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देश को आत्मनिर्भर बनाने का प्रमुख साधन है उद्यमिता : प्रो. श्रीप्रकाश
Fri, 22 Aug 2025 01:56 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Fri, 22 Aug 2025 01:56 AM IST
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फोटो 25: सोनीपत के दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मुरथल में विश्व उद्यम
- फोटो : Samvad
संवाद न्यूज एजेंसी
सोनीपत। दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मुरथल में रोजगार एवं प्रशिक्षण विभाग की ओर से विश्व उद्यमिता दिवस पर गोष्ठी हुई। इसमें कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश सिंह ने कहा कि उद्यमिता देश को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने का एक प्रमुख साधन है।
उन्होंने कहा कि उद्यमिता यह न केवल देश की अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाती है बल्कि युवाओं के लिए रोजगार, नवाचार और नेतृत्व के अवसर भी प्रदान करती है। भारत में उद्यमिता आत्मनिर्भरता और आर्थिक समृद्धि की कुंजी बन सकती है।
कुलपति ने कहा कि देश को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने में आत्मनिर्भर बनाने उद्यमिता का महत्वपूर्ण योगदान होगा। उन्होंने कहा कि स्टार्टअप और छोटे-मध्यम उद्यम स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर उत्पादन बढ़ाते हैं, जिससे आयात पर निर्भरता कम होती है।
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उद्यमी नई तकनीकों और नवाचारों के माध्यम से वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा करते हैं, जिससे निर्यात बढ़ता है और विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि होती है। यह आर्थिक स्थिरता और समृद्धि का आधार बनता है।
कुलपति ने कहा कि उद्यमिता रोजगार सृजन का एक प्रभावी साधन है। स्टार्टअप और लघु उद्योग लाखों लोगों को रोजगार प्रदान करते हैं, जिससे बेरोजगारी की समस्या कम होती है। उद्यमिता ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देती है।
उन्होंने कहा कि उद्यमिता नवाचार को प्रोत्साहित करती है जो आर्थिक समृद्धि का आधार है। नई तकनीकों, उत्पादों और सेवाओं का विकास देश को वैश्विक मंच पर अग्रणी बनाता है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ने भी स्टार्टअप को बढ़ावा दिया है।
इसके लिए विद्यार्थी अपना आइडिया लेकर आएं और उसको क्रियान्वित करें। इस दौरान रजिस्ट्रार डाॅ. अजय गर्ग, ट्रेनिंग एवं प्लेसमेंट अधिकारी प्रो. सुरेश वर्मा व प्रो. विजय शर्मा, विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र अश्वनी अग्रवाल उपस्थित रहे।
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सोनीपत। दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मुरथल में रोजगार एवं प्रशिक्षण विभाग की ओर से विश्व उद्यमिता दिवस पर गोष्ठी हुई। इसमें कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश सिंह ने कहा कि उद्यमिता देश को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने का एक प्रमुख साधन है।
उन्होंने कहा कि उद्यमिता यह न केवल देश की अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाती है बल्कि युवाओं के लिए रोजगार, नवाचार और नेतृत्व के अवसर भी प्रदान करती है। भारत में उद्यमिता आत्मनिर्भरता और आर्थिक समृद्धि की कुंजी बन सकती है।
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कुलपति ने कहा कि देश को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने में आत्मनिर्भर बनाने उद्यमिता का महत्वपूर्ण योगदान होगा। उन्होंने कहा कि स्टार्टअप और छोटे-मध्यम उद्यम स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर उत्पादन बढ़ाते हैं, जिससे आयात पर निर्भरता कम होती है।
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उद्यमी नई तकनीकों और नवाचारों के माध्यम से वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा करते हैं, जिससे निर्यात बढ़ता है और विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि होती है। यह आर्थिक स्थिरता और समृद्धि का आधार बनता है।
कुलपति ने कहा कि उद्यमिता रोजगार सृजन का एक प्रभावी साधन है। स्टार्टअप और लघु उद्योग लाखों लोगों को रोजगार प्रदान करते हैं, जिससे बेरोजगारी की समस्या कम होती है। उद्यमिता ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देती है।
उन्होंने कहा कि उद्यमिता नवाचार को प्रोत्साहित करती है जो आर्थिक समृद्धि का आधार है। नई तकनीकों, उत्पादों और सेवाओं का विकास देश को वैश्विक मंच पर अग्रणी बनाता है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ने भी स्टार्टअप को बढ़ावा दिया है।
इसके लिए विद्यार्थी अपना आइडिया लेकर आएं और उसको क्रियान्वित करें। इस दौरान रजिस्ट्रार डाॅ. अजय गर्ग, ट्रेनिंग एवं प्लेसमेंट अधिकारी प्रो. सुरेश वर्मा व प्रो. विजय शर्मा, विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र अश्वनी अग्रवाल उपस्थित रहे।