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Sirsa News: प्रदेश में लगातार तीसरी बार भाजपा की सरकार पर 25 साल बाद भी सिरसा में हाथ खाली
Wed, 09 Oct 2024 01:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Wed, 09 Oct 2024 01:04 AM IST
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माई सिटी रिपोर्टर
सिरसा। जिले की पांचों सीटों पर जनप्रतिनिधि चुने जा चुके हैं। अबकी बार कांग्रेस और इनेलो के लिए जिले में खुशी वाले पल आए हैं। दोनों दलों की 1-1 सीट बढ़ी है लेकिन जहां इनेलो ने पहली बार ऐलनाबाद की सीट गंवा दी। वहीं, कांग्रेस ने वर्ष 2019 में पहली बार जीती डबवाली सीट गंवा दी।
भाजपा ने जिले की चार सीटों पर चुनाव लड़ा था। सिरसा सीट से पार्टी प्रत्याशी रोहताश जांगड़ा ने पर्चा वापस ले लिया था। वर्ष 1996 के विधानसभा (विस) चुनाव में हरियाणा विकास पार्टी के साथ गठबंधन में भाजपा के टिकट से प्रो. गणेशीलाल सिरसा से विधायक बने थे। इसके बाद सिर्फ 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा का कमल खिला था। उस चुनाव में सुनीता दुग्गल ने कांग्रेस के अशोक तंवर को हराया था। भाजपा के पास जीत के सिर्फ यही दो मौके आए थे।
डबवाली सीट पर वर्ष 2009 में इनेलो के अजय सिंह चौटाला और वर्ष 2014 उनकी पत्नी नैना चौटाला जीते थे। करीब 28 साल बाद 2019 में कांग्रेस के अमित सिहाग यहां से चुनाव जीत गए। क्योंकि इनेलो दोफाड़ हो चुकी थी। वहीं पांच साल बाद फिर से इनेलो की वापसी हुई है। यहां पर इनेलो के आदित्य देवीलाल चुनाव जीते हैं। इस सीट पर कांग्रेस के गोवर्धन दास चौहान ने वर्ष 1982 में और 1991 में संतोष सारवान ने जीत दर्ज की थी।
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रानियां सीट पर भी वर्ष 2014 के बाद से इनेलो की वापसी हुई है। यहां से इनेलो के टिकट पर अर्जुन चौटाला ने जीत दर्ज की है। इससे पूर्व वर्ष 2019 में निर्दलीय के तौर पर अर्जुन चौटाला के दादा और पूर्व मुख्यमंत्री के छोटे भाई रणजीत सिंह ने दर्ज की थी। वहीं, कालांवाली सीट पर वर्ष 2009 और 2014 में शिरोमणि अकाली दल का कब्जा रहा। इस पर 2019 और 2024 में शीशपाल ने जीत दर्ज की है। वर्ष 2009 से पहले कालांवाली सीट नहीं थी। इसे 2007 के परिसीमन के बाद बनाया गया है।
ऐलनाबाद सीट पर 28 साल बाद कांग्रेस की वापसी
पहले आरक्षित रहकर बाद में सामान्य हुई ऐलनाबाद सीट पर पहले लोकदल फिर इनेलो का कब्जा रहा है। इस सीट पर 1991 में कांग्रेस के टिकट पर मनीराम जीते थे। उसके बाद से इस सीट पर फिर इनेलो का कब्जा रहा। वर्ष 1991 के बाद इस सीट पर 28 साल बाद 2024 में कांग्रेस ने दूसरी बार जीत दर्ज की है। इस आम चुनाव में अभय जीत के क्रम को जारी नहीं रख सके और कांग्रेस के भरत सिंह बैनीवाल से हार गए। कांग्रेस इस सीट पर दूसरी बार चुनाव जीती है। इस सीट के लिए वर्ष 1977 में पहली बार हुए चुनाव में जनता दल के भागीराम ने जीत दर्ज की है।
नाना के बाद अब दोहते काे मिला हाथ का साथ
इसी तरह सिरसा सीट पर कांग्रेस के टिकट पर विधायक चुने गए गोकुल सेतिया से पहले और कोई कांग्रेसी नहीं जीत सका। गोकुल से पूर्व सिर्फ उनके नाना लक्ष्मण दास अरोड़ा ही सिरसा सीट से चुनाव जीत पाए थे। वह अंतिम बार यहां से वर्ष 2005 में जीते थे। इसके बाद से वर्ष 2009 में निर्दलीय गोपाल कांडा, वर्ष 2014 में इनेलो के मक्खन लाल सिंगला, वर्ष 2019 में हलोपा से गोपाल कांडा और अब 2024 में कांग्रेस के टिकट पर गोकुल सेतिया विधायक चुने गए हैं।
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सिरसा। जिले की पांचों सीटों पर जनप्रतिनिधि चुने जा चुके हैं। अबकी बार कांग्रेस और इनेलो के लिए जिले में खुशी वाले पल आए हैं। दोनों दलों की 1-1 सीट बढ़ी है लेकिन जहां इनेलो ने पहली बार ऐलनाबाद की सीट गंवा दी। वहीं, कांग्रेस ने वर्ष 2019 में पहली बार जीती डबवाली सीट गंवा दी।
भाजपा ने जिले की चार सीटों पर चुनाव लड़ा था। सिरसा सीट से पार्टी प्रत्याशी रोहताश जांगड़ा ने पर्चा वापस ले लिया था। वर्ष 1996 के विधानसभा (विस) चुनाव में हरियाणा विकास पार्टी के साथ गठबंधन में भाजपा के टिकट से प्रो. गणेशीलाल सिरसा से विधायक बने थे। इसके बाद सिर्फ 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा का कमल खिला था। उस चुनाव में सुनीता दुग्गल ने कांग्रेस के अशोक तंवर को हराया था। भाजपा के पास जीत के सिर्फ यही दो मौके आए थे।
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डबवाली सीट पर वर्ष 2009 में इनेलो के अजय सिंह चौटाला और वर्ष 2014 उनकी पत्नी नैना चौटाला जीते थे। करीब 28 साल बाद 2019 में कांग्रेस के अमित सिहाग यहां से चुनाव जीत गए। क्योंकि इनेलो दोफाड़ हो चुकी थी। वहीं पांच साल बाद फिर से इनेलो की वापसी हुई है। यहां पर इनेलो के आदित्य देवीलाल चुनाव जीते हैं। इस सीट पर कांग्रेस के गोवर्धन दास चौहान ने वर्ष 1982 में और 1991 में संतोष सारवान ने जीत दर्ज की थी।
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रानियां सीट पर भी वर्ष 2014 के बाद से इनेलो की वापसी हुई है। यहां से इनेलो के टिकट पर अर्जुन चौटाला ने जीत दर्ज की है। इससे पूर्व वर्ष 2019 में निर्दलीय के तौर पर अर्जुन चौटाला के दादा और पूर्व मुख्यमंत्री के छोटे भाई रणजीत सिंह ने दर्ज की थी। वहीं, कालांवाली सीट पर वर्ष 2009 और 2014 में शिरोमणि अकाली दल का कब्जा रहा। इस पर 2019 और 2024 में शीशपाल ने जीत दर्ज की है। वर्ष 2009 से पहले कालांवाली सीट नहीं थी। इसे 2007 के परिसीमन के बाद बनाया गया है।
ऐलनाबाद सीट पर 28 साल बाद कांग्रेस की वापसी
पहले आरक्षित रहकर बाद में सामान्य हुई ऐलनाबाद सीट पर पहले लोकदल फिर इनेलो का कब्जा रहा है। इस सीट पर 1991 में कांग्रेस के टिकट पर मनीराम जीते थे। उसके बाद से इस सीट पर फिर इनेलो का कब्जा रहा। वर्ष 1991 के बाद इस सीट पर 28 साल बाद 2024 में कांग्रेस ने दूसरी बार जीत दर्ज की है। इस आम चुनाव में अभय जीत के क्रम को जारी नहीं रख सके और कांग्रेस के भरत सिंह बैनीवाल से हार गए। कांग्रेस इस सीट पर दूसरी बार चुनाव जीती है। इस सीट के लिए वर्ष 1977 में पहली बार हुए चुनाव में जनता दल के भागीराम ने जीत दर्ज की है।
नाना के बाद अब दोहते काे मिला हाथ का साथ
इसी तरह सिरसा सीट पर कांग्रेस के टिकट पर विधायक चुने गए गोकुल सेतिया से पहले और कोई कांग्रेसी नहीं जीत सका। गोकुल से पूर्व सिर्फ उनके नाना लक्ष्मण दास अरोड़ा ही सिरसा सीट से चुनाव जीत पाए थे। वह अंतिम बार यहां से वर्ष 2005 में जीते थे। इसके बाद से वर्ष 2009 में निर्दलीय गोपाल कांडा, वर्ष 2014 में इनेलो के मक्खन लाल सिंगला, वर्ष 2019 में हलोपा से गोपाल कांडा और अब 2024 में कांग्रेस के टिकट पर गोकुल सेतिया विधायक चुने गए हैं।