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हर रिश्ते में बनाए रखनी चाहिए मर्यादा : अंजली आर्य
Tue, 05 Nov 2024 03:31 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Tue, 05 Nov 2024 03:31 AM IST
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खरखौदा। सावित्री बाई फुले महिला पार्क में चल रही पांच दिवसीय राम कथा में कथावाचक अंजली आर्य ने श्रद्धालुओं को भगवान श्रीराम की मर्यादा और जीवन आदर्शों के महत्व को समझाया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार भगवान श्रीराम ने मर्यादा में रहकर प्रत्येक कार्य को सफलतापूर्वक संपन्न किया, उसी प्रकार हमें भी हर रिश्ते में मर्यादा बनाए रखनी चाहिए, यही जीवन का सार है।
कथावाचक अंजली आर्य ने कहा कि पर स्त्री पर नजर कायर रखते हैं, मर्द वही होता है, जो पत्नी का मान-सम्मान बरकरार रखे और पत्नी के अलावा सभी को अपनी बहन-बेटी माने। उन्होंने कहा कि अगर स्त्री जाति पर कोई कुदृष्टि रखता है तो वह नीच है। कथावाचक अंजली आर्य ने कहा कि अहिल्या पत्थर नहीं बनी थी, बल्कि पत्थर के समान स्थित हो गई थी। आज भी बहन की शादी में फेरों के समय भाई पत्थर पर उसका पैर रखवाकर उसे कहता है कि जहां तू आज जा रही, उनसे व उनके व्यवहार से तू अनजान है, इसलिए वह कुछ कहे तो उस विपरीत परिस्थिति में खुद को कमजोर मत पड़ने देना, बल्कि पत्थर बन जाना। आज नहीं तो कल रास्ता जरूरी दिख जाएगा।
यही स्थिति अहिल्या के साथ भी हुई, लेकिन श्रीराम का उन्हें पैर नहीं लगा था, एक मर्यादा पुरुषोत्तम कैसे किसी स्त्री को पैर लगा सकते हैं, बल्कि श्रीराम ने लक्ष्मण के साथ अहिल्या को माता मानकर उन्हें प्रणाम किया था, जिससे अहिल्या का उद्धार हो गया था। उन्होंने कहा कि श्रीराम की यह कथा केवल एक महाकाव्य नहीं, बल्कि जीवन में मर्यादा, प्रेम और कर्तव्य का संदेश देती है। हमें उनके आदर्शों का पालन करते हुए जीवन में हर रिश्ते की मर्यादा बनाए रखनी चाहिए।
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कथावाचक अंजली आर्य ने कहा कि पर स्त्री पर नजर कायर रखते हैं, मर्द वही होता है, जो पत्नी का मान-सम्मान बरकरार रखे और पत्नी के अलावा सभी को अपनी बहन-बेटी माने। उन्होंने कहा कि अगर स्त्री जाति पर कोई कुदृष्टि रखता है तो वह नीच है। कथावाचक अंजली आर्य ने कहा कि अहिल्या पत्थर नहीं बनी थी, बल्कि पत्थर के समान स्थित हो गई थी। आज भी बहन की शादी में फेरों के समय भाई पत्थर पर उसका पैर रखवाकर उसे कहता है कि जहां तू आज जा रही, उनसे व उनके व्यवहार से तू अनजान है, इसलिए वह कुछ कहे तो उस विपरीत परिस्थिति में खुद को कमजोर मत पड़ने देना, बल्कि पत्थर बन जाना। आज नहीं तो कल रास्ता जरूरी दिख जाएगा।
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यही स्थिति अहिल्या के साथ भी हुई, लेकिन श्रीराम का उन्हें पैर नहीं लगा था, एक मर्यादा पुरुषोत्तम कैसे किसी स्त्री को पैर लगा सकते हैं, बल्कि श्रीराम ने लक्ष्मण के साथ अहिल्या को माता मानकर उन्हें प्रणाम किया था, जिससे अहिल्या का उद्धार हो गया था। उन्होंने कहा कि श्रीराम की यह कथा केवल एक महाकाव्य नहीं, बल्कि जीवन में मर्यादा, प्रेम और कर्तव्य का संदेश देती है। हमें उनके आदर्शों का पालन करते हुए जीवन में हर रिश्ते की मर्यादा बनाए रखनी चाहिए।
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