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किसान आंदोलन : एसकेएम की बैठक से पहले किसानों के तेवर कड़े, लिए जा सकते हैं अहम फैसले
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संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) की मंगलवार को अहम बैठक होनी है। इससे पहले ही मोर्चा नेताओं ने अपने तेवर कड़े कर लिए हैं। माना जा रहा है कि किसानों के आंदोलन को एक साल पूरा होने से पहले होने जा रही बैठक में कई बड़े फैसले लिए जा सकते हैं। मोर्चा के सदस्य मंजीत राय ने कहा कि सरकार को झुकाने के लिए जरूरी है कि कुछ खास निर्णय लिए जाएं।
कृषि कानूनों को रद्द कराने व एमएसपी की गारंटी के लिए 26 नवंबर 2020 से दिल्ली की सीमाओं पर किसानों का आंदोलन लगातार जारी है। 22 जनवरी तक किसानों व सरकार के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी थी, लेकिन 26 जनवरी को लाल किले की घटना के बाद से सरकार व किसानों के बीच पैदा हुआ गतिरोध आज तक समाप्त नहीं हुआ है। सरकार की ओर से बातचीत का कोई न्योता नहीं मिलने के कारण किसान अब आक्रोश में हैं। यही कारण है कि अब कई अहम फैसले लेने की सुगबुगाहट तेज हो गई है। बैठक से ठीक पहले मोर्चा के अहम सदस्य मंजीत राय ने साफ तौर पर कहा है कि सरकार को झुकाने के लिए कुछ अलग करना पड़ेगा। उनका मानना है कि सरकार को संदेश देना जरूरी है कि किसान केवल चुप रहकर जुल्म नहीं सहेंगे। ऐसे में वह खुद 9 नवंबर को कुंडली सीमा पर होने वाली बैठक में केजीपी को बंद करने का प्रस्ताव रखेंगे। इसके अलावा भी कई कड़े फैसले लिए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की बात सुनने को तैयार नहीं है, लेकिन किसानों को अब अपने तरीके से अपनी आवाज सरकार तक पहुंचानी होगी।
इससे पहले भाकियू के प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी भी मोर्चा को सलाह दे चुके हैं कि अब किसानों को दिल्ली के बॉर्डरों की बजाय दिल्ली के भीतर घुसकर प्रधानमंत्री के आवास के बाहर धरना देना चाहिए। उन्होंने कहा था कि बॉर्डरों को सरकार खोलना चाह रही है तो ऐसे में किसानों के पास भी मौका है कि वह दिल्ली में घुसकर प्रधानमंत्री आवास व संसद का घेराव करें।
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कृषि कानूनों को रद्द कराने व एमएसपी की गारंटी के लिए 26 नवंबर 2020 से दिल्ली की सीमाओं पर किसानों का आंदोलन लगातार जारी है। 22 जनवरी तक किसानों व सरकार के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी थी, लेकिन 26 जनवरी को लाल किले की घटना के बाद से सरकार व किसानों के बीच पैदा हुआ गतिरोध आज तक समाप्त नहीं हुआ है। सरकार की ओर से बातचीत का कोई न्योता नहीं मिलने के कारण किसान अब आक्रोश में हैं। यही कारण है कि अब कई अहम फैसले लेने की सुगबुगाहट तेज हो गई है। बैठक से ठीक पहले मोर्चा के अहम सदस्य मंजीत राय ने साफ तौर पर कहा है कि सरकार को झुकाने के लिए कुछ अलग करना पड़ेगा। उनका मानना है कि सरकार को संदेश देना जरूरी है कि किसान केवल चुप रहकर जुल्म नहीं सहेंगे। ऐसे में वह खुद 9 नवंबर को कुंडली सीमा पर होने वाली बैठक में केजीपी को बंद करने का प्रस्ताव रखेंगे। इसके अलावा भी कई कड़े फैसले लिए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की बात सुनने को तैयार नहीं है, लेकिन किसानों को अब अपने तरीके से अपनी आवाज सरकार तक पहुंचानी होगी।
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इससे पहले भाकियू के प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी भी मोर्चा को सलाह दे चुके हैं कि अब किसानों को दिल्ली के बॉर्डरों की बजाय दिल्ली के भीतर घुसकर प्रधानमंत्री के आवास के बाहर धरना देना चाहिए। उन्होंने कहा था कि बॉर्डरों को सरकार खोलना चाह रही है तो ऐसे में किसानों के पास भी मौका है कि वह दिल्ली में घुसकर प्रधानमंत्री आवास व संसद का घेराव करें।
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