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Sonipat News: चंचल ने एशियन यूथ बॉक्सिंग में जीता रजत
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फोटो :14: सोनीपत के न्यू तारा नगर में विजेता खिलाड़ी चंचल का स्वागत करते परिजन व अन्य। स्रोत परि
सोनीपत। न्यू तारा नगर की रहने वाले मुक्केबाज चंचल ने श्रीलंका के कोलंबो में इंटरनेशनल बॉक्सिंग एसोसिएशन (आईबीए) की तरफ से आयोजित एशियन यूथ बॉक्सिंग चैंपियनशिप में रजत पदक जीता है। गौरवमयी उपलब्धि से चंचल ने जिले व प्रदेश के साथ देश का नाम रोशन किया है। घर पहुंचने पर बेटी का शानदार स्वागत किया गया।
प्रशिक्षक संदीप मलिक ने बताया कि चंचल दिल्ली के अलीपुर स्थित मुक्केबाजी अकादमी में प्रशिक्षण ले रही है। उन्होंने बताया कि 10 से 24 मई तक श्रीलंका के कोलंबो में हुई प्रतियोगिता में चंचल ने बेहतर प्रदर्शन किया। हालांकि, वह स्वर्ण पदक से वंचित रह गई। उसके बावजूद चंचल ने बेहतरीन मुक्केबाजी का प्रदर्शन किया।
वह इससे पहले नेशनल में प्रतिभागिता करने के साथ ही राज्य स्तर पर स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। चंचल की कहानी केवल जीत की नहीं, संघर्ष और आत्मविश्वास की भी है। उनके पिता ऑटो रिक्शा चालक हैं, लेकिन आर्थिक परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपनी बेटी के सपनों को उड़ान दी। वह कड़ी मेहनत कर इस मुकाम तक पहुंचीं हैं।
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चंचल की उपलब्धि के बाद जब वह अपने घर न्यू तारा नगर पहुंचीं तो उनका शानदार स्वागत किया गया। सनरूफ कार में बैठाकर परिजनों, पड़ोसियों और खेल प्रेमियों ने उनका फूल-मालाओं और ढोल-नगाड़ों के साथ स्वागत किया। चंचल ने कहा मेरे पिता ने अपनी मेहनत से मेरा हर सपना पूरा करने की कोशिश की, आज का पदक उन्हीं को समर्पित है।
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प्रशिक्षक संदीप मलिक ने बताया कि चंचल दिल्ली के अलीपुर स्थित मुक्केबाजी अकादमी में प्रशिक्षण ले रही है। उन्होंने बताया कि 10 से 24 मई तक श्रीलंका के कोलंबो में हुई प्रतियोगिता में चंचल ने बेहतर प्रदर्शन किया। हालांकि, वह स्वर्ण पदक से वंचित रह गई। उसके बावजूद चंचल ने बेहतरीन मुक्केबाजी का प्रदर्शन किया।
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वह इससे पहले नेशनल में प्रतिभागिता करने के साथ ही राज्य स्तर पर स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। चंचल की कहानी केवल जीत की नहीं, संघर्ष और आत्मविश्वास की भी है। उनके पिता ऑटो रिक्शा चालक हैं, लेकिन आर्थिक परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपनी बेटी के सपनों को उड़ान दी। वह कड़ी मेहनत कर इस मुकाम तक पहुंचीं हैं।
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चंचल की उपलब्धि के बाद जब वह अपने घर न्यू तारा नगर पहुंचीं तो उनका शानदार स्वागत किया गया। सनरूफ कार में बैठाकर परिजनों, पड़ोसियों और खेल प्रेमियों ने उनका फूल-मालाओं और ढोल-नगाड़ों के साथ स्वागत किया। चंचल ने कहा मेरे पिता ने अपनी मेहनत से मेरा हर सपना पूरा करने की कोशिश की, आज का पदक उन्हीं को समर्पित है।