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Sonipat News: वेबसाइट से लिंक भेज ठगी करने वाले गिरोह के 10 सदस्य गिरफ्तार

Sun, 19 Mar 2023 12:33 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत Updated Sun, 19 Mar 2023 12:33 AM IST
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doing fraud while sending link on website, ten arrested
सोनीपत। गांव रोलद लतीफपुर के ग्रामीण को वेबसाइट पर लिंक भेजकर आठ लाख रुपये ऐंठने के मामले में साइबर थाना पुलिस ने ठग गिरोह के दस सदस्यों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने ग्रामीण को कमीशन में मोटी राशि देने का लालच देकर ठगी की थी। पहले उनको कमीशन की राशि भेजकर भरोसा दिलाया और उसके बाद रुपये ठग लिए थे। ज्यादा कमाई के लिए युवक ने अपने साथी बीएसएफ के जवान को भी अपने साथ शामिल कर लिया था। गिरफ्तार आरोपियों से सिम, मोबाइल, डेबिट कार्ड, लैपटॉप समेत अन्य सामान बरामद किया है। पुलिस ने आरोपियों को कर्नाटक के बैंगलुरू स्थित मरोगंदाना हल्ली से गिरफ्तार कर राहदारी रिमांड पर लेकर आने के बाद सोनीपत कोर्ट में पेश किया। जहां उन्हें दस दिन के रिमांड पर लिया गया है। गिरोह 500 से अधिक लोगों से ठगी कर चुका है।
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डीसीपी मयंक गुप्ता ने शनिवार शाम पत्रकारों से बातचीत में बताया कि 8 सितंबर 2022 को गांव रोलद लतीफपुर निवासी नवीन कुमार ने साइबर थाना पुलिस को बताया था कि वह निजी कंपनी में कार्यरत है। उनके मोबाइल पर 25 जुलाई 2022 को एक लिंक डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट एच 111 आईएन से एसएमएस द्वारा आया था। उन्होंने लिंक को डाउनलोड कर लिया था। उसमें एक वेबसाइट पर उनकी आईडी को पंजीकृत कराया गया था। उसके बाद उनके पास मैसेज आने लगे थे। उनको पहले चार ऑर्डर पूरा करने का झांसा दिया। उनके पूरे होने पर उन्हें कमीशन दे दिया। पहले उन्हें 100 रुपये पर 120 रुपये तक कमीशन दिया गया। बाद में वेबसाइट पर आठ ऑर्डर पूरा करने पर मोटी राशि कमीशन के रूप में देने का झांसा दिया गया था। उन्होंने आर्डर पूरा करने के लिए 29 जुलाई 2022 को दो लाख रुपये उस वेबसाइट पर यूपीआई से ट्रांसफर कर दिए थे। उन्होंने तीन ऑर्डर की धनराशि जमा करा दी, लेकिन कमीशन नहीं आया। मैसेज से संपर्क हुआ तो उन्होंने बताया कि सभी आठ ऑर्डर पूरे करने पर ही कमीशन मिलेगा। उन्होंने अपने साथी बीएसएफ के जवान प्रवीन कुमार को इसकी जानकारी दी थी। कमीशन में आधी राशि लेना तय करने के बाद उन्होंने प्रवीन से रुपये लेकर अपने व अपनी पत्नी के खाते से रुपये ट्रांसफर करके आठ ऑर्डर पूरे करा दिए थे। उसके बाद भी वेबसाइट पर दो ऑर्डर और बाकी बताए जाते रहे। इस पर उन्होंने और रुपये भेजे, लेकिन फिर भी दो ऑर्डर भी बाकी दिखते रहे थे। तब वह समझ गए कि उनके व बीएसएफ जवान के साथ साइबर ठगी कर ली गई है। तब तक उनके आठ लाख रुपये ठगे जा चुके थे। साइबर थाना पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया था।
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दो आरोपी पकड़ने पर गिरोह का लगा पता
मयंक गुप्ता ने बताया कि साइबर थाना पुलिस ने इंस्पेक्टर राजीव कुमार के नेतृत्व में मामले में प्रवीर मंडल व राज घोष का दबोचा था। वह पश्चिमी बंगाल से पकड़े गए। उनमें प्रवीर का खाता रुपये डलवाने में प्रयोग हुआ था। राज घोष लोगों को झांसे में लेकर उनके खाते खुलवाने के बाद उनके डेबिट कार्ड व कागजात ले लेता था। इसके लिए वह खाता धारकों को कमीशन देता था। उनसे पूछताछ के बाद साइबर थाना पुलिस को पता लगा कि कर्नाटक के बैंगलुरू में एक घर के अंदर गिरोह के सदस्य जालसाजी का धंधा चलाते हैं। जिस पर 13 मार्च को बैंगलुरू स्थित मरोगंदाना हल्ली में छापा मारकर वहां से 10 आरोपियों को दबोचा गया। उन्हें पांच दिन के राहदारी रिमांड पर लेकर सोनीपत लाने के बाद 10 दिन के रिमांड पर लिया है।
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आरोपियों की यह हुई पहचान, दो जुड़वा भाई
गिरफ्तार आरोपी मूलरूप से केरल फिलहाल बैंगलुरू स्थित मरोगंदाना हल्ली निवासी मोहम्मद फोजन, राहुलराज, नंदू रामचंद्रन, मोहम्मद हैशम, रामशद वीआर, अरविंदा एम, विश्क प्रताप, वैशक प्रताप, विपिन दास और मोहम्मद एफ है। इनमें विश्क प्रताप और वैशक जुड़वा भाई हैं। गिरफ्तार 10 आरोपियों में से जहां दो ने बीएससी तक पढ़ाई की है, वहीं आठ अन्य 12वीं कक्षा उत्तीर्ण है। गिरफ्तार सभी कमीशन लेकर काम करते है। यह गिरोह की चेन का हिस्सा है। इनसे ऊपर कई अन्य आरोपी भी है। जिनके बारे में रिमांड के दौरान पूछताछ की जाएगी। रोलद के नवीन से हुई आठ लाख की ठगी में से साढ़े तीन लाख इन गिरफ्तार आरोपियों को कमीशन दिया गया था। गिरोह में कई अन्य सदस्य शामिल हो सकते हैं। जिसके बारे में अभी पुलिस को भी पूरी जानकारी नहीं है।

आरोपियों से यह सामान हुआ बरामद
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों से 1196 सिम, 48 मोबाइल, 35 डेबिट कार्ड, 5 वाईफाई डोंगल, 2 लैपटॉप, 5 वाईफाई सेट, 20 चार्जर व एक इंटरनेट बैंकिंग का टोकन बरामद किए है।


500 से अधिक से की गई ठगी
मयंक गुप्ता ने बताया कि आरोपियों को यह नहीं पता कि वे कितने लोगों से ठगी कर चुके है। इनका कहना है कि 500 से अधिक लोगों से ठगी की जा चुकी है। अब पुलिस इनके खातों की ट्रांजेक्शन से जानकारी जुटाकर ठगी का शिकार हुए लोगों का पता लगाएगी। अभी आरोपियों के खाते खाली मिले हैं। डीसीपी ने कहा कि लोगों को अनजान लिंक पर किसी सूरत में क्लिक नहीं करना चाहिए।
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