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Sonipat News: पॉक्सो के झूठे मामले में आरोपी को किया बरी
Tue, 28 Apr 2026 02:09 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Tue, 28 Apr 2026 02:09 AM IST
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सोनीपत। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश नरेंद्र की अदालत ने अपहरण और दुष्कर्म के एक मामले में आरोपी युवक अरुण को बरी किया है। अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि आरोपी को आपसी रंजिश और पैसों के लेन-देन के विवाद के चलते झूठे केस में फंसाया गया था।
राई थाना क्षेत्र के एक व्यक्ति ने 16 नवंबर 2024 को अपनी बेटी की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसकी बेटी पिछले चार दिन से गायब है। अगले दिन युवती ने पुलिस और मजिस्ट्रेट को बयान दिया कि जब वह अपने ताऊ के खाली मकान की छत पर थी तब अरुण नामक युवक ने उसे नशीला पदार्थ सुंघाकर बेहोश कर दिया।
युवती का आरोप था कि उसे पांच दिनों तक उसी घर में बगैर भोजन दिए और बेहोशी की अवस्था में बंधक बनाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद पुलिस ने 17 नवंबर 2024 को आरोपी अरुण को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
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सुनवाई के दौरान आरोपी अरुण के वकील ने युवती और उसके पिता के बयानों में भारी विरोधाभास उजागर किया। युवती ने कोर्ट में कभी छत पर फुटबॉल खेलने तो कभी घूमने की बात कही। युवती के पिता ने स्वीकार किया कि उन्होंने उस घर में भी तलाशी ली थी जहां युवती को बंधक बनाने का दावा किया गया था लेकिन वह वहां नहीं मिली।
चिकित्सा साक्ष्य ने मामले की दिशा पूरी तरह बदल दी। गवाही देने वाली महिला डॉक्टर ने स्पष्ट किया कि कोई भी व्यक्ति पांच दिनों तक बिना भोजन-पानी और बेहोशी की हालत में जीवित नहीं रह सकता। मेडिकल के दौरान युवती का वजन और स्वास्थ्य पूरी तरह सामान्य पाया गया जो उसके आरोपों को झूठा साबित करने के लिए पर्याप्त था।
सुनवाई में यह तथ्य भी सामने आया कि युवती के पिता ने आरोपी के पिता से पैसे उधार लिए थे। जब युवक पैसे वापस मांगने गया तो उसके खिलाफ यह झूठा मुकदमा दर्ज करवाया गया था।
16 माह बाद मिला न्याय:
युवक के अधिवक्ता लोकेश दहिया ने बताया कि इस झूठे मुकदमे के कारण निर्दोष युवक को 1 साल और 4 महीने जेल की सलाखों के पीछे गुजारने पड़े। आखिरकार साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने उसे निर्दोष करार देते हुए बाइज्जत बरी किया।
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राई थाना क्षेत्र के एक व्यक्ति ने 16 नवंबर 2024 को अपनी बेटी की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसकी बेटी पिछले चार दिन से गायब है। अगले दिन युवती ने पुलिस और मजिस्ट्रेट को बयान दिया कि जब वह अपने ताऊ के खाली मकान की छत पर थी तब अरुण नामक युवक ने उसे नशीला पदार्थ सुंघाकर बेहोश कर दिया।
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युवती का आरोप था कि उसे पांच दिनों तक उसी घर में बगैर भोजन दिए और बेहोशी की अवस्था में बंधक बनाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद पुलिस ने 17 नवंबर 2024 को आरोपी अरुण को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
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सुनवाई के दौरान आरोपी अरुण के वकील ने युवती और उसके पिता के बयानों में भारी विरोधाभास उजागर किया। युवती ने कोर्ट में कभी छत पर फुटबॉल खेलने तो कभी घूमने की बात कही। युवती के पिता ने स्वीकार किया कि उन्होंने उस घर में भी तलाशी ली थी जहां युवती को बंधक बनाने का दावा किया गया था लेकिन वह वहां नहीं मिली।
चिकित्सा साक्ष्य ने मामले की दिशा पूरी तरह बदल दी। गवाही देने वाली महिला डॉक्टर ने स्पष्ट किया कि कोई भी व्यक्ति पांच दिनों तक बिना भोजन-पानी और बेहोशी की हालत में जीवित नहीं रह सकता। मेडिकल के दौरान युवती का वजन और स्वास्थ्य पूरी तरह सामान्य पाया गया जो उसके आरोपों को झूठा साबित करने के लिए पर्याप्त था।
सुनवाई में यह तथ्य भी सामने आया कि युवती के पिता ने आरोपी के पिता से पैसे उधार लिए थे। जब युवक पैसे वापस मांगने गया तो उसके खिलाफ यह झूठा मुकदमा दर्ज करवाया गया था।
16 माह बाद मिला न्याय:
युवक के अधिवक्ता लोकेश दहिया ने बताया कि इस झूठे मुकदमे के कारण निर्दोष युवक को 1 साल और 4 महीने जेल की सलाखों के पीछे गुजारने पड़े। आखिरकार साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने उसे निर्दोष करार देते हुए बाइज्जत बरी किया।