{"_id":"59c803e04f1c1b25688b64de","slug":"21506280416-sonipat-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मुरथल विवि को बदनाम करने के मामले में रजिस्ट्रार के निजी सचिव सहित तीन काबू, जेल भेजा","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
मुरथल विवि को बदनाम करने के मामले में रजिस्ट्रार के निजी सचिव सहित तीन काबू, जेल भेजा
Updated Mon, 25 Sep 2017 12:51 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुरथल विवि को बदनाम करने के मामले में रजिस्ट्रार के निजी सचिव सहित तीन काबू
सोनीपत।
दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मुरथल में मुख्यमंत्री के नाम पत्र और ई-मेल भेजकर की गई शिकायत के मामले में जांच कर रही एसआईटी ने तीन आरोपियों को काबू किया है। साइबर एक्सपर्ट, सीसीटीवी फुटेज और कंप्यूटर से मिले सबूतों की गुरुग्राम साइबर सेल से आई रिपोर्ट के बाद अब यह कार्रवाई हुई है। एसआईटी ने रजिस्ट्रार के निजी सचिव समेत तीन आरोपी काबू किए हैं। इनमें एक स्टेनो है, तो दूसरा उसका सहयोगी है। आरोपियों को अदालत ने न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। इनकी गिरफ्तारी के बाद इस मामले में अन्य भी फंस सकते है। इस पूरे खेल के पीछे किसी शातिर का हाथ हो सकता है। इन तीनों कर्मियों का सीधे तौर पर कोई मनमुटाव या कोई विवाद वीसी टंकेश्वर कुमार से नहीं था। ऐसे में इन्होंने यह काम क्यों किया और किसके कहने पर किया, यह जांच अब एसआईटी करेगी।
यह था मामला
मुरथल विवि के कुलपति के सचिव डॉ. अनिल खुराना ने पुलिस को शिकायत दी थी कि 15 जून को शाम पांच बजकर 39 मिनट पर विवि की अधिकारिक ई-मेल पर उन्हें एक ई-मेल मिली थी। इसके माध्यम से सीएम को भेजे गए पत्र की शिकायत की कॉपी स्कैन कर भेजी गई थी। इसमें मुख्यमंत्री के नाम शिकायत देकर कुलपति पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। विवि ने अपने स्तर पर इसकी जांच की, तो पाया कि शिकायत में उपलब्ध कराया गए रिकॉर्ड की प्रति विवि में ही स्कैन की गई हैं। इसमें दो पेज पर विवि का डायरी नंबर अंकित है। बाद में शिकायतकर्ता अमित सचदेवा, निवासी गांव कुराना, जिला पानीपत के पते पर जाकर देखा गया, तो पाया कि इस नाम का कोई व्यक्ति वहां नहीं रहता। इस पर पुलिस को शिकायत दी गई।
इसके बाद पुलिस ने मामला दर्जकर कार्रवाई शुरू कर दी थी। इसी कड़ी में पुलिस ने लगातार दो दिन तक विवि में पहुंच कर संबंधित रिकॉर्ड खंगाला था। इस मामले में तकनीकी पेंच फंसने के बाद इस जांच के लिए गुरुग्राम साइबर सेल को भेजा गया था। यहां से मिली रिपोर्ट के आधार पर एसआईटी ने विवि के रजिस्ट्रार के निजी सचिव योगेंद्र, स्टेनो पवन और एक अन्य युवक दीपक को काबू किया है। दीपक चंडीगढ़ में रहता है।
विज्ञापन
कर्मियों के समर्थन में आई यूनियन
दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विवि की मिनिस्ट्रीयल स्टाफ वेलफेयर एसोसिएशन दोनों कर्मियों के समर्थन में आ गई हैं। एसोसिएशन के प्रधान आनंद राणा ने बताया कि मामले में आला अधिकारियों को बचाने के फेर में छोटे कर्मियों को फंसाया गया है। पुलिस यदि इस मामले में ईमानदारी से जांच करें तो कई अन्य की संलिप्तता सामने आएगी। पुलिस को सच्चाई और ईमानदारी से काम करना चाहिए।
रजिस्ट्रार ने कहा-नो कमेंट
मामले को लेकर रजिस्ट्रार केपी सिंह से बातचीत की गई तो उन्होंने मामले में कुछ भी कहने से मना कर दिया। उन्होंने नो-कमेंट कहते हुए फोन काट दिया।
पुलिस ने मामले में तीन आरोपियों को काबू किया है। उन्हें अदालत ने जेल भेज दिया है। मामले की जांच की जा रही है।
संदीप धनखड़, एसआईटी प्रभारी, सोनीपत।
विज्ञापन
सोनीपत।
दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मुरथल में मुख्यमंत्री के नाम पत्र और ई-मेल भेजकर की गई शिकायत के मामले में जांच कर रही एसआईटी ने तीन आरोपियों को काबू किया है। साइबर एक्सपर्ट, सीसीटीवी फुटेज और कंप्यूटर से मिले सबूतों की गुरुग्राम साइबर सेल से आई रिपोर्ट के बाद अब यह कार्रवाई हुई है। एसआईटी ने रजिस्ट्रार के निजी सचिव समेत तीन आरोपी काबू किए हैं। इनमें एक स्टेनो है, तो दूसरा उसका सहयोगी है। आरोपियों को अदालत ने न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। इनकी गिरफ्तारी के बाद इस मामले में अन्य भी फंस सकते है। इस पूरे खेल के पीछे किसी शातिर का हाथ हो सकता है। इन तीनों कर्मियों का सीधे तौर पर कोई मनमुटाव या कोई विवाद वीसी टंकेश्वर कुमार से नहीं था। ऐसे में इन्होंने यह काम क्यों किया और किसके कहने पर किया, यह जांच अब एसआईटी करेगी।
यह था मामला
मुरथल विवि के कुलपति के सचिव डॉ. अनिल खुराना ने पुलिस को शिकायत दी थी कि 15 जून को शाम पांच बजकर 39 मिनट पर विवि की अधिकारिक ई-मेल पर उन्हें एक ई-मेल मिली थी। इसके माध्यम से सीएम को भेजे गए पत्र की शिकायत की कॉपी स्कैन कर भेजी गई थी। इसमें मुख्यमंत्री के नाम शिकायत देकर कुलपति पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। विवि ने अपने स्तर पर इसकी जांच की, तो पाया कि शिकायत में उपलब्ध कराया गए रिकॉर्ड की प्रति विवि में ही स्कैन की गई हैं। इसमें दो पेज पर विवि का डायरी नंबर अंकित है। बाद में शिकायतकर्ता अमित सचदेवा, निवासी गांव कुराना, जिला पानीपत के पते पर जाकर देखा गया, तो पाया कि इस नाम का कोई व्यक्ति वहां नहीं रहता। इस पर पुलिस को शिकायत दी गई।
विज्ञापन
इसके बाद पुलिस ने मामला दर्जकर कार्रवाई शुरू कर दी थी। इसी कड़ी में पुलिस ने लगातार दो दिन तक विवि में पहुंच कर संबंधित रिकॉर्ड खंगाला था। इस मामले में तकनीकी पेंच फंसने के बाद इस जांच के लिए गुरुग्राम साइबर सेल को भेजा गया था। यहां से मिली रिपोर्ट के आधार पर एसआईटी ने विवि के रजिस्ट्रार के निजी सचिव योगेंद्र, स्टेनो पवन और एक अन्य युवक दीपक को काबू किया है। दीपक चंडीगढ़ में रहता है।
विज्ञापन
कर्मियों के समर्थन में आई यूनियन
दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विवि की मिनिस्ट्रीयल स्टाफ वेलफेयर एसोसिएशन दोनों कर्मियों के समर्थन में आ गई हैं। एसोसिएशन के प्रधान आनंद राणा ने बताया कि मामले में आला अधिकारियों को बचाने के फेर में छोटे कर्मियों को फंसाया गया है। पुलिस यदि इस मामले में ईमानदारी से जांच करें तो कई अन्य की संलिप्तता सामने आएगी। पुलिस को सच्चाई और ईमानदारी से काम करना चाहिए।
रजिस्ट्रार ने कहा-नो कमेंट
मामले को लेकर रजिस्ट्रार केपी सिंह से बातचीत की गई तो उन्होंने मामले में कुछ भी कहने से मना कर दिया। उन्होंने नो-कमेंट कहते हुए फोन काट दिया।
पुलिस ने मामले में तीन आरोपियों को काबू किया है। उन्हें अदालत ने जेल भेज दिया है। मामले की जांच की जा रही है।
संदीप धनखड़, एसआईटी प्रभारी, सोनीपत।