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असिस्टेंट कमिश्नर के नाम का डर दिखा मांगते थे रिश्वत, 3-3 लाख की बांध दी थी किश्त
अमर उजाला ब्यूरो सोनीपत।
Updated Fri, 24 Feb 2017 11:18 PM IST
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राई औद्योगिक क्षेत्र में स्थित जिस फैक्ट्री से सोमवार रात को सीबीआई ने सेंट्रल एक्साइज के तीन अधिकारियों को रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ पकड़ा था उस फैक्ट्री के मालिक दीपक ने नया खुलासा किया है। वह तीनों अधिकारी पिछले कई दिनों से असिस्टेंट कमिश्नर के नाम का डर दिखा रिश्वत मांग रहे थे। यह रिश्वत भी कोई छोटी नहीं, बल्कि 10 लाख रुपये मांगी गई थी। जब फैक्ट्री मालिक ने इतने रुपये नहीं होने की बात कही तो सेंट्रल एक्साइज के अधिकारियों ने रिश्वत की भी किश्त बांध दी और नौ लाख रुपये देने की बात कहकर तीन बार में 3-3 लाख रुपये देने का प्रस्ताव रख दिया। उन तीनों को पकड़वाने के लिए ही फैक्ट्री मालिक ने यह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया और उनको फैक्ट्री में बुलाकर तीन लाख की रिश्वत लेते हुए सीबीआई से रंगेहाथ पकड़वा दिया। फैक्ट्री मालिक ने रिश्वत मांगने की शुरुआत से लेकर तीनों के पकड़े जाने तक की बातचीत व रिश्वत देते हुए वीडियो रिकार्डिंग सभी को सीबीआई को सौंप दिया है।
यह है पूरा मामला
दिल्ली निवासी दीपक की ओर से चंडीगढ़ में सीबीआई के पास शिकायत की गई थी कि उनकी राई में मेटल बनाने की फैक्ट्री है। उनसे सेंट्रल एक्साइज में तैनात सुपरिंटेंडेंट अनिल कुमार व अजय कुमार के अलावा इंस्पेक्टर रविंद्र ने रिश्वत में नौ लाख रुपये मांगे हैं। इस शिकायत के आधार पर तीनों को पकड़ने का प्लान बनाया गया और तीनों अधिकारियों से बातचीत करके नौ लाख रुपये देने की बात तय हो गई। इनमें से तीन लाख रुपये देने के लिए उन तीनों को सोमवार शाम को मालिक ने राई स्थित फैक्ट्री में बुला लिया था, जहां उनको रुपये लेते हुए सीबीआई की चंडीगढ़ टीम ने रंगेहाथ पकड़ लिया था।
पेनाल्टी लगाने के नाम पर डराते थे अधिकारी
फैक्ट्री मालिक दीपक ने खुलासा किया है कि सबसे पहले तीनों अधिकारी 10 फरवरी को फैक्ट्री आए थे। उस समय सभी कागज देखकर कहा गया कि पैसे का इंतजाम कर लेना। दीपक ने पूछा कि आखिर किस बात के पैसे देने हैं तो उन्होंने कहा कि अगर पेनाल्टी से बचना है तो 10 लाख रुपये देने पड़ेंगे। दीपक ने यह भी पूछा कि आखिर जब फैक्ट्री में सबकुछ ठीक है तो पेनाल्टी किस बात की लगाई जाएगी। इस पर तीनों अधिकारियों ने कहा कि हम 10 लाख रुपये मांग रहे हैं और साहब आ गए तो इससे भी ज्यादा मांगेंगे। वह असिस्टेंट कमिश्नर को ही साहब बताते थे और इस तरह उनके नाम का इस्तेमाल कर डराया जाता था। दीपक जब ज्यादा परेशान हो गए तो वह सब कुछ रिकॉर्ड करने लगे और उन्होंने सीबीआई को रिकार्डिंग सुनाकर पूरी कहानी बताई। उसके बाद ही तीनों को पकड़ने का प्लान बनाया गया था।
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यह है पूरा मामला
दिल्ली निवासी दीपक की ओर से चंडीगढ़ में सीबीआई के पास शिकायत की गई थी कि उनकी राई में मेटल बनाने की फैक्ट्री है। उनसे सेंट्रल एक्साइज में तैनात सुपरिंटेंडेंट अनिल कुमार व अजय कुमार के अलावा इंस्पेक्टर रविंद्र ने रिश्वत में नौ लाख रुपये मांगे हैं। इस शिकायत के आधार पर तीनों को पकड़ने का प्लान बनाया गया और तीनों अधिकारियों से बातचीत करके नौ लाख रुपये देने की बात तय हो गई। इनमें से तीन लाख रुपये देने के लिए उन तीनों को सोमवार शाम को मालिक ने राई स्थित फैक्ट्री में बुला लिया था, जहां उनको रुपये लेते हुए सीबीआई की चंडीगढ़ टीम ने रंगेहाथ पकड़ लिया था।
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पेनाल्टी लगाने के नाम पर डराते थे अधिकारी
फैक्ट्री मालिक दीपक ने खुलासा किया है कि सबसे पहले तीनों अधिकारी 10 फरवरी को फैक्ट्री आए थे। उस समय सभी कागज देखकर कहा गया कि पैसे का इंतजाम कर लेना। दीपक ने पूछा कि आखिर किस बात के पैसे देने हैं तो उन्होंने कहा कि अगर पेनाल्टी से बचना है तो 10 लाख रुपये देने पड़ेंगे। दीपक ने यह भी पूछा कि आखिर जब फैक्ट्री में सबकुछ ठीक है तो पेनाल्टी किस बात की लगाई जाएगी। इस पर तीनों अधिकारियों ने कहा कि हम 10 लाख रुपये मांग रहे हैं और साहब आ गए तो इससे भी ज्यादा मांगेंगे। वह असिस्टेंट कमिश्नर को ही साहब बताते थे और इस तरह उनके नाम का इस्तेमाल कर डराया जाता था। दीपक जब ज्यादा परेशान हो गए तो वह सब कुछ रिकॉर्ड करने लगे और उन्होंने सीबीआई को रिकार्डिंग सुनाकर पूरी कहानी बताई। उसके बाद ही तीनों को पकड़ने का प्लान बनाया गया था।
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