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भीड़ के सामने टैलेंट नहीं दिखा सका एशिया बुक ऑफ रिकार्ड में नाम दर्ज कराने वाला छात्र
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अपनी कला को लेकर एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज करवाने वाला एवं डिप्टी सीएम से सम्मानित होने वाला एक छात्र बडागुढ़ा में तर्कशील सोसायटी के सामने अपने टैलेंट का प्रदर्शन नहीं कर सका। दोनों पक्षों में करीब तीन घंटे तक कश्मकश चली। इसके बाद परिजन छात्र को लेकर आनन-फानन में वहां से निकल गए। परिजनों का कहना था कि उनके बेटे में ये टैलेंट है, लेकिन वह ज्यादा लोगों की उपस्थिति में नर्वस हो गया। वह फिर से अपनी कला का प्रदर्शन करके दिखा देगा। तर्कशील सोसायटी ने उक्त छात्र को चैलेंज करते हुए 5 लाख रुपये का इनाम रखा था।
गांव पंजुआना के एक निजी स्कूल में पढ़ने वाले गांव छतरियां निवासी साहिल कुमार का दावा था कि वह आंखों पर पट्टी बांधकर ताश के सभी पत्तों को पहचान सकता है। इस कला के दम पर साहिल का नाम एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज किया गया था, जिसमें साहिल ने आंखों पर पट्टी बांधकर ताश के सभी 52 पत्तों को 26 सैकेंड में पहचान लिया था। इसके बाद डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने भी साहिल को सम्मानित किया। तर्कशील सोसायटी कालांवाली ने उनके सामने कला का प्रदर्शन करने पर साहिल को 5 लाख रुपये इनाम देने का चैलेंज किया। प्रदर्शन की जगह गांव बडागुढ़ा में रखी गई। रविवार को पंजाब व कालांवाली तर्कशील सोसायटी के सदस्य व परिजन छात्र को लेकर पहुंच गए। मौके पर आस-पड़ोस के गांव से सरपंच व ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। मौजूदा व पूर्व सरपंचों की एक चार सदस्यीय कमेटी बनाई गई।
तीन घंटे की कश्मकश, नहीं कर पाया प्रदर्शन
तर्कशील सोसायटी के नियमानुसार साहिल के परिजनों ने चार सदस्यीय कमेटी को 10 हजार रुपये की सिक्योरिटी जमा करवाते हुए इकरारनामा भी साइन कर दिया। इसके बाद तर्कशील सोसायटी ने 5 लाख रुपये का चेक साहिल के नाम से कमेटी को जारी कर दिया। साहिल के पिता जीवन राम व अन्य लोगों ने ये कहा कि आंखों पर बांधी जाने वाली पट्टी तर्कशील की नहीं होगी। तर्कशील सोसायटी के सदस्यों ने लोगों से रुमाल लेकर छात्र के आंखों पर बांध दिया और ऊपर से तैराकी चश्मा पहना दिया। इसी बीच छात्र ने जब हाथों से रुमाल को छूना चाहा तो सोसायटी ने नियमानुसार ऐसा करने से मना कर दिया। छात्र के परिजन कड़ा एतराज जताते हुए उसे मंच से दूर ले गए। उन्होंने कहा कि उनके बेटे में टैलेंट है, लेकिन वह भीड़ देखकर नर्वस हो गया। इस बात पर काफी देर तक हंगामा होता रहा। इसी बीच परिजन आनन-फानन में छात्र को लेकर निकल गए। हालांकि उन्होंने कहा कि वे चैलेंज हारे नहीं है।
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ये असंभव है
पंजाब से तर्कशील सोसायटी के सदस्य राजेंद्र सिंह भदौड़ ने कहा कि वे ऐसे कई मामलों का पर्दाफाश कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि कुछ तथाकथित ट्रेनर बच्चों को दिमागी रूप से मजबूत करने का दावा करके उनके परिजनों को लूट रहे हैं। जबकि विज्ञान में ऐसा संभव ही नहीं है कि कोई व्यक्ति आंखें बंद कर पढ़ सके। ये सिर्फ एक ट्रिकबाजी है। आंखों पर बांधी जाने वाली पट्टी के नीचे से दिखाई देता है। भदौड़ ने एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड पर भी सवाल उठाए।
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गांव पंजुआना के एक निजी स्कूल में पढ़ने वाले गांव छतरियां निवासी साहिल कुमार का दावा था कि वह आंखों पर पट्टी बांधकर ताश के सभी पत्तों को पहचान सकता है। इस कला के दम पर साहिल का नाम एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज किया गया था, जिसमें साहिल ने आंखों पर पट्टी बांधकर ताश के सभी 52 पत्तों को 26 सैकेंड में पहचान लिया था। इसके बाद डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने भी साहिल को सम्मानित किया। तर्कशील सोसायटी कालांवाली ने उनके सामने कला का प्रदर्शन करने पर साहिल को 5 लाख रुपये इनाम देने का चैलेंज किया। प्रदर्शन की जगह गांव बडागुढ़ा में रखी गई। रविवार को पंजाब व कालांवाली तर्कशील सोसायटी के सदस्य व परिजन छात्र को लेकर पहुंच गए। मौके पर आस-पड़ोस के गांव से सरपंच व ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। मौजूदा व पूर्व सरपंचों की एक चार सदस्यीय कमेटी बनाई गई।
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तीन घंटे की कश्मकश, नहीं कर पाया प्रदर्शन
तर्कशील सोसायटी के नियमानुसार साहिल के परिजनों ने चार सदस्यीय कमेटी को 10 हजार रुपये की सिक्योरिटी जमा करवाते हुए इकरारनामा भी साइन कर दिया। इसके बाद तर्कशील सोसायटी ने 5 लाख रुपये का चेक साहिल के नाम से कमेटी को जारी कर दिया। साहिल के पिता जीवन राम व अन्य लोगों ने ये कहा कि आंखों पर बांधी जाने वाली पट्टी तर्कशील की नहीं होगी। तर्कशील सोसायटी के सदस्यों ने लोगों से रुमाल लेकर छात्र के आंखों पर बांध दिया और ऊपर से तैराकी चश्मा पहना दिया। इसी बीच छात्र ने जब हाथों से रुमाल को छूना चाहा तो सोसायटी ने नियमानुसार ऐसा करने से मना कर दिया। छात्र के परिजन कड़ा एतराज जताते हुए उसे मंच से दूर ले गए। उन्होंने कहा कि उनके बेटे में टैलेंट है, लेकिन वह भीड़ देखकर नर्वस हो गया। इस बात पर काफी देर तक हंगामा होता रहा। इसी बीच परिजन आनन-फानन में छात्र को लेकर निकल गए। हालांकि उन्होंने कहा कि वे चैलेंज हारे नहीं है।
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ये असंभव है
पंजाब से तर्कशील सोसायटी के सदस्य राजेंद्र सिंह भदौड़ ने कहा कि वे ऐसे कई मामलों का पर्दाफाश कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि कुछ तथाकथित ट्रेनर बच्चों को दिमागी रूप से मजबूत करने का दावा करके उनके परिजनों को लूट रहे हैं। जबकि विज्ञान में ऐसा संभव ही नहीं है कि कोई व्यक्ति आंखें बंद कर पढ़ सके। ये सिर्फ एक ट्रिकबाजी है। आंखों पर बांधी जाने वाली पट्टी के नीचे से दिखाई देता है। भदौड़ ने एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड पर भी सवाल उठाए।