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किसान सम्मेलन में दवा का छिड़काव करने वाला ड्रोन बना रहा आकर्षक का केंद्र

Sat, 29 Oct 2022 12:33 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 29 Oct 2022 12:33 AM IST
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Drone spraying medicine remains the center of attraction in the farmers' conference
किसान सम्मेलन में आधुनिक मशीनों का अवलोकन करते डीसी ललित सिवाच व कृषि उपनिदेशक डॉ. अनिल सहरावत। ? - फोटो : Sonipat
फसल अवशेष प्रबंधन के मामले में सोनीपत के किसान जागरूक हो रहे हैं। इसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। पराली जलाना किसी भी प्रकार से हितकर नहीं है। पराली जलाने से पर्यावरण को नुकसान होने के साथ जमीन की उर्वरा शक्ति क्षीण होती है। इससे फसलों का उत्पादन भी कम होता है। मित्र कीट भी आग से जलकर मर जाते हैं। इस प्रकार किसानों को हानि ही उठानी पड़ती है, जिससे बचने के लिए पराली जलाने पर भी पूर्ण रोक जरूरी है। सरकार ने पराली प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण योजनाएं लागू की हैं, जिनका लाभ किसानों को उठाना चाहिए। यह बात डीसी डीसी ललित सिवाच ने कही। वह फसल अवशेष प्रबंधन अभियान के तहत शुक्रवार को कृषि विभाग की तरफ से सुभाष स्टेडियम में आयोजित एक दिवसीय किसान सम्मेलन का शुभारंभ करते हुए किसानों को संबोधित कर रहे थे।
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उन्होंने किसानों को पराली न जलाने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि इस दिशा में सोनीपत ने रिकॉर्ड सफलता हासिल की है। पराली जलाने की यहां नाममात्र घटनाएं हुई हैं। इसके लिए सोनीपत के किसान बधाई के पात्र हैं। डीसी ने कहा कि सोनीपत के किसानों को परंपरागत खेती पर ही निर्भर नहीं रहना चाहिए, अपितु उन्हें फसल चक्र तोड़ते हुए फल-फूल, सब्जियों और खासतौर पर विदेशी सब्जियों के उत्पादन की ओर विशेष कदम बढ़ाने चाहिए। किसानों को अपनी मानसिकता बदलते हुए ऑर्गेनिक खेती को भी बढ़ावा देना चाहिए। इसके पहले डीसी ने सम्मेलन के तहत आयोजित प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। पहले उन्होंने ट्रैक्टरों और कृषि यंत्रों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इसके उपरांत उन्होंने ऑर्गेनिक उत्पादों, ड्रोन, उन्नत बीज, इफको, प्रजापिता ब्रह्माकुमारी, बागवानी इत्यादि की प्रदर्शनी का जायजा लिया।
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एक दिन में 30 एकड़ भूमि पर स्प्रे कर सकेगा ड्रोन
किसान सम्मेलन में आधुनिक कृषि यंत्रों की प्रदर्शनी लगाई गई। जिसके तहत आठ लाख रुपये का स्प्रे ड्रोन किसानों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा। ड्रोन के माध्यम से किसान एक दिन में करीब 30 एकड़ भूमि में स्प्रे कर सकता है। इसके अतिरिक्त विभिन्न कंपनियों के ट्रैक्टर व अन्य कृषि यंत्रों ने भी किसानों का ध्यान अपनी तरफ खींचा।
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प्राकृतिक खेती के प्रति किसानों को किया गया जागरूक
किसान सम्मेलन के दौरान कृषि विभाग के अधिकारियों व कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन तथा पैदावार बढ़ाने और प्राकृतिक खेती को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करते हुए महत्वपूर्ण जानकारी दी। कृषि विज्ञान केंद्र से आए कृषि वैज्ञानिक डॉ. जेके नांदल ने किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहन दिया। कृषि विभाग के सहायक कृषि अभियंता डॉ. नवीन हुड्डा ने फसल अवशेष प्रबंधन पर महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मंडूसी के प्रकोप के चलते गेहूं की पैदावार कम होती है। इस मौके पर कृषि विभाग के एसडीओ डॉ. देवेंद्र कुहाड़ मौजूद थे।

किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के प्रति जागरूक करने व प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए एक दिवसीय किसान सम्मेलन आयोजित किया गया। इस दौरान आधुनिक कृषि यंत्रों व उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगाई गई थी। -डॉ. अनिल सहरावत, कृषि उपनिदेशक, सोनीपत।
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