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50 फीसदी तक बढ़े तूड़े के दामों से दूध के रेट में आया ‘उफान’

Fri, 22 Apr 2022 02:09 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 22 Apr 2022 02:09 AM IST
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Due to the increase in the price of tada by 50 percent, there was a 'surge' in the rate of milk
मौसम के खराब होने से पहले धान और अब गेहूं की फसल प्रभावित होने के चलते पिछले सीजन के मुकाबले भूसे के दाम 50 फीसदी तक बढ़ गए हैं। इससे पशुपालकों के ऊपर आर्थिक बोझ बढ़ गया है। भूसे की कीमत बढ़ने के साथ ही दूध की कीमतों में इजाफा हो गया है। दूध के दाम एक साल में सात रुपये तक बढ़ चुके हैं। इसका असर आम आदमी पर पड़ रहा है।
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गेहूं की कटाई और थ्रेसिंग का काम 80 फीसदी पूरा हो चुका है। उसके बावजूद वर्तमान में भूसा (तूड़ा) 750 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रहा है। इतनी ऊंची कीमत सुनकर पशुपालकों में बेचैनी होना स्वाभाविक है। इन दिनों भूसे (तूड़ा) की आवक होने के बाद कीमतों में काफी कमी आ जाती थी। वर्ष 2021 में इन दिनों भूसे की कीमत 500 से 550 रुपये प्रति क्विंटल थी, लेकिन इस बार कीमतों में 50 फीसदी तक इजाफा हो चुका है। भूसा 750 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक की कीमत पर बिक रहा है। ऐसे में पशुपालक भी सोचने को मजबूर होने लगे हैं। भूसे के साथ ही पशु आहार की कीमत भी आसमान छू रही है। ऐसे में पशुपालन काफी महंगा सौदा साबित हो रहा है।
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पिछले खरीफ सीजन में लगातार बारिश से धान की फसल बुरी तरह से प्रभावित हुई थी। सोनीपत जिले में किसान बासमती धान की पराली को पशुचारे में प्रयोग करते हैं। खरीफ के मौसम में धान की फसल खराब होने के कारण पशुपालकों को पराली भी नहीं मिल सकी। पराली खेतों में ही बर्बाद हो गई। पानी भरा होने के कारण किसान पराली को काट भी नहीं पाए। इसके बाद गेहूं की फसल की बिजाई भी काफी देरी हो सकी। ठंड कम गिरने के कारण गेहूं के पौधे भी बेहतर नहीं हो सके। रही सही कसर मौसम में अचानक आई गर्मी ने पूरी कर दी। इससे गेहूं की फसल समय से पहले ही पक गई। इससे न तो गेहूं की पैदावार बढ़िया मिली और न भूसा ही मिल सका।
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गेहूं व भूसे की औसत रहती है एक समान
खेत में गेहूं व भूसे की औसत एक समान ही रहती है। पहले जहां एक एकड़ में 20 से 25 क्विंटल तक गेहूं व भूसा निकलता था, वहीं इस बार 12 से 15 क्विंटल ही निकल रहा है। जिससे पहले पराली नहीं मिलने पर इस बार भूसा भी कम रहने से इनकी कीमत आसमान छू रही है।
भूसा महंगा हुआ तो खर्च बढ़ने पर दूध के दाम बढ़ाए
भूसा महंगा होने से पशुपालक का खर्च भी बढ़ता चला गया। इस पर पशुपालक ने दूध की कीमत बढ़ा दी है। एक साल पहले इस मौसम में दूध की कीमत 52 से 55 रुपये किलो थी, वहीं अब दूध 62 रुपये किलो तक बिक रहा है। दूध की कीमत बढ़ने से पहले ही महंगाई की मार झेल रहे आम आदमी की मुसीबत और अधिक बढ़ गई है।

वर्जन
मौसम के प्रभाव के चलते पहले पराली और अब भूसा भी काफी कम मिला है। ऐसे में कृषि विभाग लगातार पशुपालकों को भूसे को बर्बाद होने से बचाने के लिए जागरूक कर रहा है। पशुपालक का चाहिए कि वह भूसे का भंडारण सूखे स्थान पर करें और बारिश से बचाने के लिए ढककर रखें, जिससे वह खराब होने से बच सके। इसका लाभ पशुपालक को ही मिलेगा।
- डॉ. अनिल सहरावत, उप निदेशक कृषि विभाग
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