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किसानों ने कुंडली बॉर्डर पर मनाया गुरू गोबिंद सिंह का प्रकाशोत्सव

Thu, 21 Jan 2021 01:47 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 21 Jan 2021 01:47 AM IST
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Celebration of Guru Gobind Singh on Kundali Border
कुंडली बॉर्डर धरना स्थल पर निकाले गए नगर कीर्तन में शामिल पंज प्यारे व संगत। संवाद - फोटो : Sonipat
सोनीपत। कुंडली बॉर्डर पर कृषि कानूनों को रद्द करवाने की मांग को धरना दे रहे किसानों ने गुरु गोबिंद सिंह की जयंती के अवसर पर पर जीटी रोड पर सिंघु बॉर्डर से केजीपी-केएमपी जीरो प्वाइंट तक नगर कीर्तन निकाला। इस दौरान निहंगों ने गतका खेला तो जत्थेबंदियों ने गुरु गोविंद सिंह के संदेश को याद किया और त्याग और समर्पण की सीख दी।
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बुधवार को कुंडली बॉर्डर पर निकाले गए नगर कीर्तन के दौरान यह क्षेत्र मिनी पंजाब सा नजर आया। इस दौरान जगह-जगह गुरुबाणी, शबद कीर्तन व सिख गुरु गुरु गोबिंद सिंह की गौरवगाथा का गुणगान होता रहा। खास बात यह है कि सुबह 10 बजे से लेकर शाम 5 बजे तक बॉर्डर गुरुद्वारों की तरह दिखाई दिया। नगर कीर्तन में पूरा हुजूम उमड़ पड़ा। इस दौरान सिख युवाओं ने जहां व्यवस्था का जिम्मा संभाला तो वहीं निहंग श्रद्धालुओं ने घोड़ों के साथ करतब दिखाए। साथ ही तलवारबाजी कर बहादुरी का परिचय भी दिया। गुरु गोबिंद सिंह की बहादुरी से परिपूर्ण किस्से डिजिटल रूप से प्रस्तुत किए गए। इसके अलावा सिखों ने राहगीरों को प्रसाद वितरित किए। हर 500 मीटर की दूरी पर शबद कीर्तन हुआ, जिसमें महिला श्रद्धालुओं की भागीदारी रही तो वहीं, मुख्य मंच से भी गुरबाणी का पाठ लगातार चलता रहा। साथ ही पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब का की झांकी निकालकर सबकी भलाई की अरदास की गई।
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भाईचारे का दिया संदेश, बॉर्डर पर निकाली गई झांकी
गुरु गोबिंद सिंह की जयंती पर कुंडली बॉर्डर पर झांकी निकाली गई, जिसके माध्यम से न केवल एकता का परिचय दिया बल्कि भाईचारे की सीख भी दी गई। इस दौरान एक तरफ जहां सिख श्रद्धालु झांकी में शामिल रहे तो वहीं हरियाणा के युवाओं ने व्यवस्था का जिम्मा संभाला। प्रसाद तैयार करवाने से लेकर लंगरों तक खाद्य सामग्री पहुंचाने तक की कमान बुधवार को हरियाणा के युवाओं ने संभाली और सिख भाइयों को गुरबाणी व नगर कीर्तन में शामिल होने भेजा। सिख समुदाय के लोगों ने भी हरियाणा के युवाओं के सेवाभाव की जमकर सराहना की। नगर कीर्तन के दौरान भी लगातार भाईचारे का संदेश देते रहे।
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किसानों की मांग जल्द पूरी करने का किया आह्वान
गुरु गोबिंद सिंह की जयंती पर नगर कीर्तन की कमान संभाल रहे दास बलवंत सिंह ने कहा कि वह गुरु गोबिंद सिंह की बहादुरी को याद कर रहे हैं। बहादुरी की मिसाल गुरु गोबिंद सिंह ने औरंगजेब को नाकों चने चबवा दिए थे। गोबिंद सिंह ने औरंगजेब के नाम जबरनामा लिखकर चुनौती दी थी, उसी तरह यहां किसान अपने हकों के लिए हूकूमत के खिलाफ जबरनामा लिखने से नहीं चूकेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों के धैर्य की परीक्षा ले रही है लेकिन यह कौम गोबिंद सिंह की अनुयायी है, जिसने कभी पीछे हटना नहीं सीखा।

निहंगों के करतब देखने को उमड़ी भीड़
नगर कीर्तन में शामिल निहंगों ने जमकर बहादुरी व कौशल का प्रदर्शन किया। यहां घोड़ों पर करतब दिखाए गए तो तलवारबाजी भी प्रदर्शित की गई। निहंग बाबा दास राजाराम सिंह ने बताया कि उनके निहंग सदस्यों ने यहां पर जमकर बहादुरी दिखाई है। घोड़ों पर अनेक करतब व कलाबाजियों में सभी माहिर हैं। उन्होंने कहा कि सिख कौम ने सदा दूसरों की सेवा के लिए कुर्बानी दी है। अब वह अपने हकों के लिए लड़ रहे हैं। किसी भी सूरत में अपने हकों को लिए बिना यहां नहीं लौटेंगे। इस दौरान सिख श्रद्धालुओं में शामिल पंज प्यारों ने भी गुरु गोबिंद सिंह के जयकारे लगाए। बॉर्डर पर ही बनाए गए गुरूद्वारे में सभी के कल्याण की अरदास की गई।
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