां आने पर अपनों से संपर्क नहीं हो पाता है तो किसानों को काफी परेशानी झेलनी पड़ती है। क्योंकि नेशनल हाईवे पर किसानों का पड़ाव करीब सात किमी लंबा हो चुका है। ऐसे में समस्या को दूर करने के लिए किसानों ने महापुरुषों के नाम पर नगर बसा लिए है और किसी को सुभाष चंद्र बोस तो किसी जगह को चंद्रशेखर आजाद नगर बनाया गया है। जिनमें केवल 500 मीटर से एक किमी तक का क्षेत्र शामिल किया गया है। इससे किसानों के नए-नए नगर बस गए है तो किसानों को तलाश करने की समस्या भी दूर हो गई है।
किसानों ने नेशनल हाईवे 44 पर कुंडली बॉर्डर से सोनीपत की ओर करीब सात किमी तक पड़ाव डाला हुआ है। वहां किसानों के परिवार के लोगों के अलावा रिश्तेदार व अन्य परिचित भी लगातार पहुंच रहे है। वहां कई बार ऐसा हुआ है कि जब किसानों के परिवार के लोग बॉर्डर पर पहुंचे तो उनका किसी कारण से फोन पर संपर्क नहीं हो सका। वहां कई बार मोबाइल में नेटवर्क की समस्या आती है। जिससे किसानों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी। इसको देखते हुए ही किसानों ने फैसला लिया कि ऐसा कुछ किया जाए, जिससे किसानों का आसानी से पता किया जा सके। जिसके बाद वहां 500 मीटर से एक किमी तक का क्षेत्र तय करके उनको नंबर व नाम दिया गया। किसी को सरदार भगत सिंह नगर तो किसी को बंदा सिंह बहादुर नगर, चंद्रशेखर आजाद नगर आदि नाम दिए गए। उसकी एक सूची भी तैयार कराई गई और उस सूची को सभी नेताओं को सौंप दिया गया। इसके साथ ही उस सूची को व्हाट्स एप पर भेजा गया। अब किसी किसान के परिजन, परिचित या अन्य कोई आता है तो उसे केवल नगर का नाम बता दिया जाता है। उसके बाद किसान उनको उस नगर तक पहुंचा देते है। ऐसे में सात किमी तक का लंबा चक्कर किसी को तलाशने के लिए नहीं काटना पड़ता है। क्योंकि इसके लिए बाकायदा संकेतक बोर्ड लगाए गए है तो नगर का नंबर भी लिखा गया है। इस तरह से किसानों की कुछ परेशानी को कम किया गया है।
इस तरह नंबर व नाम देकर तय किया गया क्षेत्र
1. नेताजी सुभाष चंद्र बोस नगर-सिंघु बॉर्डर स्टेज का क्षेत्र
2. बंदा सिंह बहादुर नगर-कुंडली स्टेज से केएफसी मॉल तक
3.सरदार भगत सिंह नगर-केएफसी मॉल से एचपी पेट्रोल पंप तक
4. शिवराम रवि राजगुरू नगर-एचपी पेट्रोल पंप से भाकियू कार्यालय
5. सुखदेव थापर नगर-भाकियू कार्यालय से कुंडली मॉल तक
6. करतार सिंह सराभा नगर- कुंडली मॉल से रसोई ढाबा तक
7. चंद्रशेखर आजाद नगर-रियल पजाबी ढाबा व गोल्डन हट एरिया तक
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किसानों ने नेशनल हाईवे 44 पर कुंडली बॉर्डर से सोनीपत की ओर करीब सात किमी तक पड़ाव डाला हुआ है। वहां किसानों के परिवार के लोगों के अलावा रिश्तेदार व अन्य परिचित भी लगातार पहुंच रहे है। वहां कई बार ऐसा हुआ है कि जब किसानों के परिवार के लोग बॉर्डर पर पहुंचे तो उनका किसी कारण से फोन पर संपर्क नहीं हो सका। वहां कई बार मोबाइल में नेटवर्क की समस्या आती है। जिससे किसानों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी। इसको देखते हुए ही किसानों ने फैसला लिया कि ऐसा कुछ किया जाए, जिससे किसानों का आसानी से पता किया जा सके। जिसके बाद वहां 500 मीटर से एक किमी तक का क्षेत्र तय करके उनको नंबर व नाम दिया गया। किसी को सरदार भगत सिंह नगर तो किसी को बंदा सिंह बहादुर नगर, चंद्रशेखर आजाद नगर आदि नाम दिए गए। उसकी एक सूची भी तैयार कराई गई और उस सूची को सभी नेताओं को सौंप दिया गया। इसके साथ ही उस सूची को व्हाट्स एप पर भेजा गया। अब किसी किसान के परिजन, परिचित या अन्य कोई आता है तो उसे केवल नगर का नाम बता दिया जाता है। उसके बाद किसान उनको उस नगर तक पहुंचा देते है। ऐसे में सात किमी तक का लंबा चक्कर किसी को तलाशने के लिए नहीं काटना पड़ता है। क्योंकि इसके लिए बाकायदा संकेतक बोर्ड लगाए गए है तो नगर का नंबर भी लिखा गया है। इस तरह से किसानों की कुछ परेशानी को कम किया गया है।
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इस तरह नंबर व नाम देकर तय किया गया क्षेत्र
1. नेताजी सुभाष चंद्र बोस नगर-सिंघु बॉर्डर स्टेज का क्षेत्र
2. बंदा सिंह बहादुर नगर-कुंडली स्टेज से केएफसी मॉल तक
3.सरदार भगत सिंह नगर-केएफसी मॉल से एचपी पेट्रोल पंप तक
4. शिवराम रवि राजगुरू नगर-एचपी पेट्रोल पंप से भाकियू कार्यालय
5. सुखदेव थापर नगर-भाकियू कार्यालय से कुंडली मॉल तक
6. करतार सिंह सराभा नगर- कुंडली मॉल से रसोई ढाबा तक
7. चंद्रशेखर आजाद नगर-रियल पजाबी ढाबा व गोल्डन हट एरिया तक