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गरीबों की जेब काटने व शहीद की विधवा की मौत के जिम्मेदार हॉस्पिटल के आगे लाचार अफसर
Updated Sun, 11 Mar 2018 12:32 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
सोनीपत। बिना आधार कारगिल शहीद की विधवा की मौत के मामले में सीएम के संज्ञान के बावजूद जांच के 72 दिन भी अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। हालांकि जिला प्रशासनिक स्तर पर निजी अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही सामने आ चुकी है। इसके बाद भी शासन स्तर पर फाइल पहुंचने के बावजूद सरकार के रवैये पर सवाल खड़ा कर रहा है। वहीं डीसी ने कहा कि शासन स्तर पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। अब जल्द से जल्द प्रशासनिक स्तर पर निजी अस्पताल प्रबंधन पर कार्रवाई की जाएगी।
गांव महलाना निवासी कारगिल शहीद लक्ष्मण दास की पत्नी शकुंतला को 29 दिसंबर 17 को बीमार होने पर दिल्ली रोड स्थित अस्पताल में ले जाया गया था। उनका बेटा पवन बाल्याण मां को लेकर अस्पताल पहुंचा था। जहां अस्पताल प्रबंधन ने उनसे आधार कार्ड की मांग की थी। आधार कार्ड की कॉपी मोबाइल में होने बावजूद शहीद की पत्नी को भर्ती नहीं किया गया था। पवन ने आरोप लगाया था कि उसकी सुनवाई नहीं हुई और समय पर इलाज न होने से मां की मौत हो गई थी। इस मामले में सीएम मनोहर लाल ने खुद संज्ञान लेकर जांच शुरू कराई थी और इसमें स्वास्थ्य विभाग के डायरेक्टर आदित्य चौधरी पूरी टीम के साथ जांच करने पहुंचे थे। वहां अधिकारियों ने जांच के बाद बताया था कि अस्पताल में उपचार के लिए आधार कार्ड मांगा गया था। इस तरह की बात सामने आने के बाद भी अस्पताल प्रबंधन पर कार्रवाई लटकी हुई है।
डेंगू बताकर मनमर्जी वसूली पर भी विभाग नहीं कर रहा कार्रवाई
लिवासपुर के रहने वाले किसान जगत सिंह ने अपने बेटे विजय को डेंगू की शिकायत होने पर सबसे पहले बहालगढ़ के अस्पताल में भर्ती कराया था, जहां उसे डेंगू बताकर दूसरे अस्पताल में लेकर जाने के लिए कहा गया था। उसके बाद 27 सितंबर 17 को किसान जगत सिंह ने अपने बेटे को दिल्ली रोड स्थित एक अस्पताल में भर्ती कराया था। उसका आरोप था कि उस अस्पताल में डॉक्टर उसके बेटे की कम प्लेटलेट्स बताकर इलाज करते रहे और उनसे लगातार रुपये लेते रहे। उस अस्पताल में उनका बेटा 3 अक्टूबर तक भर्ती रहा, लेकिन वह खुद ही घूमता-फिरता रहा और उसके बावजूद डॉक्टर उसकी प्लेटलेट्स केवल 5 हजार बताते रहे। इस तरह अस्पताल में केवल 6 दिन के साढ़े चार लाख रुपये का बिल भरवा लिया गया। इस तरह शक होने पर जब उन्होंने बेटे की जांच एक लैब पर कराई तो उसकी प्लेटलेट्स 51 हजार निकली। उसके बाद उसने बेटे का दूसरी जगह उपचार कराया और वह दो दिन में ठीक हो गया। जगत सिंह की इस शिकायत के आधार स्वास्थ्य विभाग की कमेटी ने मामले की जांच करके डीसी को रिपोर्ट सौंपी। जिसमें हॉस्पिटल की लापरवाही की बात सामने आई थी, लेकिन यह रिपोर्ट पिछले दो महीने से फाइलों में दबी पड़ी है।
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डीसी केएम पांडुरंग से सीधी बात
सवाल: डेंगू बताकर रुपये वसूलने वाले अस्पताल के मामले में क्या चल रहा है?
जवाब: उसकी जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट मिली थी, जिसमें लापरवाही सामने आई थी। उसकी फाइल शासन को भेजी थी।
सवाल: प्रशासन के स्तर से क्या कार्रवाई की गई है?
जवाब: उसमें कार्रवाई की संस्तुति करके उसी समय फाइल ऊपर भेजी थी। वहां का इंतजार नहीं करके अब मेरे स्तर से जल्द ही कार्रवाई की जाएगी।
सवाल: शहीद की विधवा का आधार के बिना उपचार नहीं करने वाले अस्पताल पर क्या कार्रवाई की गई?
जवाब: उसकी जांच सीएम स्तर से कराई गई थी और उसमें हमारा हस्तक्षेप नहीं था, लेकिन हमारी टीम उसमें शामिल थी। उसमें भी जल्द कार्रवाई कराई जाएगी।
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सोनीपत। बिना आधार कारगिल शहीद की विधवा की मौत के मामले में सीएम के संज्ञान के बावजूद जांच के 72 दिन भी अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। हालांकि जिला प्रशासनिक स्तर पर निजी अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही सामने आ चुकी है। इसके बाद भी शासन स्तर पर फाइल पहुंचने के बावजूद सरकार के रवैये पर सवाल खड़ा कर रहा है। वहीं डीसी ने कहा कि शासन स्तर पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। अब जल्द से जल्द प्रशासनिक स्तर पर निजी अस्पताल प्रबंधन पर कार्रवाई की जाएगी।
गांव महलाना निवासी कारगिल शहीद लक्ष्मण दास की पत्नी शकुंतला को 29 दिसंबर 17 को बीमार होने पर दिल्ली रोड स्थित अस्पताल में ले जाया गया था। उनका बेटा पवन बाल्याण मां को लेकर अस्पताल पहुंचा था। जहां अस्पताल प्रबंधन ने उनसे आधार कार्ड की मांग की थी। आधार कार्ड की कॉपी मोबाइल में होने बावजूद शहीद की पत्नी को भर्ती नहीं किया गया था। पवन ने आरोप लगाया था कि उसकी सुनवाई नहीं हुई और समय पर इलाज न होने से मां की मौत हो गई थी। इस मामले में सीएम मनोहर लाल ने खुद संज्ञान लेकर जांच शुरू कराई थी और इसमें स्वास्थ्य विभाग के डायरेक्टर आदित्य चौधरी पूरी टीम के साथ जांच करने पहुंचे थे। वहां अधिकारियों ने जांच के बाद बताया था कि अस्पताल में उपचार के लिए आधार कार्ड मांगा गया था। इस तरह की बात सामने आने के बाद भी अस्पताल प्रबंधन पर कार्रवाई लटकी हुई है।
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डेंगू बताकर मनमर्जी वसूली पर भी विभाग नहीं कर रहा कार्रवाई
लिवासपुर के रहने वाले किसान जगत सिंह ने अपने बेटे विजय को डेंगू की शिकायत होने पर सबसे पहले बहालगढ़ के अस्पताल में भर्ती कराया था, जहां उसे डेंगू बताकर दूसरे अस्पताल में लेकर जाने के लिए कहा गया था। उसके बाद 27 सितंबर 17 को किसान जगत सिंह ने अपने बेटे को दिल्ली रोड स्थित एक अस्पताल में भर्ती कराया था। उसका आरोप था कि उस अस्पताल में डॉक्टर उसके बेटे की कम प्लेटलेट्स बताकर इलाज करते रहे और उनसे लगातार रुपये लेते रहे। उस अस्पताल में उनका बेटा 3 अक्टूबर तक भर्ती रहा, लेकिन वह खुद ही घूमता-फिरता रहा और उसके बावजूद डॉक्टर उसकी प्लेटलेट्स केवल 5 हजार बताते रहे। इस तरह अस्पताल में केवल 6 दिन के साढ़े चार लाख रुपये का बिल भरवा लिया गया। इस तरह शक होने पर जब उन्होंने बेटे की जांच एक लैब पर कराई तो उसकी प्लेटलेट्स 51 हजार निकली। उसके बाद उसने बेटे का दूसरी जगह उपचार कराया और वह दो दिन में ठीक हो गया। जगत सिंह की इस शिकायत के आधार स्वास्थ्य विभाग की कमेटी ने मामले की जांच करके डीसी को रिपोर्ट सौंपी। जिसमें हॉस्पिटल की लापरवाही की बात सामने आई थी, लेकिन यह रिपोर्ट पिछले दो महीने से फाइलों में दबी पड़ी है।
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डीसी केएम पांडुरंग से सीधी बात
सवाल: डेंगू बताकर रुपये वसूलने वाले अस्पताल के मामले में क्या चल रहा है?
जवाब: उसकी जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट मिली थी, जिसमें लापरवाही सामने आई थी। उसकी फाइल शासन को भेजी थी।
सवाल: प्रशासन के स्तर से क्या कार्रवाई की गई है?
जवाब: उसमें कार्रवाई की संस्तुति करके उसी समय फाइल ऊपर भेजी थी। वहां का इंतजार नहीं करके अब मेरे स्तर से जल्द ही कार्रवाई की जाएगी।
सवाल: शहीद की विधवा का आधार के बिना उपचार नहीं करने वाले अस्पताल पर क्या कार्रवाई की गई?
जवाब: उसकी जांच सीएम स्तर से कराई गई थी और उसमें हमारा हस्तक्षेप नहीं था, लेकिन हमारी टीम उसमें शामिल थी। उसमें भी जल्द कार्रवाई कराई जाएगी।