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Sonipat News: गर्मी में बच्चे हो रहे बीमार, अस्पताल में दवा तक नहीं
Mon, 29 Apr 2024 11:36 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Mon, 29 Apr 2024 11:36 PM IST
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सोनीपत। गर्मी में बच्चे बीमार पड़ने लगे हैं। नागरिक अस्पताल की ओपीडी में इन दिनों खांसी, जुकाम, बुखार, उल्टी व दस्त से पीड़ित बच्चों को लेकर परिजन पहुंच रहे हैं लेकिन उन्हें जरूरी दवाएं नहीं मिल रही हैं। अस्पताल में बच्चों को दी जाने वाली पीसीएम सिरप और सालबुटामोल सिरप करीब दस दिन से खत्म है। ऐसे में परिजनों को बाहर मेडिकल स्टोरों से दवा खरीदनी पड़ रही है।
गर्मी बढ़ने से सबसे ज्यादा दिक्कत छोटे बच्चों को हो रही है। जिला नागरिक अस्पताल में पहले बच्चों की ओपीडी 150 तक होती थी, अब इनकी संख्या बढ़कर 250 से ज्यादा हो चुकी है। सबसे अधिक बच्चे उल्टी-दस्त व बुखार से पडि़त हो रहे हैं। छह माह से कम उम्र के बच्चे भी बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। अस्पताल में दवाओं का टोटा होने से कारण अभिभावकों को परेशानी हो रही है। बुखार में प्रयुक्त पीसीएम सिरप से लेकर सालबुटामोल सिरप तक नहीं है। वहीं चिकित्सक अभिभावकों को बच्चों को गर्मी से बचाने और उन्हें संतुलित आहार देने का सुझाव अभिभावकों को दे रहे हैं।
बोतल से दूध पिलाना बड़ी समस्या
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विशाल सैनी बताते हैं कि अधिकांश बच्चों के बीमार होने की वजह बोतल से दूध पिलाना है। बोतल साफ न होने से भी समस्या बढ़ती है। वहीं बाजार की तली चीजें, फास्ट फूड खाने, साफ पानी न पीने से भी बच्चे बीमार पड़ रहे हैं। आंखों के नीचे गड्ढा, होंठ, तालू व मुंह सूखना, पेशाब कम या गाढ़ा आना, अधिक प्यास लगना, त्वचा सिकुड़ना खतरे के मुख्य लक्षण हैं। बच्चा यदि सुस्त हो और खाना-पीना छोड़ दे तो तुरंत चिकित्सक को दिखाएं। नवजात शिशु को केवल मां का दूध पिलाएं।
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वर्जन
अस्पताल में बीमार नौनिहाल की ओपीडी में इजाफा हुआ है। बच्चों के उपचार के लिए जरूरी दवाओं की खरीद करने के लिए निर्देश दिए हैं ताकि जिससे अभिभावकों को बाहर से दवाओं की खरीद न करनी पड़े।-डॉ. जयकिशोर, सिविल सर्जन, सोनीपत।
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गर्मी बढ़ने से सबसे ज्यादा दिक्कत छोटे बच्चों को हो रही है। जिला नागरिक अस्पताल में पहले बच्चों की ओपीडी 150 तक होती थी, अब इनकी संख्या बढ़कर 250 से ज्यादा हो चुकी है। सबसे अधिक बच्चे उल्टी-दस्त व बुखार से पडि़त हो रहे हैं। छह माह से कम उम्र के बच्चे भी बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। अस्पताल में दवाओं का टोटा होने से कारण अभिभावकों को परेशानी हो रही है। बुखार में प्रयुक्त पीसीएम सिरप से लेकर सालबुटामोल सिरप तक नहीं है। वहीं चिकित्सक अभिभावकों को बच्चों को गर्मी से बचाने और उन्हें संतुलित आहार देने का सुझाव अभिभावकों को दे रहे हैं।
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बोतल से दूध पिलाना बड़ी समस्या
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विशाल सैनी बताते हैं कि अधिकांश बच्चों के बीमार होने की वजह बोतल से दूध पिलाना है। बोतल साफ न होने से भी समस्या बढ़ती है। वहीं बाजार की तली चीजें, फास्ट फूड खाने, साफ पानी न पीने से भी बच्चे बीमार पड़ रहे हैं। आंखों के नीचे गड्ढा, होंठ, तालू व मुंह सूखना, पेशाब कम या गाढ़ा आना, अधिक प्यास लगना, त्वचा सिकुड़ना खतरे के मुख्य लक्षण हैं। बच्चा यदि सुस्त हो और खाना-पीना छोड़ दे तो तुरंत चिकित्सक को दिखाएं। नवजात शिशु को केवल मां का दूध पिलाएं।
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वर्जन
अस्पताल में बीमार नौनिहाल की ओपीडी में इजाफा हुआ है। बच्चों के उपचार के लिए जरूरी दवाओं की खरीद करने के लिए निर्देश दिए हैं ताकि जिससे अभिभावकों को बाहर से दवाओं की खरीद न करनी पड़े।-डॉ. जयकिशोर, सिविल सर्जन, सोनीपत।