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Sonipat News: खरना के साथ 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू, घाटों पर आज उमड़ेगा श्रद्धा का सैलाब

Thu, 07 Nov 2024 02:07 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत Updated Thu, 07 Nov 2024 02:07 AM IST
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36 hours waterless fast begins with Kharna, flood of devotees will flood the ghats today
फोटो 24- सोनीपत के नागरिक अस्पताल के ​शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. रविशंकर खरना पर पूजन करते हुए। स्रो
सोनीपत। सूर्योपासना के पर्व छठ के दूसरे दिन खरना में व्रतियों ने रोटी व खीर का प्रसाद बनाया। व्रतियों के प्रसाद ग्रहण करने के बाद इसे घर और आस-पड़ोस के लोगों को वितरित भी किया। घरों के अंदर महिलाओं ने छठ मइया के गीत भी गाए। पर्व के तीसरे दिन वीरवार को व्रती संध्याकाल में अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देंगे। पर्व को लेकर पुलिस ने भी सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त किए हैं। वहीं पर्व पर बाजार में रौनक छा रही। दिनभर खरीदारों की भीड़ जुटी रही।
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खरना का मतलब शुद्धिकरण, इसे लोहंडा भी कहा जाता है। इस दिन विशेष प्रसाद बनाने की परंपरा है। महिलाओं व व्रतियों ने सुबह स्नान कर साफ-सुथरे वस्त्र धारण किए। दिन भर व्रत रखा व शाम को मिट्टी के चूल्हे पर साठी के चावल और गुड़ की खीर बनाकर प्रसाद तैयार किया। सूर्य भगवान की पूजा के बाद व्रती महिलाओं ने प्रसाद ग्रहण किया। उनके खाने के बाद प्रसाद अन्य सदस्यों में बांटा गया। प्रसाद ग्रहण करने के साथ ही व्रती महिलाओं का 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू हो गया। मान्यता है कि खरना पूजा के बाद घर में देवी षष्ठी (छठी मैया) का आगमन हो जाता है।
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आज डूबते सूर्य को दिया जाएगा अर्घ्य
वीरवार को सूर्य उपासना के पर्व छठ का उल्लास चरम पर रहेगा। नदियों व तालाबों के किनारे छठ पूजन स्थलों पर आस्था का सैलाब उमड़ेगा। व्रती महिलाएं-पुरुष शाम को घाटों पर पहुंचकर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देकर संतान व परिवार की दीर्घायु व सुख समृद्धि की कामना करेंगे। घाट पर मेले जैसा नजारा रहेगा। वहीं पुरुष सिर पर बांस से बनी टोकरी में मौसमी फल रखकर घाट पर पहुंचेंगे और छठ मैया का पूजन करेंगे। डूबते सूर्य को अर्घ्य देने के समय उल्लास देखने लायक रहेगा। शुक्रवार सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ सभी व्रत का पारण करेंगे।
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यह है मान्यता
कार्तिक मास की षष्ठी को छठ मनाई जाती है। मान्यता है कि छठ पूजा के दौरान पूजी जाने वाली माता सूर्य भगवान की बहन हैं, इसलिए लोग सूर्य को अर्घ्य देकर छठ मैया को प्रसन्न करते हैं। पुराणों में मां दुर्गा के छठे स्वरूप कात्यायनी देवी को भी छठ माता का रूप माना जाता है। छठ मैया को संतान देने वाली माता के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि छठ पर्व संतान के लिए मनाया जाता है। वह जोड़े, जिन्हें संतान प्राप्ति नहीं हुई, वह छठ का व्रत रखते हैं। लोग अपने बच्चों की सुख-शांति के लिए छठ मनाते हैं।

खरीदारी करने के लिए उमड़ी भीड़

छठ महापर्व को लेकर बाजार में रौनक देखने को मिली। आस्था के इस महापर्व के मद्देनजर लोगों ने मिट्टी के बर्तन, कलश, घैला, दीया, ढकना, कोसी एवं डागरा, छैटा, सूप, सुपली, चगेली, टोकरी, रस्सी व फल खरीदे। महंगाई के चलते छठ पूजा का सामान भी महंगा हो गया है। पिछले साल की अपेक्षा इस बार 20 से 25 फीसदी तक दाम बढ़े हैं, जिससे बाजार में खरीदारी करने आए श्रद्धालु पहले की तरह खरीदारी नहीं कर सके।
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