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Sonipat News: विद्यार्थियों की 50 करोड़ की फंड राशि में अनियमितता का आरोप, राज्यपाल को भेजी शिकायत
Wed, 30 Jul 2025 01:40 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Wed, 30 Jul 2025 01:40 AM IST
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सोनीपत। मुरथल स्थित दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं तकनीकी विश्वविद्यालय (डीसीआरयूएसटी) में विद्यार्थियों के फंड में से 50 करोड़ रुपये की कथित अनियमितता का गंभीर आरोप लगाया है। एक छात्र ने राज्यपाल एवं कुलाधिपति को शिकायत पत्र भेजकर विश्वविद्यालय प्रशासन पर वित्तीय अनियमितता व निजी बैंकों को लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया है।
आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने बिना किसी पारदर्शिता के विद्यार्थियाें के फंड से जुड़ी 50 करोड़ की राशि का दुरुपयोग किया है। यह राशि विभिन्न बैंकों में फिक्स डिपॉजिट रिसीट (एफडीआर) के रूप में लगाई गई थी। इसमें कई प्रक्रियात्मक अनियमितताएं बरती गईं। जब विवि प्रशासन ने आरोपों को मनघड़ंत बताया तो शिकायतकर्ता ने विवि प्रशासन से 15 सवाल उठाते हुए जवाब मांगा।
शिकायत में बताया गया कि पहले फंड राशि को अलग-अलग बैंकों में एफडीआर के रूप में जमा कराया गया। इन एफडीआर की मैच्योरिटी के बाद राशि न तो नवीनीकृत की गई, न ही मूल बैंक खातों में वापस ट्रांसफर की गई। 30 करोड़ रुपये की एफडीआर राशि को बिना किसी स्वीकृति के आईसीआईसीआई बैंक में स्थानांतरित कर दिया गया।
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20 करोड़ रुपये की एफडीआर, जो आईसीआईसीआई बैंक में थी, उसे नवीनीकृत नहीं किया गया, जबकि बाकी बैंकों ने अपने एफडीआर स्वत: नवीनीकृत किए।
स्वतंत्र जांच एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराने की मांग
छात्र ने अपनी पहचान उजागर करने पर अपना कॅरिअर खराब करने का हवाला दिया है। साथ ही राज्यपाल से मामले की स्वतंत्र जांच एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है ताकि फंड का दुरुपयोग रोका जा सके। छात्र का आरोप है कि यदि यह राशि 7.95 फीसदी की एफडीआर दर पर जमा रहती तो विश्वविद्यालय को 1.32 करोड़ रुपये ब्याज मिलता। अब सिर्फ 54 लाख रुपये के करीब ही ब्याज प्राप्त हुआ है। इससे करीब 78.33 लाख रुपये का सीधा नुकसान छात्र फंड को हुआ। आरोप है कि जब स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के अधिकारी मामले में बातचीत के लिए रजिस्ट्रार व वीसी के पास पहुंचे तो उन्हें मिलने नहीं दिया गया।
छात्र के आरोपों में सच्चाई नहीं है। फंड राशि की फिलहाल एफडी नहीं कराई गई, पूरा पैसा ऑटो एफडी में है। इसके लिए कार्य जारी है। रेट तक को मंजूरी नहीं मिली है। एफडी केनरा बैंक में थी, जहां पर मैच्योर होने के बाद सेविंग खाते में आ गई, जहां पर ब्याज दर साढ़े 3 फीसदी था। विवि की कुछ एफडी आईसीआईसीआई बैंक में थी तो वहां पर पैसा ट्रांसफर कर दिया गया, ताकि ब्याज का नुकसान न हो। रेट फाइनल होने के बाद ही एफडी करवाई जाएगी।
- संजय कुमार, वित्त प्रमुख, मुरथल विश्वविद्यालय
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आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने बिना किसी पारदर्शिता के विद्यार्थियाें के फंड से जुड़ी 50 करोड़ की राशि का दुरुपयोग किया है। यह राशि विभिन्न बैंकों में फिक्स डिपॉजिट रिसीट (एफडीआर) के रूप में लगाई गई थी। इसमें कई प्रक्रियात्मक अनियमितताएं बरती गईं। जब विवि प्रशासन ने आरोपों को मनघड़ंत बताया तो शिकायतकर्ता ने विवि प्रशासन से 15 सवाल उठाते हुए जवाब मांगा।
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शिकायत में बताया गया कि पहले फंड राशि को अलग-अलग बैंकों में एफडीआर के रूप में जमा कराया गया। इन एफडीआर की मैच्योरिटी के बाद राशि न तो नवीनीकृत की गई, न ही मूल बैंक खातों में वापस ट्रांसफर की गई। 30 करोड़ रुपये की एफडीआर राशि को बिना किसी स्वीकृति के आईसीआईसीआई बैंक में स्थानांतरित कर दिया गया।
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20 करोड़ रुपये की एफडीआर, जो आईसीआईसीआई बैंक में थी, उसे नवीनीकृत नहीं किया गया, जबकि बाकी बैंकों ने अपने एफडीआर स्वत: नवीनीकृत किए।
स्वतंत्र जांच एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराने की मांग
छात्र ने अपनी पहचान उजागर करने पर अपना कॅरिअर खराब करने का हवाला दिया है। साथ ही राज्यपाल से मामले की स्वतंत्र जांच एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है ताकि फंड का दुरुपयोग रोका जा सके। छात्र का आरोप है कि यदि यह राशि 7.95 फीसदी की एफडीआर दर पर जमा रहती तो विश्वविद्यालय को 1.32 करोड़ रुपये ब्याज मिलता। अब सिर्फ 54 लाख रुपये के करीब ही ब्याज प्राप्त हुआ है। इससे करीब 78.33 लाख रुपये का सीधा नुकसान छात्र फंड को हुआ। आरोप है कि जब स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के अधिकारी मामले में बातचीत के लिए रजिस्ट्रार व वीसी के पास पहुंचे तो उन्हें मिलने नहीं दिया गया।
छात्र के आरोपों में सच्चाई नहीं है। फंड राशि की फिलहाल एफडी नहीं कराई गई, पूरा पैसा ऑटो एफडी में है। इसके लिए कार्य जारी है। रेट तक को मंजूरी नहीं मिली है। एफडी केनरा बैंक में थी, जहां पर मैच्योर होने के बाद सेविंग खाते में आ गई, जहां पर ब्याज दर साढ़े 3 फीसदी था। विवि की कुछ एफडी आईसीआईसीआई बैंक में थी तो वहां पर पैसा ट्रांसफर कर दिया गया, ताकि ब्याज का नुकसान न हो। रेट फाइनल होने के बाद ही एफडी करवाई जाएगी।
- संजय कुमार, वित्त प्रमुख, मुरथल विश्वविद्यालय