500 से ज्यादा किसानों के फर्जी शपथ पत्र से अनुदान राशि में करोड़ों का खेल

Rohtak Bureauरोहतक ब्यूरो Updated Mon, 26 Oct 2020 12:39 AM IST
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अंकित चौहान
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सोनीपत। लॉकडाउन के दौरान बागवानी विभाग में बड़ा घपला सामने आया है। यहां एमआईडीएच स्कीम के तहत मल्चिंग पेपर लगाने को लेकर 500 से ज्यादा किसानों के फर्जी शपथ पत्र पर करोड़ों का घपला किया गया। इसका खुलासा उस समय हुआ जब किसान अनुदान राशि के लिए विभाग में पहुंचे और वहां से पता चला कि उनके फर्जी शपथ पत्र लगाकर अनुदान राशि का रुपया एक कंपनी के नाम जारी करा दी गई है। जिस पर किसानों ने सीएम विंडो पर शिकायत दर्ज कराई तो उसमें एसपी ने विजिलेंस जांच के लिए डीजीपी को रिपोर्ट भेज दी।
जिले के लगभग एक हजार किसानों ने आधुनिक खेती करने के लिए एमआईडीएच (एकीकृत बागवानी विकास मिशन) स्कीम के तहत खेत में मल्चिंग पेपर लगवाने को मार्च 2020 में आवेदन किया था। उसके बाद लॉकडाउन हो गया और मल्चिंग पेपर नहीं लगाया गया। लॉकडाउन खत्म होने के बाद किसानों ने बागवानी विभाग के कार्यालय में मल्चिंग पेपर लगवाने के लिए सरकार से मिलने वाली 16 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर अनुदान राशि के बारे में जानकारी मांगी तो उनको बताया गया कि उनकी अनुदान राशि जारी हो चुकी है। इसका पता चलने पर खुद किसान भी चौंक गए, क्योंकि उनके खाते में अनुदान राशि पहुंची ही नहीं थी। उनके छानबीन करने पर पता चला कि अनुदान राशि एक निजी कंपनी के खाते में ट्रांसफर करा दी गई है और इसके लिए किसानों के फर्जी शपथ पत्र लगाए गए है।
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1366 हेक्टेयर के लिए किसानों के आए थे आवेदन
बागवानी विभाग में किसानों ने 1366 हेक्टेयर जमीन में मल्चिंग पेपर लगवाने के लिए आवेदन किया था और इनमें से अधिकतर की अनुदान राशि जारी हो चुकी है, लेकिन वह किसानों के खातों में नहीं पहुंची है। वहीं अनुदान राशि जारी करने का एक पत्र बागवानी अधिकारियों की ओर से जारी किया गया है, जिसमें कहा गया है कि कमेटी ने किसानों के आवेदन की पूरी जांच कर ली है और उनके सभी कागजात ठीक मिले हैं। इसके साथ ही रिपोर्ट में कहा गया है कि किसानों ने निजी कंपनी के खाते में अनुदान राशि भेजने का शपथ पत्र दिया है, जबकि किसानों ने ऐसा कोई शपथ पत्र दिया ही नहीं है।
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किसानों ने कहा हमने कोई शपथ पत्र नहीं दिया, हमें कोई अनुदान राशि नहीं मिली
इस पूरे मामले में जब गोरड़ गांव के किसान जितेंद्र, गोरड़ के योगेंद्र, पीपली गांव के किसान पुनीत दहिया से जानकारी की गई तो इन सभी ने बताया कि उन्होंने मल्चिंग पेपर के लिए बागवानी विभाग में आवेदन किया था। उस समय सभी कागजात जमा कराए गए थे और आधार कार्ड लिंक वाले खाते की पास बुक की फोटो कॉपी भी जमा कराई गई थी। लेकिन उनको कोई अनुदान राशि नहीं मिली और जिस शपथ पत्र के आधार पर अनुदान राशि निजी कंपनी के खाते में भेजी गई है। वह शपथ पत्र भी उन्होंने नहीं दिया है जो पूरी तरह से फर्जी है। इन सभी के साथ ही अन्य कई किसानों ने सीएम विंडो पर शिकायत की थी तो अन्य अधिकारियों के पास भी इन किसानों ने शिकायत भेजी थी।
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यह मामला मेरी जानकारी में आया है। किसान शपथ पत्र फर्जी बता रहे हैं तो यह पता कराना पड़ेगा कि ऐसा कैसे हुआ है। किसी कर्मचारी ने ऐसा तो नहीं किया है। इसकी पूरी जानकारी करने के बाद ही कुछ ज्यादा बता सकता हूं।
- डां. अंशुल आनंद, जिला बागवानी अधिकारी
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सीएम विंडो की एक शिकायत मिली थी, जिसमें फर्जी शपथ पत्र लगाकर करोड़ों की अनुदान राशि हड़पने की बात कही गई थी। उसकी जांच कराई गई थी, जिसमें किसानों ने अपने बयान में कहा था कि इसकी जांच किसी आईपीएस अधिकारी की निगरानी में विजिलेंस से कराई जानी चाहिए। जिसके बाद अपनी रिपोर्ट बनाकर विजिलेंस जांच के लिए डीजीपी को भेजी गई है।
- जश्नदीप रंधावा, एसपी सोनीपत
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