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Sonipat News: अंजू ने रसायन शास्त्र को खेल और कविता से बनाया सरल
Fri, 05 Sep 2025 02:07 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Fri, 05 Sep 2025 02:07 AM IST
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फोटो 24- सोनीपत के राजकीय विद्यालय में विज्ञान विषय पर प्रतियोगिता की प्रतिभागी छात्राओं के साथ
सोनीपत। गुरुओं के मॉटिवेशन से सेक्टर-23 निवासी 41 वर्षीय रसायन शास्त्र शिक्षिका अंजू दहिया 17 वर्ष से बच्चों को सफलता की राह दिखा रही हैं। उन्होंने रसायन शास्त्र विषय को खेल, कविता जैसी गतिविधियों से बच्चों के लिए आसान बनाया। बचपन से पढ़ाई के साथ अभिनव का शौक रखने वाली अंजू छात्राओं को भी सांस्कृतिक कार्यक्रमों का हिस्सा बना रही हैं। पर्वतारोही का प्रशिक्षण पाकर बच्चों को शैक्षिक भ्रमण पर ले जाकर उनका ज्ञान बढ़ा रही हैं।
अंजू में हमेशा कुछ नया करने की इच्छा जागृत होती है। शिक्षिका के रूप में नियुक्ति पाने के बाद हमेशा विद्यार्थियों की समस्या को समझा। इन्हीं उपलब्धियों व शिक्षा के क्षेत्र में सराहनीय कार्य करने पर उन्हें सितंबर 2022 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया था।
गांव भटगांव के राजकीय कन्या विद्यालय में कार्यरत रसायन शास्त्र की शिक्षिका विद्यालय में निशुल्क पुस्तकालय का संचालन कर विद्यार्थियाें को प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार कर रही हैं। विद्यार्थियों के लिए भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान सहित प्रतिस्पर्धी 500 पुस्तकें रखीं गई हैं जिन्हें निशुल्क मुहैया करवाती हैं।
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वर्ष 2024 में 20 व 2025 में 17 विद्यार्थियों ने इन्हीं पुस्तकों के सहारे अच्छे पदों पर नौकरियां मिली हैं। अंजू दहिया ने बताया कि विद्यार्थियों के साथ बातचीत कर उनकी समस्याओं का निवारण करना उन्हें अच्छा लगता है। विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रदर्शनी, प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताएं करवा रही हैं।
सफल शिक्षिका के तौर पर कॅरिअर
गांव तिहाड़ा में 22 मार्च 1984 को रणवीर सिंह व विजय लक्ष्मी के घर जन्मी अंजू दहिया ने वर्ष 2008 में गेस्ट लेक्चरर के तौर पर गोहाना के राजकीय कन्या विद्यालय से अपने शिक्षिका कॅरिअर की शुरुआत की। दिसंबर 2013 से अगस्त 2014 तक इन्होंने अकबरपुर बारोटा के राजकीय विद्यालय, सितंबर 2014 से अक्तूबर 2022 तक बड़वासनी के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में अपनी सेवाएं दीं। अक्तूबर 2022 से 30 दिसंबर 2024 तक थाना कलां के राजकीय विद्यालय में बच्चों का मार्गदर्शन किया। आज वह भटगांव के राजकीय कन्या विद्यालय में कार्यरत हैं।
ओपी जोशी और केएल मिश्रा बने मार्गदर्शक
अंजू दहिया ने बताया कि उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा भिवानी के वैश्य मॉडल वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय से पूर्ण की। यहीं से उन्हें प्राचार्य ओपी जोशी व शिक्षक केएल मिश्रा का मार्गदर्शन मिला। उनसे प्रेरणा मिलने के बाद वह शिक्षिका के तौर पर बच्चों का भविष्य संवारने की ठानी। इसके बाद रोहतक स्थित एमडीयू से बीएससी, बीएड, एमएससी, एमफिल की पढ़ाई पूर्ण की।
भारतीय शिक्षा का विदेश में किया प्रचार
भारतीय शिक्षा व्यवस्था का अंजू दहिया ने विदेश में भी प्रचार-प्रसार किया। उन्होंने वर्ष 2022 में उज्बेकिस्तान में 15 दिन तक रहकर वहां के लोगों को भारतीय शिक्षा व्यवस्था के बारे में प्रेरित किया था। शोध पत्र भी प्रस्तुत किए। भिवानी में स्कूली पढ़ाई के दौरान ही उन्हें अभिनव प्रयोग (इनोवेटिव आइडिया) के माध्यम से आगे बढ़ने का मौका मिला जिसे वह विद्यार्थियों के साथ साझा कर रही हैं।
प्रदेशभर के विद्यार्थियों का संदेह किया दूर
लॉकडाउन में ऑनलाइन कक्षा लगाई। विद्यार्थियों के लिए विषय संबंधी वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाले। सुविधा के लिए क्यूआर कोड भी बनाया। इससे प्रदेशभर के विद्यार्थी अपने संदेह को दूर सकते थे। इनका लक्ष्य ग्रामीण अंचल की बेटियों को उच्च शिक्षा दिलाकर उनका भविष्य उज्ज्वल बनाना है। वर्ष 2024 में अंजू दहिया के नेतृत्व में 8 बच्चों ने विज्ञान ड्रामा स्पर्धा में जिलास्तर पर प्रथम स्थान पाया लेकिन प्रदेशस्तर पर विद्यार्थी कोई पुरस्कार प्राप्त नहीं कर पाए।
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अंजू में हमेशा कुछ नया करने की इच्छा जागृत होती है। शिक्षिका के रूप में नियुक्ति पाने के बाद हमेशा विद्यार्थियों की समस्या को समझा। इन्हीं उपलब्धियों व शिक्षा के क्षेत्र में सराहनीय कार्य करने पर उन्हें सितंबर 2022 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया था।
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गांव भटगांव के राजकीय कन्या विद्यालय में कार्यरत रसायन शास्त्र की शिक्षिका विद्यालय में निशुल्क पुस्तकालय का संचालन कर विद्यार्थियाें को प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार कर रही हैं। विद्यार्थियों के लिए भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान सहित प्रतिस्पर्धी 500 पुस्तकें रखीं गई हैं जिन्हें निशुल्क मुहैया करवाती हैं।
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वर्ष 2024 में 20 व 2025 में 17 विद्यार्थियों ने इन्हीं पुस्तकों के सहारे अच्छे पदों पर नौकरियां मिली हैं। अंजू दहिया ने बताया कि विद्यार्थियों के साथ बातचीत कर उनकी समस्याओं का निवारण करना उन्हें अच्छा लगता है। विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रदर्शनी, प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताएं करवा रही हैं।
सफल शिक्षिका के तौर पर कॅरिअर
गांव तिहाड़ा में 22 मार्च 1984 को रणवीर सिंह व विजय लक्ष्मी के घर जन्मी अंजू दहिया ने वर्ष 2008 में गेस्ट लेक्चरर के तौर पर गोहाना के राजकीय कन्या विद्यालय से अपने शिक्षिका कॅरिअर की शुरुआत की। दिसंबर 2013 से अगस्त 2014 तक इन्होंने अकबरपुर बारोटा के राजकीय विद्यालय, सितंबर 2014 से अक्तूबर 2022 तक बड़वासनी के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में अपनी सेवाएं दीं। अक्तूबर 2022 से 30 दिसंबर 2024 तक थाना कलां के राजकीय विद्यालय में बच्चों का मार्गदर्शन किया। आज वह भटगांव के राजकीय कन्या विद्यालय में कार्यरत हैं।
ओपी जोशी और केएल मिश्रा बने मार्गदर्शक
अंजू दहिया ने बताया कि उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा भिवानी के वैश्य मॉडल वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय से पूर्ण की। यहीं से उन्हें प्राचार्य ओपी जोशी व शिक्षक केएल मिश्रा का मार्गदर्शन मिला। उनसे प्रेरणा मिलने के बाद वह शिक्षिका के तौर पर बच्चों का भविष्य संवारने की ठानी। इसके बाद रोहतक स्थित एमडीयू से बीएससी, बीएड, एमएससी, एमफिल की पढ़ाई पूर्ण की।
भारतीय शिक्षा का विदेश में किया प्रचार
भारतीय शिक्षा व्यवस्था का अंजू दहिया ने विदेश में भी प्रचार-प्रसार किया। उन्होंने वर्ष 2022 में उज्बेकिस्तान में 15 दिन तक रहकर वहां के लोगों को भारतीय शिक्षा व्यवस्था के बारे में प्रेरित किया था। शोध पत्र भी प्रस्तुत किए। भिवानी में स्कूली पढ़ाई के दौरान ही उन्हें अभिनव प्रयोग (इनोवेटिव आइडिया) के माध्यम से आगे बढ़ने का मौका मिला जिसे वह विद्यार्थियों के साथ साझा कर रही हैं।
प्रदेशभर के विद्यार्थियों का संदेह किया दूर
लॉकडाउन में ऑनलाइन कक्षा लगाई। विद्यार्थियों के लिए विषय संबंधी वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाले। सुविधा के लिए क्यूआर कोड भी बनाया। इससे प्रदेशभर के विद्यार्थी अपने संदेह को दूर सकते थे। इनका लक्ष्य ग्रामीण अंचल की बेटियों को उच्च शिक्षा दिलाकर उनका भविष्य उज्ज्वल बनाना है। वर्ष 2024 में अंजू दहिया के नेतृत्व में 8 बच्चों ने विज्ञान ड्रामा स्पर्धा में जिलास्तर पर प्रथम स्थान पाया लेकिन प्रदेशस्तर पर विद्यार्थी कोई पुरस्कार प्राप्त नहीं कर पाए।