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किसान आंदोलन : कुंडली बॉर्डर पर किसान आंदोलन के 11 माह पूरे

Mon, 25 Oct 2021 11:15 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 25 Oct 2021 11:15 PM IST
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Farmer's Movement : 11 months of farmer's agitation completed at Kundli border
कुंडली बॉर्डर पर धरनास्थल पर आयोजित मुख्य मंच पर उपस्थित किसान। - फोटो : Sonipat
सोनीपत। कुंडली बॉर्डर पर कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग को लेकर जारी आंदोलन को 11 माह का लंबा समय बीत गया है। अब तक हर मौसम का सामना कर चुके किसान पीछे हटने को कतई तैयार नहीं हैं। किसान दो टूक कह चुके हैं कि वह कानून वापसी तक वापस नहीं जाएंगे। किसानों व सरकार के बीज बातचीत भी लंबे समय से बंद है। आखिरी बैठक 22 जनवरी को हुई थी और उसके बाद से बातचीत का रास्ता बंद पड़ा है।
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यह माना जा रहा था कि सरकार व किसान एक-दूसरे से पहल चाहते हैं, लेकिन दोनों में कोई भी पहल करने को तैयार नहीं है। वहीं लगातार बॉर्डर बंद रहने से आसपास के कामधंधे पूरी तरह से चौपट हो गए हैं, जिससे आसपास के ग्रामीण, दुकानदार, फैक्टरी संचालकों की हालत खराब है।
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मंगलवार 26 अक्तूबर को आंदोलन 12वें महीने में प्रवेश कर गया है। अभी आंदोलन खत्म होता भी दिखाई नहीं दे रहा। बॉर्डर पर जमे किसानों का साफ कहना है कि भले ही उन्हें यहां 11 माह का लंबा समय हो गया है, लेकिन वे यहां से जाने वाले नहीं हैं, जब तक कि सरकार तीनों कृषि कानूनों को वापस लेते हुए एमएसपी के लिए गारंटी कानून नहीं बना देती। किसानों का कहना है कि वह अपने लिए लड़ाई नहीं लड़ रहे बल्कि अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए लड़ रहे हैं। ऐसे में उन्हें फर्क नहीं पड़ता कि 11 माह हुए हैं या उससे भी अधिक समय बीत जाए। अब यह सरकार पर है कि वह किसानों की मांगें कब तक मानती है या फिर किसानों को इसी तरह संघर्ष करने पर मजबूर होना पड़ेगा।
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22 जनवरी से बंद है बातचीत
कृषि कानूनों के खिलाफ किसान 11 माह से आंदोलनरत हैं। 22 जनवरी के बाद से सरकार से किसानों की बातचीत बंद है। किसानों के पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र भेजने के बावजूद सरकार से बातचीत का रास्ता नहीं खुला। किसान आंदोलन को प्रभावी बनाने के लिए संसद तक आयोजित कर चुके हैं। यह माना जा रहा था कि सरकार व किसान एक-दूसरे से पहल चाहते हैं, लेकिन दोनों में कोई भी पहल करने को तैयार नहीं है।
कामधंधे बर्बाद होने से बढ़ी मुसीबत
आंदोलन खत्म न होने के कारण कुंडली के जो उद्यमी, व्यापारी और आम लोग कुंडली बॉर्डर से रास्ता खुलने का इंतजार कर रहे हैं उन्हें भी कोई उम्मीद की किरण नजर नहीं आ रही है। सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई दिसंबर तक टल गई है। ऐसे में माना जा रहा है कि किसानों का कोई समाधान नहीं होने से बहुत से लोग बेरोजगार हो गए हैं। रेहड़ी लगाने वालों से लेकर दुकानदारों व उद्यमियों तक ने यहां से पलायन शुरू कर दिया है। सरकार की बनाई हाई लेवल कमेटी भी कुछ खास काम नहीं कर पाई और हालात जस के तस हैं।

किसान आज देशभर में धरना देकर करेंगे प्रदर्शन
संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने घोषणा की है कि आंदोलन के 11 माह पूरे होने व लखीमपुर में किसान हत्याकांड के विरोध में किसान मंगलवार को देशभर में धरने देंगे व प्रदर्शन करेंगे। एसकेएम सदस्य डॉ. दर्शनपाल ने बताया कि मंगलवार को सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे के बीच तहसील और जिला मुख्यालयों पर राष्ट्रव्यापी विरोध का आह्वान किया है। यह केंद्रीय राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी की गिरफ्तारी और केंद्रीय मंत्रिपरिषद से बर्खास्तगी की मांग के लिए दबाव बनाने के लिए भी किया जा रहा है। विरोध प्रदर्शन के बाद राष्ट्रपति के नाम जिलाधीशों व डीसी को ज्ञापन सौंपे जाएंगे। उन्होंने कहा कि केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर का यह दावा गलत है कि भारत में अधिकांश किसान संगठन कॉर्पोरेट-समर्थक, किसान-विरोधी कानूनों का समर्थन करते हैं। संयुक्त किसान मोर्चा ने उन्हें इस बारे में अपने सबूत पेश करने की चुनौती दी है, जिससे यह स्पष्ट हो जाएगा कि भारत में कुछ संगठन ही इन किसान-विरोधी कानूनों के समर्थन में हो सकते हैं। इनमें वे लोग शामिल हैं जो कृषि-व्यवसायों या स्वयं भाजपा-आरएसएस से जुड़े हैं या जिनका कोई जनाधार नहीं है।
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