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धनतेरस पर छंटेगा कोरोना का ग्रहण, सजे बाजार
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धनतेरस पर्व के लिए भगवान कुबेर व भगवान धन्वंतरि की मूर्तियां खरीदतीं युवती व महिला। संवाद
- फोटो : Sonipat
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दीपों के पर्व दिवाली की शुरुआत धनतेरस के साथ हो जाती है, जो पांच दिन तक चलती है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मंगलवार को धनतेरस पर्व विशेष योग में मनाया जाएगा। चिटाने वाली माता मंदिर के पुजारी पंडित अमित शौनक ने बताया कि धनतेरस के दिन विशेष नक्षत्रों व कालखंड के संयोग से त्रिपुष्कर योग बन रहा है, जो 2 नवंबर सुबह 8:35 से 3 नवंबर सुबह 7:14 बजे तक रहेगा। इस योग में जो भी कार्य किया जाता है, उसका तीन गुना फल प्राप्त होता है। त्रिपुष्कर योग के अलावा अमृत योग भी बन रहा है, जो नई वस्तुओं की खरीदारी के लिए उत्तम माना गया है। यह योग धनतेरस के दिन सुबह 10:30 से दोपहर 1:30 बजे तक रहेगा। बाजार पूरी तरह तैयार हो चुके हैं। कोरोना काल के बाद से व्यापार पर लगा ग्रहण इस धनतेरस पर धुल सकता है। इस बार करोड़ों का व्यापार होने के आसार हैं। व्यापारियों को भी धनतेरस पर खूब धन बरसने की उम्मीद है।
बर्तन और आभूषण खरीदना रहेगा शुभ
पंडित अमित शौनक ने बताया कि धनतेरस के दिन माता लक्ष्मी, भगवान कुबेर और भगवान धन्वंतरि की पूजा का विधान है। मान्यता है कि धनतेरस के दिन क्षीर सागर के मंथन के दौरान ही मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर प्रकट हुए थे। इस कारण धनतेरस के दिन बर्तन व आभूषण खरीदना शुभ माना जाता है। धनतेरस पर्व को लेकर बाजार पूरी तरह गुलजार हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को समुद्र मंथन से धन्वंतरि प्रकट हुए। उस समय उनके हाथों में अमृत से भरा कलश था। धन्वंतरि के कलश लेकर प्रकट होने के कारण ही इस दिन बर्तन खरीदने की परंपरा है। इस दिन विशेषकर पीतल व चांदी के बर्तन खरीदने चाहिए, क्योंकि पीतल महर्षि धन्वंतरि की धातु है।
धनतेरस की पूजा विधि
पंडित शौनक ने बताया कि संध्याकाल में पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। पूजा के स्थान पर उत्तर दिशा की तरफ भगवान कुबेर व धन्वंतरि की मूर्ति स्थापित कर उनकी पूजा करनी चाहिए। इनके साथ ही माता लक्ष्मी व भगवान श्रीगणेश की पूजा का विधान है। मान्यता है कि भगवान कुबेर को सफेद मिठाई, जबकि धन्वंतरि को पीली मिठाई का भोग लगाना चाहिए, क्योंकि धन्वंतरि को पीली वस्तु अधिक प्रिय है। पूजा में फूल, फल, चावल, रोली, चंदन, धूप व दीप का प्रयोग करना फलदायक रहता है।
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ये चीजें खरीदना रहेगा शुभ
पंडित शौनक ने बताया कि धनतेरस पर कलश, हल्दी की गांठ, झाड़ू खरीदना बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि धनतेरस के दिन घर की सफाई नई झाड़ू से करनी चाहिए। इसलिए इस दिन नई झाड़ू खरीदना शुभ माना जाता है। इस दिन सोना-चांदी, धातु के बर्तन खरीदना भी शुभ माना जाता है। इस दिन अगर बर्तन लाते हैं तो उन्हें खाली नहीं रखना चाहिए, पूजा से पहले उनमें जल, चावल या दूसरी सामग्री भरकर रखें।
धनतेरस के साथ शुरू होगा पंचपर्व
-02 नवंबर : धनतेरस पर भगवान कुबेर व आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि की पूजा होगी। यह दिन सोना, सिक्का, बर्तन, आभूषण की खरीदारी के लिए शुभ रहता है।
-03 नवंबर : रूप चौदस हस्त नक्षत्र, चित्रा नक्षत्र व प्रीति योग में मनाई जाएगी।
-04 नवंबर : दीपों का पर्व दिवाली मनाई जाएगी।
-05 नवंबर : गोवर्धन पूजा होगी।
-06 नवंबर : भाई दूज का पर्व मनाया जाएगा।
धनतेरस का शुभ मुहूर्त
-त्रयोदशी तिथि आरंभ : 02 नवंबर को सुबह 11.31 बजे
-त्रयोदशी तिथि समाप्त : 03 नवंबर को सुबह 9:03 बजे
-धनतेरस पूजा मुहूर्त : शाम 7:12 से रात 8:50 बजे तक
-शुभ का चौघड़िया : दोपहर बाद 2:50 से शाम 4:14 बजे तक
-लाभ का चौघड़िया : शाम 7:12 से रात 8:50 बजे तक
-खरीदारी के लिए मुहूर्त : शुभ व लाभ के चौघड़िया के साथ ही रात 10:30 से देर रात 12:06 बजे तक।
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बर्तन और आभूषण खरीदना रहेगा शुभ
पंडित अमित शौनक ने बताया कि धनतेरस के दिन माता लक्ष्मी, भगवान कुबेर और भगवान धन्वंतरि की पूजा का विधान है। मान्यता है कि धनतेरस के दिन क्षीर सागर के मंथन के दौरान ही मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर प्रकट हुए थे। इस कारण धनतेरस के दिन बर्तन व आभूषण खरीदना शुभ माना जाता है। धनतेरस पर्व को लेकर बाजार पूरी तरह गुलजार हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को समुद्र मंथन से धन्वंतरि प्रकट हुए। उस समय उनके हाथों में अमृत से भरा कलश था। धन्वंतरि के कलश लेकर प्रकट होने के कारण ही इस दिन बर्तन खरीदने की परंपरा है। इस दिन विशेषकर पीतल व चांदी के बर्तन खरीदने चाहिए, क्योंकि पीतल महर्षि धन्वंतरि की धातु है।
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धनतेरस की पूजा विधि
पंडित शौनक ने बताया कि संध्याकाल में पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। पूजा के स्थान पर उत्तर दिशा की तरफ भगवान कुबेर व धन्वंतरि की मूर्ति स्थापित कर उनकी पूजा करनी चाहिए। इनके साथ ही माता लक्ष्मी व भगवान श्रीगणेश की पूजा का विधान है। मान्यता है कि भगवान कुबेर को सफेद मिठाई, जबकि धन्वंतरि को पीली मिठाई का भोग लगाना चाहिए, क्योंकि धन्वंतरि को पीली वस्तु अधिक प्रिय है। पूजा में फूल, फल, चावल, रोली, चंदन, धूप व दीप का प्रयोग करना फलदायक रहता है।
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ये चीजें खरीदना रहेगा शुभ
पंडित शौनक ने बताया कि धनतेरस पर कलश, हल्दी की गांठ, झाड़ू खरीदना बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि धनतेरस के दिन घर की सफाई नई झाड़ू से करनी चाहिए। इसलिए इस दिन नई झाड़ू खरीदना शुभ माना जाता है। इस दिन सोना-चांदी, धातु के बर्तन खरीदना भी शुभ माना जाता है। इस दिन अगर बर्तन लाते हैं तो उन्हें खाली नहीं रखना चाहिए, पूजा से पहले उनमें जल, चावल या दूसरी सामग्री भरकर रखें।
धनतेरस के साथ शुरू होगा पंचपर्व
-02 नवंबर : धनतेरस पर भगवान कुबेर व आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि की पूजा होगी। यह दिन सोना, सिक्का, बर्तन, आभूषण की खरीदारी के लिए शुभ रहता है।
-03 नवंबर : रूप चौदस हस्त नक्षत्र, चित्रा नक्षत्र व प्रीति योग में मनाई जाएगी।
-04 नवंबर : दीपों का पर्व दिवाली मनाई जाएगी।
-05 नवंबर : गोवर्धन पूजा होगी।
-06 नवंबर : भाई दूज का पर्व मनाया जाएगा।
धनतेरस का शुभ मुहूर्त
-त्रयोदशी तिथि आरंभ : 02 नवंबर को सुबह 11.31 बजे
-त्रयोदशी तिथि समाप्त : 03 नवंबर को सुबह 9:03 बजे
-धनतेरस पूजा मुहूर्त : शाम 7:12 से रात 8:50 बजे तक
-शुभ का चौघड़िया : दोपहर बाद 2:50 से शाम 4:14 बजे तक
-लाभ का चौघड़िया : शाम 7:12 से रात 8:50 बजे तक
-खरीदारी के लिए मुहूर्त : शुभ व लाभ के चौघड़िया के साथ ही रात 10:30 से देर रात 12:06 बजे तक।