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किसान आंदोलन : बॉर्डर बंद होने से परेशान उद्योगपति और ग्रामीण बोले, जल्द खुले रास्ता
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कृषि कानूनों को रद्द कराने की मांग को लेकर जारी किसान आंदोलन के कारण बंद पड़े कुंडली बॉर्डर पर भी रास्ता खुलवाने की मांग जोर पकड़ने लगी है। उद्योगपतियों, दुकानदारों व ग्रामीणों की मांग है कि अब कुंडली बॉर्डर पर एक तरफ का रास्ता खोल दिया जाए। दिल्ली पुलिस सिंघु बॉर्डर पर बनाई गई कंक्रीट की दीवार को ढहाने का काम शीघ्र शुरू करे।
कुंडली समेत आसपास के क्षेत्र में लोगों को हो रही परेशानी पर संज्ञान लेकर एक माह पहले सुप्रीम कोर्ट ने किसानों व सरकार को आदेश दिए थे कि रास्ता खोलने के इंतजाम करें। इस पर हरियाणा सरकार ने हाई लेवल कमेटी का गठन कर बैठक निर्धारित की थी, जिसमें किसानों को भी बुलाया गया था। किसानों ने यह कहते हुए बैठक में जाने से साफ इंकार कर दिया था कि रास्ता उन्होंने नहीं बल्कि दिल्ली पुलिस ने रोक रखा है। किसानों के आंदोलन व बॉर्डर बंद किए जाने से कुंडली व राई क्षेत्र के दर्जनों गांवों का लिंक दिल्ली से सीधे तौर पर टूट गया है। 11 माह से इन गांवों में न केवल कामकाज प्रभावित है बल्कि नौकरियों पर जाने वाले लोगों को बड़ा चक्कर लगाकर लिंक मार्गों से पहुंचना पड़ता है।
गांव कुंडली, नांगल कलां, सबौली, नात्थुपुर, जाखौली, सेवली, प्रीतमपुरा, अटेरना, मनौली, बढ़खालसा, राई, बीसवांमिल, बढ़मलिक, जठेड़ी आदि गांवों के अधिकतर ग्रामीणों का कामकाज दिल्ली पर आधारित है, लेकिन 11 माह से इन लोगों के लिए दिल्ली दूर हो गई है। इससे उद्योगपति परेशान हैं। उद्योगों को 50 हजार करोड़ से अधिक का नुकसान हो चुका है। राई औद्योगिक मेन्यूफेक्चरिंग एसोसिएशन के प्रधान राकेश देवगन ने कहा कि कुंडली-सिंघु बार्डर बंद होने से उद्योगों में कच्चे माल मंगवाने व तैयार माल भेजने की दिक्कत जारी है। वह भारी नुकसान झेल चुके हैं। वहीं भैंरा बांकीपुर निवासी जयराम शर्मा, अटेरना निवासी दीपक चौहान, ताहर सिंह ने बताया कि लोगों की परेशानी को देखते हुए अब रास्ता खोला जाना चाहिए।
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कुंडली बॉर्डर पर डटे हैं पांच हजार से अधिक किसान
वर्तमान में कुंडली बॉर्डर पर अब पांच हजार से अधिक किसान डटे हुए हैं। बॉडर पर एसकेएम की तरफ से लगातार कहा जाता रहा है कि उन्होंने बॉर्डर पर किसी तरह से रास्ता नहीं रोक रखा है। रास्ता दिल्ली पुलिस की तरफ से ही बंद है।
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कुंडली समेत आसपास के क्षेत्र में लोगों को हो रही परेशानी पर संज्ञान लेकर एक माह पहले सुप्रीम कोर्ट ने किसानों व सरकार को आदेश दिए थे कि रास्ता खोलने के इंतजाम करें। इस पर हरियाणा सरकार ने हाई लेवल कमेटी का गठन कर बैठक निर्धारित की थी, जिसमें किसानों को भी बुलाया गया था। किसानों ने यह कहते हुए बैठक में जाने से साफ इंकार कर दिया था कि रास्ता उन्होंने नहीं बल्कि दिल्ली पुलिस ने रोक रखा है। किसानों के आंदोलन व बॉर्डर बंद किए जाने से कुंडली व राई क्षेत्र के दर्जनों गांवों का लिंक दिल्ली से सीधे तौर पर टूट गया है। 11 माह से इन गांवों में न केवल कामकाज प्रभावित है बल्कि नौकरियों पर जाने वाले लोगों को बड़ा चक्कर लगाकर लिंक मार्गों से पहुंचना पड़ता है।
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गांव कुंडली, नांगल कलां, सबौली, नात्थुपुर, जाखौली, सेवली, प्रीतमपुरा, अटेरना, मनौली, बढ़खालसा, राई, बीसवांमिल, बढ़मलिक, जठेड़ी आदि गांवों के अधिकतर ग्रामीणों का कामकाज दिल्ली पर आधारित है, लेकिन 11 माह से इन लोगों के लिए दिल्ली दूर हो गई है। इससे उद्योगपति परेशान हैं। उद्योगों को 50 हजार करोड़ से अधिक का नुकसान हो चुका है। राई औद्योगिक मेन्यूफेक्चरिंग एसोसिएशन के प्रधान राकेश देवगन ने कहा कि कुंडली-सिंघु बार्डर बंद होने से उद्योगों में कच्चे माल मंगवाने व तैयार माल भेजने की दिक्कत जारी है। वह भारी नुकसान झेल चुके हैं। वहीं भैंरा बांकीपुर निवासी जयराम शर्मा, अटेरना निवासी दीपक चौहान, ताहर सिंह ने बताया कि लोगों की परेशानी को देखते हुए अब रास्ता खोला जाना चाहिए।
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कुंडली बॉर्डर पर डटे हैं पांच हजार से अधिक किसान
वर्तमान में कुंडली बॉर्डर पर अब पांच हजार से अधिक किसान डटे हुए हैं। बॉडर पर एसकेएम की तरफ से लगातार कहा जाता रहा है कि उन्होंने बॉर्डर पर किसी तरह से रास्ता नहीं रोक रखा है। रास्ता दिल्ली पुलिस की तरफ से ही बंद है।