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कृषि: 18 एकड़ में लगाया मौसमी, माल्टा और किन्नू का बाग, अब हो रही 32 लाख रुपये की सालाना कमाई

Sun, 03 Apr 2022 10:17 PM IST
भूपेंद्र सिंह नरेश बैनीवाल, संवाद न्यूज एजेंसी, चोपटा (सिरसा)
नरेश बैनीवाल, संवाद न्यूज एजेंसी, चोपटा (सिरसा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Sun, 03 Apr 2022 10:17 PM IST
सार

दोनों भाइयों ने अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाए रखने के लिए साल 2010 में 18 एकड़ बरानी जमीन में मौसमी माल्टा और किन्नू का बाग लगाया। पिछले वर्ष 9 एकड़ में अमरूद और माल्टा का बाग लगाकर कमाई का दायरा बढ़ाया।

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Two farmer brothers are earning profits from horticulture in Chaupata area of Sirsa
किसान ने लगाया फल का बाग - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

हरियाणा के सिरसा जिले के चोपटा क्षेत्र में अधिकतर जमीन रेतीली है। राज्य के अंतिम छोर पर पड़ने के कारण यहां की जमीन पर हमेशा ही सिंचाई के पानी की कमी रहती है। बरानी जमीन में खेती पूरी तरह बारिश पर निर्भर है। परंपरागत खेती से आमदनी नाममात्र होती है। ऐसे में गांव साहुवाला द्वितीय के 2 किसान भाइयों सुशील और सज्जन चाहर ने अतिरिक्त कमाई का जरिया खोजा। इसके लिए उन्होंने अपनी जमीन में बाग लगाया।

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दोनों भाइयों ने अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाए रखने के लिए साल 2010 में 18 एकड़ बरानी जमीन में मौसमी माल्टा और किन्नू का बाग लगाया। इससे परंपरागत कृषि के साथ-साथ अतिरिक्त आमदनी शुरू हो गई। अब दोनों भाइयों को करीब 32 लाख रुपये सालाना कमाई हो रही है। इन्होंने पिछले वर्ष भी 9 एकड़ जमीन में अमरूद और माल्टा का बाग लगा अपनी कमाई का दायरा बढ़ाया है।
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कुछ करने के जज्बे ने सुशील और सज्जन चाहर दोनों भाइयों को आसपास के गांवों में अलग पहचान दिलवाई है तथा इनके बाग को देखकर अन्य किसानों ने भी बाग लगाने शुरू किए हैं। दोनों भाई क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा देने का काम कर रहे हैं।
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बरानी और बंजर जमीन में कमाई कर बने आत्मनिर्भर
चाहर भाइयों ने बताया कि उनके गांव की अधिकतर जमीन पानी की कमी के कारण बरानी रह जाती है। उन्होंने पढ़ाई करने के बाद खेती की तरफ ध्यान दिया तो बरानी जमीन में सिंचाई के अभाव में फसल उत्पादन काफी कम होता था। उन्होंने इस जमीन में कम पानी से पैदावार लेने का फैसला किया। दोनों भाइयों ने कृषि विभाग अन्य संसाधनों से जानकारी लेकर 18 एकड़ में 12 साल पहले साल 2010 में बाग लगाया।

जिसमें 2 एकड़ में मौसमी और माल्टा का मिक्स बाग और 16 एकड़ में किन्नू का बाग लगाया। जिससे उन्हें तीन चार साल बाद कमाई होनी शुरू हो गई। उन्होंने पहली बार 12 लाख रुपये सालाना ठेके पर दिया। फिर 17 लाख रुपये और इस बार 32 लाख रुपये ठेके पर बाग को दे दिया। उन्होंने पिछले वर्ष 9 एकड़ में बाग और लगाया जिसमें 2 एकड़ में अमरूद और 7 एकड़ में माल्टा के पौधे लगाए।

 सुशील और सज्जन ने बताया कि सरकार के सहयोग से उन्होंने खेत में एक पानी की डिग्गी बना ली है उस डिग्गी में पानी एकत्रित करके रखते हैं। जब भी सिंचाई की जरूरत होती है तभी पौधों व फसलों में सिंचाई कर लेते हैं सिंचाई ड्रिप सिस्टम द्वारा की जाती है। जिससे पानी, खाद व दवाई सीधे पौधों को मिल जाती है और पानी बेकार नहीं जाता।


इसके साथ ही घरेलू उपयोग के लिए मौसमी सब्जियां भी वह अपने खेत में ही लगाते हैं कभी भी बाजार से नहीं लाते। उन्होंने बताया कि जिले में फ्रूट प्रोसेसिंग प्लांट और बड़ी मंडी न होने के कारण उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। फलों को दूर मंडियों में ले जाकर बेचने से यातायात खर्च भी ज्यादा होता है। जिससे बचत कम हो जाती है। उनका कहना है कि क्षेत्र में फ्रूट प्रोसेसिंग प्लांट और मंडी विकसित हो जाए तो यातायात खर्च कम होने से बचत ज्यादा हो जाएगी।

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