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Sonipat News: 30 एड्स पीड़ित गर्भवती का कराया प्रसव, अभी तक नवजात संक्रमण मुक्त
Mon, 01 Dec 2025 01:59 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Mon, 01 Dec 2025 01:59 AM IST
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फोटो 14: सोनीपत के नागरिक अस्पताल में एचआईवी जांच के लिए महिला की सैंपलिंग करते स्वास्थ्य कर्मी
सोनीपत। जिले में इस वर्ष 30 एड्स पीड़ित गर्भवतियों का प्रसव कराया गया। इसमें खास बात है कि सभी नवजात अभी तक संक्रमण मुक्त हैं। एड्स पीड़ितों का इलाज आजीवन चलता है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से समय-समय पर लोगों को एड्स से बचाव के लिए सतर्कता बरतने की जानकारी दी जाती है।
जिले में 2,273 एड्स पीड़ित एंटी-रिट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) केंद्र से उपचार ले रहे हैं। इसके अलावा संक्रमितों से जन्मे नवजात को 18 माह तक स्वास्थ्य विभाग अपनी निगरानी में रखता है। वहीं स्वास्थ्य विभाग हर साल 75 हजार लोगों की सैंपलिंग करता है। चालू वित्त वर्ष में अब तक 73,056 लोगों की सैंपलिंग की जा चुकी है।
इसमें से 150 नए एड्स पीड़ित मिले हैं। किसी मरीज को एचआईवी की पुष्टि होते ही सबसे पहले उन्हें टीबी की स्क्रीनिंग के लिए भेजा जाता है। आईसीटीसी में मरीजों को टीबी के लिए कैट वन का कोर्स कराया जाता है। इसके बाद जब मरीजों में सुधार आना शुरू हो जाता है तो उसके बाद उसे एआरटी सेंटर भेजा जाता है।
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यहां मरीजों की सीडी फाॅर और वायरल लोड की जांच की जाती है। यदि मरीज का सीडी फाॅर 350 से 250 के बीच मिलता है तो पीड़ित मरीज को एआरटी की दवाई शुरू कर दी जाती है। इन मरीजों को टीबी और एआरटी की दवाई एक साथ चलती है। टीबी का कोर्स पूरा करने के बाद एआरटी की दवाई चलती रहती है।
एड्स नियंत्रण के लिए 2,273 लोगों को दी जा रही दवा
सोनीपत में एआरटी सेंटर की शुरुआत वर्ष 2018 में हुई। उस दौरान मात्र 500 मरीज दवाई ले रहे थे, लेकिन इतने कम समय में ही यह संख्या बढ़कर 2,273 तक पहुंच गई है। विभाग की ओर से एड्स नियंत्रण के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही लोगों को एड्स से बचाव के लिए जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है।
समय-समय पर एचआईवी पीड़ित मरीजों की काउंसिलिंग की जाती है। इन सेंटरों पर गर्भवती महिलाएं, टीबी के मरीज, हाई रिस्क ग्रुप व स्वैच्छिक जांच कराने वाले लोगों की गोपनीयता को पूर्ण रखते हुए उनको सभी सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही है।
एचआईवी पॉजिटिव होने के कुछ प्रमुख लक्षण
- लगातार वजन का घटना
- लगातार दस्त होना
- लगातार बुखार होना
- टीबी की बीमारी होना
- शरीर पर खाज, खुजली, त्वचा में संक्रमण होना
- हरपीज की बीमारी होना
- मुंह में छाले, जीभ पर फफूंदी आना
- गले में गांठ बनना
- गुर्दों व हृदय का संक्रमण
- दिमाग का संक्रमण
- सांस की बीमारी एवं निमोनिया
जिले में अब तक 2,273 एचआईवी संक्रमित उपचार ले रहे हैं। जिसमें से 150 नए मरीज चालू वित्त वर्ष में मिले हैं। लोगों को एड्स से बचाव के लिए समय-समय पर जागरूक किया जा रहा है। एचआईवी पॉजिटिव होने का पता लगने पर उपचार शुरू हो जाता है।
- डॉ. तरुण यादव, उप सिविल सर्जन
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जिले में 2,273 एड्स पीड़ित एंटी-रिट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) केंद्र से उपचार ले रहे हैं। इसके अलावा संक्रमितों से जन्मे नवजात को 18 माह तक स्वास्थ्य विभाग अपनी निगरानी में रखता है। वहीं स्वास्थ्य विभाग हर साल 75 हजार लोगों की सैंपलिंग करता है। चालू वित्त वर्ष में अब तक 73,056 लोगों की सैंपलिंग की जा चुकी है।
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इसमें से 150 नए एड्स पीड़ित मिले हैं। किसी मरीज को एचआईवी की पुष्टि होते ही सबसे पहले उन्हें टीबी की स्क्रीनिंग के लिए भेजा जाता है। आईसीटीसी में मरीजों को टीबी के लिए कैट वन का कोर्स कराया जाता है। इसके बाद जब मरीजों में सुधार आना शुरू हो जाता है तो उसके बाद उसे एआरटी सेंटर भेजा जाता है।
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यहां मरीजों की सीडी फाॅर और वायरल लोड की जांच की जाती है। यदि मरीज का सीडी फाॅर 350 से 250 के बीच मिलता है तो पीड़ित मरीज को एआरटी की दवाई शुरू कर दी जाती है। इन मरीजों को टीबी और एआरटी की दवाई एक साथ चलती है। टीबी का कोर्स पूरा करने के बाद एआरटी की दवाई चलती रहती है।
एड्स नियंत्रण के लिए 2,273 लोगों को दी जा रही दवा
सोनीपत में एआरटी सेंटर की शुरुआत वर्ष 2018 में हुई। उस दौरान मात्र 500 मरीज दवाई ले रहे थे, लेकिन इतने कम समय में ही यह संख्या बढ़कर 2,273 तक पहुंच गई है। विभाग की ओर से एड्स नियंत्रण के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही लोगों को एड्स से बचाव के लिए जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है।
समय-समय पर एचआईवी पीड़ित मरीजों की काउंसिलिंग की जाती है। इन सेंटरों पर गर्भवती महिलाएं, टीबी के मरीज, हाई रिस्क ग्रुप व स्वैच्छिक जांच कराने वाले लोगों की गोपनीयता को पूर्ण रखते हुए उनको सभी सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही है।
एचआईवी पॉजिटिव होने के कुछ प्रमुख लक्षण
- लगातार वजन का घटना
- लगातार दस्त होना
- लगातार बुखार होना
- टीबी की बीमारी होना
- शरीर पर खाज, खुजली, त्वचा में संक्रमण होना
- हरपीज की बीमारी होना
- मुंह में छाले, जीभ पर फफूंदी आना
- गले में गांठ बनना
- गुर्दों व हृदय का संक्रमण
- दिमाग का संक्रमण
- सांस की बीमारी एवं निमोनिया
जिले में अब तक 2,273 एचआईवी संक्रमित उपचार ले रहे हैं। जिसमें से 150 नए मरीज चालू वित्त वर्ष में मिले हैं। लोगों को एड्स से बचाव के लिए समय-समय पर जागरूक किया जा रहा है। एचआईवी पॉजिटिव होने का पता लगने पर उपचार शुरू हो जाता है।
- डॉ. तरुण यादव, उप सिविल सर्जन