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ऑनलाइन कार्य से कामकाजी महिलाओं पर पड़ रहा दोहरा बोझ, हो रहीं अवसादग्रस्त
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राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, ताजपुर में अमर उजाला के अपराजिता कार्यक्रम में कार्यक्षेत्र म
- फोटो : Sonipat
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गांव ताजपुर स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय मेें मंगलवार को ‘कार्य क्षेत्र में ऑनलाइन माध्यम के बढ़ते प्रचलन का कामकाजी महिलाओं पर प्रभाव’ विषय पर संवाद आयोजित किया गया।
अमर उजाला फाउंडेशन के अपराजिता के तहत आयोजित संवाद में महिला शिक्षकों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और अपने विचार रखे। महिला शिक्षकों ने कहा कि स्कूल-कॉलेजों व कार्यालयों में काम के ऑनलाइन माध्यम का कामकाजी महिलाओं पर विपरीत असर पड़ रहा है। महिलाएं निरंतर अवसाद ग्रस्त हो रही हैं। हालात यह है कि उन्हें आराम के लिए नींद की गोलियों का सहारा लेना पड़ रहा है। महिला शिक्षकों का कहना है कि माध्यम भले ऑनलाइन हो, लेकिन इसकी समय सीमा निर्धारित की जानी चाहिए।
कार्यक्रम मेें शिक्षिकाओं ने संबंधित विषय पर खुलकर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में ऑनलाइन शिक्षा का प्रचलन बढ़ा। विभिन्न कार्यालयों में भी काम पूरा करने के लिए ऑनलाइन माध्यम ही अपनाया गया। इससे भले ही काम में बाधा नहीं आई हो, लेकिन इसने कामकाजी महिलाओं की जिंदगी पर जरूर विपरीत प्रभाव डाला है। कामकाजी महिलाएं दोहरे बोझ तले दबकर रह गई हैं। ऑनलाइन काम का समय निर्धारित नहीं होने से उनके पास व्यक्तिगत जीवन के लिए समय नहीं रहा। घर और कार्यालय के दोहरे बोझ तले दबी कामकाजी महिलाएं परिवार व कार्य क्षेत्र में सामंजस्य नहीं बैठा पा रही हैं। जिससे महिलाओं के पारिवारिक रिश्ते भी बिगड़ने लगे हैं।
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शिक्षिकाओं ने कहा कि यह एक गंभीर विषय है। जिस पर गंभीरता से काम नहीं किया गया तो आने वाले समय में इसके गंभीर परिणाम सामने आएंगे। संवाद में शामिल शिक्षिका सुमित्रा, सुषमा, अनुराधा, कविता, स्नेहलता, रूबीना त्यागी, किरण, निर्मला सहित अन्य ने इस विषय पर अपने-अपने तर्क दिए। सभी ने ऑनलाइन कार्य का समय निर्धारित करने की मांग की।
बोलीं शिक्षिकाएं
कोरोना काल में शिक्षा के ऑनलाइन माध्यम को बढ़ावा मिला है। ऑनलाइन शिक्षा से विद्यार्थियों के गिरते शिक्षा स्तर में भले ही सुधार आया हो, लेकिन इनमें महिला शिक्षकों पर दोहरा बोझ डाल दिया है। काम का समय निर्धारित न होने से महिला शिक्षक अवसाद में हैं। सरकार को इस तरफ ध्यान देना चाहिए। -पूजा, प्राध्यापिका, कॉमर्स।
कोरोना काल में काफी लोग बेरोजगार हो गए थे। उस दौरान ऑनलाइन माध्यम से हुए कार्य ने अनेक लोगों का रोजगार बचाया भी है। स्कूल बंद होने के बावजूद विद्यार्थियों को ऑनलाइन माध्यम ने ही शिक्षा से जोड़े रखा गया। यह माध्यम बेहतर है, लेकिन इसमें भी समय सीमा निर्धारित की जानी चाहिए, ताकि कामकाजी महिलाएं घर और काम में सामंजस्य बैठा सकें। -रूबीना त्यागी, प्राध्यापिका, अंग्रेजी।
कार्यक्षेत्र में ऑनलाइन माध्यम से किये जाने वाले कार्य की समय सीमा निर्धारित न होने से कामकाजी महिलाओं पर दोहरा बोझ पड़ रहा है। जिस समय महिलाएं घर का काम कर रही होती हैं, उसी समय अगर कार्यालय का काम आ जाए तो उन्हें मजबूरन घर का काम छोड़ना पड़ता है। जिससे परिवार में कलह की स्थिति बन रही है। सरकार को इस तरफ ध्यान देते हुए ऑनलाइन काम का भी समय निर्धारित करना चाहिए। -किरण, प्राध्यापिका, भौतिक विज्ञान।
शिक्षा विभाग ने बोर्ड कक्षा के विद्यार्थियों को टैबलेट वितरित कर ग्रीष्मकालीन अवकाश में भी ऑनलाइन कक्षाएं लगाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कहा है कि विद्यार्थी किसी भी समय शिक्षक से संवाद स्थापित कर सकते हैं। ऑनलाइन कार्य का समय निर्धारित न होने से कामकाजी महिलाओं के पारिवारिक रिश्ते खराब हो रहे हैं। दोहरे बोझ तले दबी महिलाएं सामंजस्य स्थापित नहीं कर पा रही हैं। सरकार को इस तरफ ध्यान देना चाहिए। -स्नेहलता, प्राध्यापिका, इतिहास।
ग्रीष्मकालीन अवकाश में कामकाजी महिलाएं अपने गांव या मायके चली जाती थीं। ग्रामीण क्षेत्रों में नेट की समस्या होने से काम बाधित होगा, जिसके चलते अनेकों ने अपनी योजना ही टाल दी है। जिससे परिवार में कलह की स्थिति भी बनी है। सामने आया है कि समय निर्धारित न होने से कामकाजी महिलाएं अवसाद ग्रस्त हो रही हैं। यही नहीं आराम लेने के लिए नींद की गोलियां तक लेने लगी हैं, जिसका उनके स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है। जिन कामकाजी महिलाओं पर दोहरे काम का ज्यादा दबाव रहता है वो योग व ध्यान का सहारा लें। इसके साथ ही पौष्टिक आहार लें। यही चीजें आपको अपने जीवन में दोहरी भूमिका निभाने में मदद करेंगी। -निर्मला, पीटीआई।
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अमर उजाला फाउंडेशन के अपराजिता के तहत आयोजित संवाद में महिला शिक्षकों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और अपने विचार रखे। महिला शिक्षकों ने कहा कि स्कूल-कॉलेजों व कार्यालयों में काम के ऑनलाइन माध्यम का कामकाजी महिलाओं पर विपरीत असर पड़ रहा है। महिलाएं निरंतर अवसाद ग्रस्त हो रही हैं। हालात यह है कि उन्हें आराम के लिए नींद की गोलियों का सहारा लेना पड़ रहा है। महिला शिक्षकों का कहना है कि माध्यम भले ऑनलाइन हो, लेकिन इसकी समय सीमा निर्धारित की जानी चाहिए।
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कार्यक्रम मेें शिक्षिकाओं ने संबंधित विषय पर खुलकर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में ऑनलाइन शिक्षा का प्रचलन बढ़ा। विभिन्न कार्यालयों में भी काम पूरा करने के लिए ऑनलाइन माध्यम ही अपनाया गया। इससे भले ही काम में बाधा नहीं आई हो, लेकिन इसने कामकाजी महिलाओं की जिंदगी पर जरूर विपरीत प्रभाव डाला है। कामकाजी महिलाएं दोहरे बोझ तले दबकर रह गई हैं। ऑनलाइन काम का समय निर्धारित नहीं होने से उनके पास व्यक्तिगत जीवन के लिए समय नहीं रहा। घर और कार्यालय के दोहरे बोझ तले दबी कामकाजी महिलाएं परिवार व कार्य क्षेत्र में सामंजस्य नहीं बैठा पा रही हैं। जिससे महिलाओं के पारिवारिक रिश्ते भी बिगड़ने लगे हैं।
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शिक्षिकाओं ने कहा कि यह एक गंभीर विषय है। जिस पर गंभीरता से काम नहीं किया गया तो आने वाले समय में इसके गंभीर परिणाम सामने आएंगे। संवाद में शामिल शिक्षिका सुमित्रा, सुषमा, अनुराधा, कविता, स्नेहलता, रूबीना त्यागी, किरण, निर्मला सहित अन्य ने इस विषय पर अपने-अपने तर्क दिए। सभी ने ऑनलाइन कार्य का समय निर्धारित करने की मांग की।
बोलीं शिक्षिकाएं
कोरोना काल में शिक्षा के ऑनलाइन माध्यम को बढ़ावा मिला है। ऑनलाइन शिक्षा से विद्यार्थियों के गिरते शिक्षा स्तर में भले ही सुधार आया हो, लेकिन इनमें महिला शिक्षकों पर दोहरा बोझ डाल दिया है। काम का समय निर्धारित न होने से महिला शिक्षक अवसाद में हैं। सरकार को इस तरफ ध्यान देना चाहिए। -पूजा, प्राध्यापिका, कॉमर्स।
कोरोना काल में काफी लोग बेरोजगार हो गए थे। उस दौरान ऑनलाइन माध्यम से हुए कार्य ने अनेक लोगों का रोजगार बचाया भी है। स्कूल बंद होने के बावजूद विद्यार्थियों को ऑनलाइन माध्यम ने ही शिक्षा से जोड़े रखा गया। यह माध्यम बेहतर है, लेकिन इसमें भी समय सीमा निर्धारित की जानी चाहिए, ताकि कामकाजी महिलाएं घर और काम में सामंजस्य बैठा सकें। -रूबीना त्यागी, प्राध्यापिका, अंग्रेजी।
कार्यक्षेत्र में ऑनलाइन माध्यम से किये जाने वाले कार्य की समय सीमा निर्धारित न होने से कामकाजी महिलाओं पर दोहरा बोझ पड़ रहा है। जिस समय महिलाएं घर का काम कर रही होती हैं, उसी समय अगर कार्यालय का काम आ जाए तो उन्हें मजबूरन घर का काम छोड़ना पड़ता है। जिससे परिवार में कलह की स्थिति बन रही है। सरकार को इस तरफ ध्यान देते हुए ऑनलाइन काम का भी समय निर्धारित करना चाहिए। -किरण, प्राध्यापिका, भौतिक विज्ञान।
शिक्षा विभाग ने बोर्ड कक्षा के विद्यार्थियों को टैबलेट वितरित कर ग्रीष्मकालीन अवकाश में भी ऑनलाइन कक्षाएं लगाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कहा है कि विद्यार्थी किसी भी समय शिक्षक से संवाद स्थापित कर सकते हैं। ऑनलाइन कार्य का समय निर्धारित न होने से कामकाजी महिलाओं के पारिवारिक रिश्ते खराब हो रहे हैं। दोहरे बोझ तले दबी महिलाएं सामंजस्य स्थापित नहीं कर पा रही हैं। सरकार को इस तरफ ध्यान देना चाहिए। -स्नेहलता, प्राध्यापिका, इतिहास।
ग्रीष्मकालीन अवकाश में कामकाजी महिलाएं अपने गांव या मायके चली जाती थीं। ग्रामीण क्षेत्रों में नेट की समस्या होने से काम बाधित होगा, जिसके चलते अनेकों ने अपनी योजना ही टाल दी है। जिससे परिवार में कलह की स्थिति भी बनी है। सामने आया है कि समय निर्धारित न होने से कामकाजी महिलाएं अवसाद ग्रस्त हो रही हैं। यही नहीं आराम लेने के लिए नींद की गोलियां तक लेने लगी हैं, जिसका उनके स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है। जिन कामकाजी महिलाओं पर दोहरे काम का ज्यादा दबाव रहता है वो योग व ध्यान का सहारा लें। इसके साथ ही पौष्टिक आहार लें। यही चीजें आपको अपने जीवन में दोहरी भूमिका निभाने में मदद करेंगी। -निर्मला, पीटीआई।