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किसी का अंधेरा मिटाकर इस जहां से रुखसत हुई ‘दृष्टि’
ब्यूरो/अमर उजाला, सोनीपत
Updated Sat, 05 Dec 2015 12:20 AM IST
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नेक काम के लिए एक पल ही बहुत होता है, इसके लिए भागदौड़ भरी जिंदगी में समय की कमी को बहाना नहीं बनाया जा सकता। जनता कॉलोनी के मक्कड़ दंपति ने एक ऐसी मिसाल कायम की है कि सालों तक उनका नाम अमर हो गया। दिल में छेद से परेशान उनकी ढाई साल की मासूम बेटी ने दम तोड़ दिया। पड़ोसी की सलाह पर ज्योति और कमल ने अपनी ढाई साल की दृष्टि की आंखें दान कर दी। अब दृष्टि के जाने के बाद वह शख्स इस खूबसूरत दुनिया को देख सकेगा, जिसके जीवन में अब तक अंधेरा है।
दृष्टि सेवा समिति के पदाधिकारी हरभगवान रहेजा ने बताया कि जनता कॉलोनी निवासी कमल मक्कड़ की बेटी सृष्टि के दिल में जन्म से छेद था। माता-पिता ने बेटी का कई जगह उपचार कराया और देवी-देवताओं से दुआ मांगी, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। ऐसे में किसी की सलाह पर दिल्ली के एक निजी अस्पताल में दिल का ऑपरेशन कराने का फैसला लिया। डॉक्टरों ने ऑपरेशन को सफल करार दिया और घर जाने की छुट्टी दे दी, लेकिन किस्मत में कुछ और ही मंजूर था। गुरुवार सुबह दृष्टि ने दम तोड़ दिया। बेटी के गम में माता-पिता की आंखें रो-रोकर लाल हो गई।
पड़ोसी की सलाह पर किया नेक काम
पड़ोसी राजू खुराना ने कमल को सलाह दी कि भगवान ने उसकी बेटी को तो छीन लिया, लेकिन बेटी के नेत्रदान करके दूसरों की जिदंगी में जरूर उजाला कर सकता है। गमजदा दंपति ने इसके लिए हामी भर ली। दृष्टि सेवा समिति से संपर्क किया। समिति नेत्र सर्जन डा. रमेश नारंग को लेकर दृष्टि के घर पहुंची और नेक कार्य को सार्थक किया। अब मासूम सृष्टि समिति की 995वीं नेत्रदाता बन गई है।
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दृष्टि सेवा समिति के पदाधिकारी हरभगवान रहेजा ने बताया कि जनता कॉलोनी निवासी कमल मक्कड़ की बेटी सृष्टि के दिल में जन्म से छेद था। माता-पिता ने बेटी का कई जगह उपचार कराया और देवी-देवताओं से दुआ मांगी, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। ऐसे में किसी की सलाह पर दिल्ली के एक निजी अस्पताल में दिल का ऑपरेशन कराने का फैसला लिया। डॉक्टरों ने ऑपरेशन को सफल करार दिया और घर जाने की छुट्टी दे दी, लेकिन किस्मत में कुछ और ही मंजूर था। गुरुवार सुबह दृष्टि ने दम तोड़ दिया। बेटी के गम में माता-पिता की आंखें रो-रोकर लाल हो गई।
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पड़ोसी की सलाह पर किया नेक काम
पड़ोसी राजू खुराना ने कमल को सलाह दी कि भगवान ने उसकी बेटी को तो छीन लिया, लेकिन बेटी के नेत्रदान करके दूसरों की जिदंगी में जरूर उजाला कर सकता है। गमजदा दंपति ने इसके लिए हामी भर ली। दृष्टि सेवा समिति से संपर्क किया। समिति नेत्र सर्जन डा. रमेश नारंग को लेकर दृष्टि के घर पहुंची और नेक कार्य को सार्थक किया। अब मासूम सृष्टि समिति की 995वीं नेत्रदाता बन गई है।
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