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Sonipat News: अधिवक्ता से झड़प में अज्ञात पर मुकदमा, धरना खत्म
Tue, 12 Aug 2025 12:52 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Tue, 12 Aug 2025 12:52 AM IST
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फोटो :25: सोनीपत के गोहाना में मुकदमा दर्ज होने व हड़ताल खत्म करने की जानकारी देते अधिवक्ता। स्र
- फोटो : जाम
गोहाना। अधिवक्ताओं के साथ झड़प के मामले में शहर थाना ने मुकदमा दर्ज कर लिया है। मुकदमा अज्ञात के विरुद्ध दर्ज किया गया है। अधिवक्ताओं ने मुकदमा दर्ज होने पर सोमवार को धरना समाप्त कर कार्य स्थगन को वापस ले लिया है।
अधिवक्ताओं ने कहा कि निष्पक्ष जांच के लिए एसआईटी गठित की गई है। अब अधिवक्ता मंगलवार से अदालत में काम पर लौट आएंगे। अधिवक्ता कुलदीप कुमार ने शहर थाना में शिकायत देकर मुकदमा दर्ज कराया है।
एफआईआर के अनुसार उन्होंने शिकायत दी थी कि 4 अगस्त को उनके पास जूनियर अधिवक्ता अंकित ने कॉल कर बताया था कि कुछ पुलिसकर्मियों ने मुगलपुरा रोड पर उनके साथ मारपीट की है। उनको गाड़ी में डालकर ले जा रहे हैं। इसके बाद उनकी कॉल डिस्कनेक्ट हो गई थी।
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उन्होंने बार एसोसिएशन के अध्यक्ष संदीप पूनिया व अन्य अधिवक्ताओं को अवगत कराया था। रास्ते में पुलिसकर्मी अंकित को गाड़ी में बैठाए हुए मिले थे। इसके बाद उन समेत कई अधिवक्ता थाना पहुंचे। पुलिसकर्मियों से अंकित को उठाकर लाने के बारे में पूछा तो संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
अधिवक्ता मोबाइल से वीडियो बनाने लगे तो वहां मौजूद कर्मियों ने कॉल कर कई अन्य पुलिसकर्मियों को बुला लिया था। उनमें कई सादे कपड़ों में भी थे। अधिवक्ताओं से मोबाइल छीनकर धक्का-मुक्की की गई।
कुलदीप के अनुसार उस समेत पांच अधिवक्ताओं को पुलिसकर्मी धक्के मारते हुए थाने के अंदर ले गए और मारपीट कर हवालात में डाल दिया। इसके बाद एक पुलिस अधिकारी के कहने पर अधिवक्ताओं से मारपीट की गई। अधिवक्ताओं ने बाद में अस्पताल जाकर मेडिकल परीक्षण कराया। आरोप है कि अधिवक्ताओं के मोबाइल पुलिस के कब्जे में हैं।
मामले में अधिवक्ता मुकदमा दर्ज करने और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर 5 अगस्त से धरना देने के साथ वर्क सस्पेंड कर रहे थे। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष संदीप पूनिया और सचिव हेमंत शर्मा ने कहा कि मुकदमा दर्ज होने पर सोमवार को धरना खत्म कर दिया गया। उनका कहना है कि पुलिस अधिकारियों ने उनसे कहा है कि जांच के लिए एसआईटी गठित कर दी गई है।
पुलिस की प्राथमिक जांच में यह आया सामने
एसीपी कार्यालय से शिकायत मिलने पर पुलिस ने प्राथमिक जांच की। एफआईआर में जिक्र है कि जांच अधिकारी ने जब मेडिकल परीक्षण कराने वाले अधिवक्ताओं के बयान दर्ज करने की कोशिश की तो पता चला कि वह धरने पर हैं। वहां जाकर बयान लेने में शांति भंग हो सकती थी। सीसीटीवी फुटेज में यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि अधिवक्ताओं को लगी चोटें किसने मारी है। एमएलआर अध्ययन और सीसीटीवी फुटेज के अवलोकन से सामने आया कि पुलिसकर्मी चेकिंग के दौरान शक के आधार पर बाइक सवार तीन युवकों को थाने लेकर आए थे। थाने में पहले ही 15-20 अधिवक्ता मौजूद थे, जिन्होंने सरकारी गाड़ी से तीनों युवकों को छुड़वाने की कोशिश की और पुलिस कर्मियों से धक्का-मुक्की की। सुरक्षा के मद्देनजर तीनों युवकों पुलिस बैरक में ले जाया गया। वहां पर अधिवक्ता व अन्य व्यक्ति बैरक में घुस गए और हंगामा शुरू कर दिया। धक्का-मुक्की में एक पुलिस अधिकारी की वर्दी फट गई और उनको चोट भी लगी। बैरक में कौन-कौन व्यक्ति गए व किसने हाथापाई की इसके साक्ष्य जुटाकर जांच की जाएगी।
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अधिवक्ताओं ने कहा कि निष्पक्ष जांच के लिए एसआईटी गठित की गई है। अब अधिवक्ता मंगलवार से अदालत में काम पर लौट आएंगे। अधिवक्ता कुलदीप कुमार ने शहर थाना में शिकायत देकर मुकदमा दर्ज कराया है।
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एफआईआर के अनुसार उन्होंने शिकायत दी थी कि 4 अगस्त को उनके पास जूनियर अधिवक्ता अंकित ने कॉल कर बताया था कि कुछ पुलिसकर्मियों ने मुगलपुरा रोड पर उनके साथ मारपीट की है। उनको गाड़ी में डालकर ले जा रहे हैं। इसके बाद उनकी कॉल डिस्कनेक्ट हो गई थी।
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उन्होंने बार एसोसिएशन के अध्यक्ष संदीप पूनिया व अन्य अधिवक्ताओं को अवगत कराया था। रास्ते में पुलिसकर्मी अंकित को गाड़ी में बैठाए हुए मिले थे। इसके बाद उन समेत कई अधिवक्ता थाना पहुंचे। पुलिसकर्मियों से अंकित को उठाकर लाने के बारे में पूछा तो संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
अधिवक्ता मोबाइल से वीडियो बनाने लगे तो वहां मौजूद कर्मियों ने कॉल कर कई अन्य पुलिसकर्मियों को बुला लिया था। उनमें कई सादे कपड़ों में भी थे। अधिवक्ताओं से मोबाइल छीनकर धक्का-मुक्की की गई।
कुलदीप के अनुसार उस समेत पांच अधिवक्ताओं को पुलिसकर्मी धक्के मारते हुए थाने के अंदर ले गए और मारपीट कर हवालात में डाल दिया। इसके बाद एक पुलिस अधिकारी के कहने पर अधिवक्ताओं से मारपीट की गई। अधिवक्ताओं ने बाद में अस्पताल जाकर मेडिकल परीक्षण कराया। आरोप है कि अधिवक्ताओं के मोबाइल पुलिस के कब्जे में हैं।
मामले में अधिवक्ता मुकदमा दर्ज करने और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर 5 अगस्त से धरना देने के साथ वर्क सस्पेंड कर रहे थे। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष संदीप पूनिया और सचिव हेमंत शर्मा ने कहा कि मुकदमा दर्ज होने पर सोमवार को धरना खत्म कर दिया गया। उनका कहना है कि पुलिस अधिकारियों ने उनसे कहा है कि जांच के लिए एसआईटी गठित कर दी गई है।
पुलिस की प्राथमिक जांच में यह आया सामने
एसीपी कार्यालय से शिकायत मिलने पर पुलिस ने प्राथमिक जांच की। एफआईआर में जिक्र है कि जांच अधिकारी ने जब मेडिकल परीक्षण कराने वाले अधिवक्ताओं के बयान दर्ज करने की कोशिश की तो पता चला कि वह धरने पर हैं। वहां जाकर बयान लेने में शांति भंग हो सकती थी। सीसीटीवी फुटेज में यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि अधिवक्ताओं को लगी चोटें किसने मारी है। एमएलआर अध्ययन और सीसीटीवी फुटेज के अवलोकन से सामने आया कि पुलिसकर्मी चेकिंग के दौरान शक के आधार पर बाइक सवार तीन युवकों को थाने लेकर आए थे। थाने में पहले ही 15-20 अधिवक्ता मौजूद थे, जिन्होंने सरकारी गाड़ी से तीनों युवकों को छुड़वाने की कोशिश की और पुलिस कर्मियों से धक्का-मुक्की की। सुरक्षा के मद्देनजर तीनों युवकों पुलिस बैरक में ले जाया गया। वहां पर अधिवक्ता व अन्य व्यक्ति बैरक में घुस गए और हंगामा शुरू कर दिया। धक्का-मुक्की में एक पुलिस अधिकारी की वर्दी फट गई और उनको चोट भी लगी। बैरक में कौन-कौन व्यक्ति गए व किसने हाथापाई की इसके साक्ष्य जुटाकर जांच की जाएगी।