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छत्रसाल स्टेडियम का विवाद से जुड़ने लगा नाता तो पहलवान पीछे खींचने लगे कदम
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अंकित चौहान
सोनीपत। जिस छत्रसाल स्टेडियम ने हरियाणा को सबसे ज्यादा पहलवान दिए हो, उसका विवाद से नाता जुड़ने लगा तो पहलवानों ने वहां से कदम पीछे खींचने शुरू कर दिए हैं। ओलंपिक मेडलिस्ट योगेश्वर दत्त के अलावा ओलंपिक टिकट कटाने वाले बजरंग पूनिया व दीपक पूनिया भी वहां दांव पेंच सीख चुके हैं। लेकिन स्टेडियम में कोच के साथ झगड़ा होने के बाद से हालात बदलते जा रहे हैं और कई बड़े पहलवान बाहर निकल चुके हैं।
जहां बजरंग भी काफी पहले छत्रसाल से नाता तोड़ चुके है, वहीं दीपक पूनिया भी करीब एक साल पहले स्टेडियम को छोड़कर अन्य जगह प्रैक्टिस कर रहे हैं। वहीं अब पहलवान सागर धनखड़ की हत्या होने से अपने बेटों को वहां भेजने को लेकर परिजन भी संकोच में दिख रहे हैं। इस तरह सागर की हत्या से जहां गुरु-शिष्य का रिश्ता शर्मसार हुआ है, वहीं कुश्ती के सबसे बड़े छत्रसाल स्टेडियम की साख भी खत्म हो गई है।
छत्रसाल स्टेडियम में शुरुआत से सबसे ज्यादा हरियाणा के पहलवान प्रैक्टिस करते रहे हैं, जिनमें करीब 90 प्रतिशत पहलवान हरियाणा से होते हैं। एक सीनियर कोच ने बताया कि छत्रसाल स्टेडियम में एक साल पहले भी करीब 300 पहलवान थे, जिनमें जूनियर व सीनियर सभी पहलवान शामिल थे। हालांकि एक साल में स्टेडियम काफी कम खुला है और अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप शुरू होने के बाद ही स्टेडियम को शुरू किया गया था। कोरोना कम होने के बाद भी ज्यादा पहलवान नहीं पहुंच रहे थे, लेकिन इस समय भी हरियाणा के ज्यादा पहलवान थे। इसका एक सबसे बड़ा कारण यह माना जाता है कि सुशील कुमार वहां प्रैक्टिस करके कुश्ती में ऊंचाईयों तक पहुंचा चुके हैं तो योगेश्वर दत्त ने वहां प्रैक्टिस करते हुए ओलंपिक में मेडल जीता था। इसके अलावा ओलंपिक में जगह बना चुके बजरंग पूनिया, दीपक पूनिया समेत भी कई बड़े पहलवानों ने कुश्ती के दांवपेंच छत्रसाल स्टेडियम में सीखे थे। इन सभी को युवा पहलवान अपना आदर्श मानते हैं और इसलिए ही प्रदेश के अधिकतर युवा पहलवान छत्रसाल स्टेडियम में प्रैक्टिस करने जाते हैं। लेकिन छत्रसाल स्टेडियम का पिछले कुछ समय से विवाद से नाता जुड़ने लगा है। छत्रसाल स्टेडियम से जुड़े एक पहलवान ने बताया कि वहां एक बड़े पहलवान ने दो कोच के साथ झगड़ा कर दिया था तो उस समय विवाद काफी बढ़ गया था। इसके अलावा भी कई बार वहां पहलवानों में झगड़ा हो चुका है, लेकिन हर बार कार्रवाई की जगह मामलों को दबा दिया जाता था। जिसके बाद विवादों को देखते हुए बड़े पहलवानों ने छत्रसाल स्टेडियम से किनारा करना शुरू कर दिया।
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सागर की हत्या के बाद अपने बेटे को भेजने का संकोच
छत्रसाल स्टेडियम में पहलवान सागर धनखड़ की हत्या के बाद हालात पूरी तरह से बदलते दिख रहे हैं। जहां पहले केवल बड़े पहलवानों ने स्टेडियम से किनारा किया था, वहीं अब अपने बच्चों को कुश्ती के दांवपेंच सिखाने के लिए वहां भेजने वाले परिजन भी संकोच में दिख रहे हैं। सागर धनखड़ के मामा आनंद कहते हैं कि जिस तरह से उनके भांजे की खुलेआम पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। उससे यह साफ है कि वहां कोई भी सुरक्षित नहीं होगा और ऐसे में कोई अपने बच्चे को इस तरह के माहौल में कैसे भेज सकता है। इसके अलावा वहां प्रैक्टिस करने वाले एक जूनियर पहलवान के परिजन कहते हैं कि अभी स्टेडियम में उनका बेटा प्रैक्टिस नहीं कर रहा है, लेकिन कोरोना काल के बाद हालात ठीक होने पर भी इस तरह की घटनाओं को देखते हुए बेटे को वहां भेजना मुमकिन नहीं है।
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सोनीपत। जिस छत्रसाल स्टेडियम ने हरियाणा को सबसे ज्यादा पहलवान दिए हो, उसका विवाद से नाता जुड़ने लगा तो पहलवानों ने वहां से कदम पीछे खींचने शुरू कर दिए हैं। ओलंपिक मेडलिस्ट योगेश्वर दत्त के अलावा ओलंपिक टिकट कटाने वाले बजरंग पूनिया व दीपक पूनिया भी वहां दांव पेंच सीख चुके हैं। लेकिन स्टेडियम में कोच के साथ झगड़ा होने के बाद से हालात बदलते जा रहे हैं और कई बड़े पहलवान बाहर निकल चुके हैं।
जहां बजरंग भी काफी पहले छत्रसाल से नाता तोड़ चुके है, वहीं दीपक पूनिया भी करीब एक साल पहले स्टेडियम को छोड़कर अन्य जगह प्रैक्टिस कर रहे हैं। वहीं अब पहलवान सागर धनखड़ की हत्या होने से अपने बेटों को वहां भेजने को लेकर परिजन भी संकोच में दिख रहे हैं। इस तरह सागर की हत्या से जहां गुरु-शिष्य का रिश्ता शर्मसार हुआ है, वहीं कुश्ती के सबसे बड़े छत्रसाल स्टेडियम की साख भी खत्म हो गई है।
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छत्रसाल स्टेडियम में शुरुआत से सबसे ज्यादा हरियाणा के पहलवान प्रैक्टिस करते रहे हैं, जिनमें करीब 90 प्रतिशत पहलवान हरियाणा से होते हैं। एक सीनियर कोच ने बताया कि छत्रसाल स्टेडियम में एक साल पहले भी करीब 300 पहलवान थे, जिनमें जूनियर व सीनियर सभी पहलवान शामिल थे। हालांकि एक साल में स्टेडियम काफी कम खुला है और अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप शुरू होने के बाद ही स्टेडियम को शुरू किया गया था। कोरोना कम होने के बाद भी ज्यादा पहलवान नहीं पहुंच रहे थे, लेकिन इस समय भी हरियाणा के ज्यादा पहलवान थे। इसका एक सबसे बड़ा कारण यह माना जाता है कि सुशील कुमार वहां प्रैक्टिस करके कुश्ती में ऊंचाईयों तक पहुंचा चुके हैं तो योगेश्वर दत्त ने वहां प्रैक्टिस करते हुए ओलंपिक में मेडल जीता था। इसके अलावा ओलंपिक में जगह बना चुके बजरंग पूनिया, दीपक पूनिया समेत भी कई बड़े पहलवानों ने कुश्ती के दांवपेंच छत्रसाल स्टेडियम में सीखे थे। इन सभी को युवा पहलवान अपना आदर्श मानते हैं और इसलिए ही प्रदेश के अधिकतर युवा पहलवान छत्रसाल स्टेडियम में प्रैक्टिस करने जाते हैं। लेकिन छत्रसाल स्टेडियम का पिछले कुछ समय से विवाद से नाता जुड़ने लगा है। छत्रसाल स्टेडियम से जुड़े एक पहलवान ने बताया कि वहां एक बड़े पहलवान ने दो कोच के साथ झगड़ा कर दिया था तो उस समय विवाद काफी बढ़ गया था। इसके अलावा भी कई बार वहां पहलवानों में झगड़ा हो चुका है, लेकिन हर बार कार्रवाई की जगह मामलों को दबा दिया जाता था। जिसके बाद विवादों को देखते हुए बड़े पहलवानों ने छत्रसाल स्टेडियम से किनारा करना शुरू कर दिया।
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सागर की हत्या के बाद अपने बेटे को भेजने का संकोच
छत्रसाल स्टेडियम में पहलवान सागर धनखड़ की हत्या के बाद हालात पूरी तरह से बदलते दिख रहे हैं। जहां पहले केवल बड़े पहलवानों ने स्टेडियम से किनारा किया था, वहीं अब अपने बच्चों को कुश्ती के दांवपेंच सिखाने के लिए वहां भेजने वाले परिजन भी संकोच में दिख रहे हैं। सागर धनखड़ के मामा आनंद कहते हैं कि जिस तरह से उनके भांजे की खुलेआम पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। उससे यह साफ है कि वहां कोई भी सुरक्षित नहीं होगा और ऐसे में कोई अपने बच्चे को इस तरह के माहौल में कैसे भेज सकता है। इसके अलावा वहां प्रैक्टिस करने वाले एक जूनियर पहलवान के परिजन कहते हैं कि अभी स्टेडियम में उनका बेटा प्रैक्टिस नहीं कर रहा है, लेकिन कोरोना काल के बाद हालात ठीक होने पर भी इस तरह की घटनाओं को देखते हुए बेटे को वहां भेजना मुमकिन नहीं है।