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40 करोड़ का भुगतान न करने पर चीनी मिल पर जड़ा ताला
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40 करोड़ का भुगतान न करने पर चीनी मिल पर जड़ा ताला
-हरिद्वार की प्राइवेट चीनी मिल में गोहाना, सोनीपत व पानीपत के किसानों ने दिया था गन्ना
अमर उजाला ब्यूरो
गोहाना/सोनीपत। हरिद्वार स्थित प्राइवेट चीनी मिल द्वारा पिछले सीजन में गोहाना, सोनीपत और पानीपत के हजारों किसानों का गन्ना लेने के बाद 40 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं किया गया। पैसे का भुगतान नहीं होने पर गोहाना में भड़के किसानों ने प्रदर्शन किया और उसके बाद वहां पर पहुंच कर चीनी मिल के मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया। मिल के प्रबंधन द्वारा 31 मार्च पर पूरा भुगतान करने के आश्वासन पर शांत हुए।
किसान भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश उपाध्यक्ष सत्यवान नरवाल के नेतृत्व में गोहाना से मिल के लिए रवाना हुए। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017-18 में गन्ने का ज्यादा उत्पादन हुआ था जिससे स्थानीय मिल पूरा गन्ना नहीं ले पाई थीं। मजबूरी में किसानों को बचा गन्ना दूसरी चीनी मिलों को देना पड़ा था। गोहाना, सोनीपत और पानीपत के किसानों ने हरिद्वार के इकबालपुर गांव स्थित प्राइवेट मिल को भी गन्ना दिया। किसी भी गन्ना उत्पादक को अब तक उसके गन्ने के भुगतान में से कोई अदायगी नहीं की गई व सब किसानों का शत-प्रतिशत भुगतान बकाया खड़ा है। मिल ने किसानों की मजबूरी का नाजायज फायदा उठाया तथा 325 रुपये प्रति क्विंटल के घोषित मूल्य के प्रति 260 से 300 रुपये की दर से गन्ना खरीदा। उन्होंने कहा कि बार-बार मांग करने के बाद भी जब भुगतान नहीं दिया गया, तब शनिवार को किसान हरिद्वार पहुंच गए। गोहाना से भगत सिंह, वीरेंद्र, कृष्ण, सतीश, सुरेंद्र और जसबीर, पानीपत से अजीत देशवाल, जगमेर सिंह, संदीप और मंजीत, सोनीपत से जितेंद्र मलिक, सतीश, जोगेंद्र, रण सिंह आदि किसान गोहाना से इकबालपुर पहुंचे और ताला जड़ दिया। 31 मार्च तक पूरा भुगतान किए जाने का आश्वासन मिलने के बाद किसानों ने ताला खोला।
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-हरिद्वार की प्राइवेट चीनी मिल में गोहाना, सोनीपत व पानीपत के किसानों ने दिया था गन्ना
अमर उजाला ब्यूरो
गोहाना/सोनीपत। हरिद्वार स्थित प्राइवेट चीनी मिल द्वारा पिछले सीजन में गोहाना, सोनीपत और पानीपत के हजारों किसानों का गन्ना लेने के बाद 40 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं किया गया। पैसे का भुगतान नहीं होने पर गोहाना में भड़के किसानों ने प्रदर्शन किया और उसके बाद वहां पर पहुंच कर चीनी मिल के मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया। मिल के प्रबंधन द्वारा 31 मार्च पर पूरा भुगतान करने के आश्वासन पर शांत हुए।
किसान भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश उपाध्यक्ष सत्यवान नरवाल के नेतृत्व में गोहाना से मिल के लिए रवाना हुए। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017-18 में गन्ने का ज्यादा उत्पादन हुआ था जिससे स्थानीय मिल पूरा गन्ना नहीं ले पाई थीं। मजबूरी में किसानों को बचा गन्ना दूसरी चीनी मिलों को देना पड़ा था। गोहाना, सोनीपत और पानीपत के किसानों ने हरिद्वार के इकबालपुर गांव स्थित प्राइवेट मिल को भी गन्ना दिया। किसी भी गन्ना उत्पादक को अब तक उसके गन्ने के भुगतान में से कोई अदायगी नहीं की गई व सब किसानों का शत-प्रतिशत भुगतान बकाया खड़ा है। मिल ने किसानों की मजबूरी का नाजायज फायदा उठाया तथा 325 रुपये प्रति क्विंटल के घोषित मूल्य के प्रति 260 से 300 रुपये की दर से गन्ना खरीदा। उन्होंने कहा कि बार-बार मांग करने के बाद भी जब भुगतान नहीं दिया गया, तब शनिवार को किसान हरिद्वार पहुंच गए। गोहाना से भगत सिंह, वीरेंद्र, कृष्ण, सतीश, सुरेंद्र और जसबीर, पानीपत से अजीत देशवाल, जगमेर सिंह, संदीप और मंजीत, सोनीपत से जितेंद्र मलिक, सतीश, जोगेंद्र, रण सिंह आदि किसान गोहाना से इकबालपुर पहुंचे और ताला जड़ दिया। 31 मार्च तक पूरा भुगतान किए जाने का आश्वासन मिलने के बाद किसानों ने ताला खोला।
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