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बार विवाद : पूर्व प्रधान समेत तीन अधिवक्ताओं पर अनुशासनात्मक कार्रवाई के प्रस्ताव पारित

Sun, 05 Jul 2026 04:51 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत Updated Sun, 05 Jul 2026 04:51 AM IST
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Bar Dispute: Resolutions passed for disciplinary action against three advocates, including a former president.
फोटो : सोनीपत में जिला बार एसोसिएशन की जनरल हाउस की बैठक को संबो​धित करते प्रधान कमल हुड्डा। स
संवाद न्यूज एजेंसी
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सोनीपत। जिला बार एसोसिएशन में लंबे समय से चल रहा विवाद अब चरम पर पहुंच गया है। शनिवार को आयोजित जनरल हाउस की बैठक में विशेष जांच समिति की रिपोर्ट पर विस्तार से चर्चा के बाद पूर्व प्रधान समेत तीन अधिवक्ताओं के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई से जुड़े प्रस्ताव पारित किए गए। बैठक की अध्यक्षता बार प्रधान कमल हुड्डा ने की।
बैठक का मुख्य एजेंडा स्पेशल इंक्वायरी कमेटी की रिपोर्ट पर विचार-विमर्श करना था। समिति के अध्यक्ष एडवोकेट अनूप सिंह दहिया ने अपनी रिपोर्ट सदन के समक्ष प्रस्तुत की जिस पर चर्चा के बाद विभिन्न प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।
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बैठक में उपप्रधान सोनू भारद्वाज को आरोपों में दोषी मानते हुए उन्हें बार से डी-बार करने तथा 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाने का प्रस्ताव पारित किया गया। वहीं, पूर्व प्रधान अनिल ढुल पर बार रिकॉर्ड छिपाने, पद के कथित दुरुपयोग और बार निधि में कथित अनियमितताओं के आरोपों को आधार बनाते हुए उन्हें डी-बार करने, दो लाख रुपये का जुर्माना लगाने और 32.35 लाख रुपये की रिकवरी की संस्तुति की गई।
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जनरल हाउस ने यह भी निर्णय लिया कि संबंधित मामलों में आवश्यक कार्रवाई के लिए पंजाब एवं हरियाणा बार काउंसिल को प्रैक्टिस लाइसेंस निरस्त करने की अनुशंसा भेजी जाएगी। साथ ही आरोपों के आधार पर एफआईआर दर्ज कराने का भी फैसला लिया गया।
बार की ओर से जारी विवरण में वरिष्ठ अधिवक्ता सुखबीर गुलिया पर बार काउंसिल ऑफ इंडिया और पंजाब एवं हरियाणा बार काउंसिल के निर्देशों की अवहेलना करने तथा बैठक के दौरान कथित रूप से अभद्र व्यवहार कर सदस्यों से बहिष्कार की अपील करने के आरोप लगाए गए। इन आरोपों के आधार पर उन्हें डी-बार करने और 21 हजार रुपये का जुर्माना लगाने का प्रस्ताव पारित किया गया।

अनुशासन और पारदर्शिता से कोई समझौता नहीं : कमल हुड्डा
बार प्रधान कमल हुड्डा ने कहा कि संस्था न्यायिक मूल्यों, पारदर्शिता, जवाबदेही और अधिवक्ताओं की गरिमा बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। बार के हितों के विरुद्ध किसी भी प्रकार की अनियमितता अथवा अनुशासनहीनता को भविष्य में भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


फैसलों पर विवाद, गुलिया का वॉकआउट और ढुल का पलटवार
बैठक के दौरान प्रस्तावित कार्रवाई का विरोध करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सुखबीर गुलिया ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई । बाद में उन्होंने वॉकआउट कर दिया। वहीं, पूर्व प्रधान अनिल ढुल ने जनरल हाउस की बैठक और उसमें लिए गए सभी निर्णयों को असांविधानिक करार दिया। उन्होंने दावा किया कि बार के संविधान के अनुसार सोनू भारद्वाज ही वैध प्रधान हैं। कमल हुड्डा के प्रधान पद का मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में लंबित है जिसकी अगली सुनवाई 28 जुलाई को होनी है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जांच समिति का गठन और उसकी रिपोर्ट न्यायिक प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है। उनके खिलाफ निजी रंजिश के चलते कार्रवाई की जा रही है। ढुल ने कहा कि उनके कार्यकाल में बार की समस्त धनराशि सुरक्षित रखी गई थी और उसे फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश किया गया था। अनिल ढुल ने आरोप लगाया कि जांच समिति के अध्यक्ष स्वयं पहले वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों में डी-बार हो चुके हैं, इसलिए उनके नेतृत्व में गठित समिति वैध नहीं मानी जा सकती। वहीं, उपप्रधान सोनू भारद्वाज ने कहा कि बैठक के दौरान जो आरोपी लगाए गए हैं, वह निराधार है। इन आरोपों को लेकर वह अपील में जाएंगे।
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