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Sirsa News: पिता की डबडबाई आंखें, बोले- एक बेटा तो गया अब दूसरे का सता रहा डर

Thu, 16 Jan 2025 11:32 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा Updated Thu, 16 Jan 2025 11:32 PM IST
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The father's eyes welled up with tears and he said, "One son is gone and now the fear of the other one is haunting me."
 घर पर शव के पास बैठकर विलाप करते गोरख के परिजन। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
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सिरसा/रोड़ी। जिले में नशा अधिकतर युवाओं की नशों में घुल गया है। जिले में दो माह में करीब नशे के कारण पांच मौतें हो चुकी हैं। बुधवार रात युवक गोरख (19) ने नशे की ओवरडोज के चलते दम तोड़ दिया। गोरख की मौत से पिता को गहरा सदमा लगा है। डबडबाई आंखों से पिता भोला सिंह बोले एक बेटा तो गया अब दूसरे का डर सताने लगा है कि कहीं नशे के चक्कर में न पड़ जाए। वहीं, दस दिन पहले ही परिजनों ने गोरख का नशा छुड़वाने व दवा दिलवाने के लिए एडीजीपी की नशामुक्ति टीम के पास फार्म भरवाया था।

मृतक गोरख के पिता भोला सिंह ने बताया कि टीम ने कहा था उसे कल शिविर में ले आना। नगारिक अस्पताल से दवा के लिए साथ लेकर चलेंगे। भोला सिंह ने बताया कि उनका बेटा गोरख नहीं माना और न ही उसके साथ गया। अब इस प्रकार लेटा हुआ है। छोटे बेटे का डर सता रहा है कि कहीं वह भी नशे के चक्कर में न पड़ जाए। नशे से युवक की मौत से गांव में मातम छाया हुआ है। ग्रामीणों की माने तो रोड़ी में नशा रोकने के लिए पुलिस ने प्रयास जरूर किए हैं, लेकिन अभी तक स्थिति नियंत्रण में नहीं है। युवाओं के लिए नशा काल बनता जा रहा है।
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मेडिकल नशा बन रहा है मौत का कारण



पंजाब के साथ लगते क्षेत्र में मेडिकल नशे और चिट्टे का असर ज्यादा है। पुलिस निरंतर कार्रवाई कर आरोपियों को गिरफ्तार कर रही है। मेडिकल नशा पुलिस के लिए सिरदर्द बना हुआ है। कुछ ऐसी दवाइयां है, जो एनडीपीएस एक्ट के तहत नहीं आती। मेडिकल नशा आसानी से युवाओं को उपलब्ध हो जाता है। इस कारण मेडिकल नशे से सबसे ज्यादा मौत हो रही हैं। नासमझ बच्चे कच्ची उम्र में ही नशे की लत में पड़ जाते हैं। गरीब परिवार के बच्चे बड़े स्तर पर मेडिकल नशे की जद में हैं। ये छोटी उम्र में पढ़ाई छोड़कर छोटे-मोटे काम करने लग जाते हैं। इस दौरान बुरी संगति में पड़कर वे नशे की चपेट में आ जाते हैं।
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यह तरीका है जानलेवा



चिकित्सकों के अनुसार मेडिकल नशा करने वाले युवा गोली का पाउडर बनाते हैं। इसके बाद उसे पानी में मिलाकर इंजेक्शन तैयार करते हैं। इसे सिरिंज में भरकर लगाते हैं। इस तरह से इंजेक्शन को लगाने से यह सीधे शरीर में अटैक करता है और पीड़ित की मौत हो जाती है।





पांच दिन से नहीं मिला था नशा

गोरख चिट्टे और मेडिकल दोनों तरह का नशा करता था। पांच दिनों से नशा नहीं मिलने के कारण उससे तलब उससे बर्दाश्त नहीं हुई। उसने घर का हर कोने को खंगाल लिया। इस दौरान उसे पुरानी गोलियां मिलीं। गोरख ने उसका इंजेक्शन बनाकर खुद को लगाया। इस दौरान डोज ज्यादा हो गई और उसे उल्टियां शुरू हो गई। इसके बाद उसकी मौत हो गई।

मृतक के पिता भोला सिंह ने बताया कि वह बाइक रेहड़ी से लोडिंग का काम करता है। उसका छोटा बेटा लवप्रीत सिंह आठवीं कक्षा में पढ़ता है। गोरख नौंवी कक्षा तक पढ़ा था। इसके बाद उसने पढ़ाई छोड़ दी और एक हलवाई के साथ काम करने लगा। इस दौरान उसे नशे की लत लग गई। कई बार समझाने का प्रयास किया, वह नहीं माना। नशा मुक्ति टीम भी उनकी घर आई थी। गोरख का फार्म भरवाया था, लेकिन गोरख इलाज के लिए नहीं गया। उसके दो बेटे थे। एक तो चला गया व एक पढ़ता है। डर यह लगा रहता कि दूसरा नशे की लत में न पड़ जाए।

मेडिकल नशे और चिट्टे को लेकर पुलिस की सख्त कार्रवाई जारी है। निरंतर दबिश देकर प्रतिबंधित दवा मिलने पर मेडिकल स्टोर सील किए जा रहे हैं। हमारी परिजनों से भी अपील है कि वह युवाओं पर विशेष ध्यान दें। उसकी गतिविधियां देखें और सख्ती बरतें। परिवार और समाज जब तक पुलिस का सहयोग नहीं करेगा। नशे को हराया नहीं जा सकता है। - विकास कृष्ण, डीएसपी, सिरसा।


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सरकार को चार साल लग गए हैं, यह मानने में की प्रदेश में चिट्टे का नशा है। मुख्यमंत्री के दावे के बावजूद कोई एक्शन नहीं होता है। एक युवक की और जान गई है। यह दुखद है। जिले में हर दस दिन में नशे से एक मौत हो रही है। गरीब परिवार के युवा बेरोजगार के कारण नशे का शिकार हो रहे हैं। नशामुक्त गांवों के नाम पर पारदर्शी लूट है। प्रोग्रामों पर बड़े स्तर पर पैसा खर्च हो रहा है, जबकि जिले का एक भी गांव नशामुक्त नहीं है। मेरा मानना है कि सता पक्ष हो या विपक्ष सभी को साथ मिलकर नशे के खिलाफ लड़ना चाहिए। पुलिस प्रशासन बड़े नशा तस्करों पर कार्रवाई करें।

- शीशपाल केहरवाला, विधायक, कालांवाली।
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