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किन्नू उत्पादन में सिरसा प्रदेश में अव्वल, फिर भी किन्नू जोन नहीं हो पाया घोषित
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खेत में लगा किन्नू का बाग।
- फोटो : Sirsa
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सिरसा। किन्नू उत्पादन के मामले में सिरसा जिला अग्रणी माना जाता है। पिछले दो दशकों में यहां किन्नू का रकबा बढ़ने के साथ ही उत्पादन में भी इजाफा हुआ है। मौजूदा समय में यहां करीब 22 हजार एकड़ में किन्नू के बाग हैं। लेकिन विडंबना ही कहेंगे की इतने बड़े पैमाने पर उत्पादन होने के बावजूद जिले को अब तक किन्नू जोन घोषित नहीं किया गया है। देखा जाए तो हर वर्ष यहां किन्नू का रकबा बढ़ता ही जा रहा है। जिले में बागवानी करने वाले किसानों की भी यही मांग है कि सरकार इस जिले की तरफ ध्यान दे तो यह किन्नू जोन बन सकता है।
हर वर्ष होती है दो लाख 20 हजार टन किन्नू का उत्पादन
जिले में करीब 40 हजार एकड़ में फल व सब्जियों की खेती की जा रही है। जिनमें केवल 22 हजार एकड़ में सिर्फ किन्नू का बाग है। पिछले काफी समय से किसानों का पारंपरिक खेती को छोड़कर बागवानी की तरफ रुझान बढ़ा है। वैसे बागवानी करने के लिए सरकार की तरफ से किसानों को अनुदान भी दिया जाता है। वाटर टैंक से लेकर पौधे लगाए जाने तक सरकार अनुदान के रूप में सहायता राशि देती है। लेकिन किसानों की मांग है कि सरकार जिले को किन्नू जोन घोषित करे ताकि अन्य सुविधा किसानों को मिलने लगे। यहां उत्पादन होने वाले किन्नू की डिमांड सीमावर्ती राज्य पंजाब, राजस्थान, चंडीगढ़ व दिल्ली तक हैं। लेकिन विडंबना की बात है कि अभी तक सरकार का ध्यान सिरसा जिले की तरफ नहीं गया है, नहीं तो अब तक इसे किन्नू जोन घोषित कर दिया जाना चाहिए था। संवाद
किन्नू जोन बनने से फायदा
अगर जिले को किन्नू जोन बना दिया जाए तो यहां कई अन्य सुविधाएं स्थापित हो जाएंगी। वहीं सरकार का सारा ध्यान इस तरफ होगा और बागवानी की अनेक योजनाओं का सीधा लाभ किसानों का मिलेगा। वहीं प्राइवेट कंपनियां भी यहां उद्योग स्थापित करने में रूचि दिखाएगी। क्योंकि किन्नू से जूस से लेकर टॉफी व फ्लेवर तैयार किए जाते हैं। इसके साथ ही यहां के लोगों को रोजगार भी मिलेगा।
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अन्य फलों की भी हो रही बागवानी
यही नहीं कि यहां के किसानों की रुचि सिर्फ किन्नू में ही है। इसके अलावा यहां के किसान सब्जियां व अन्य फलों की बागवानी में भी कदम उठा रहे हैं। यहां करीब 12 हेक्टेयर में आम, 210 हेक्टेयर में अमरूद, आंवला व अंगूर की बागवानी की जा रही है।
किसानों के लिए चल रही भावांतर योजना
किन्नू उत्पादन करने वाले किसानों को सरकार की तरफ से भावांतर योजना का लाभ दिया जाता है। जिसके तहत जिन किसानों का किन्नू का भाव 11 रुपये से कम रहता है तो उन्हें 100 रुपये क्विंटल के हिसाब से दिया जाता है। वहीं 100 प्रतिशत प्राकृतिक आपदा से नुकसान होने पर 40 हजार रुपये की मुआवजा राशि दी जाती है। वहीं सब्जियों पर 30 हजार रुपये की मुआवजा राशि दी जाती है।
अगर जिले को किन्नू जोन बनाया जाता है तो इसका हर प्रकार से मूल्य बढ़ेगा और किसानों को लाभ भी मिलेगा। वहीं समय-समय पर किसानों का सरकार की तरफ से दी जाने वाली योजनाओं का लाभ दिया जाता रहता है। इसके अलावा बागवानी के लिए किसानों को जागरूक भी किया जाता है।
-डॉ. रघुवीर सिंह झोरड़, उद्यान विभाग अधिकारी।
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हर वर्ष होती है दो लाख 20 हजार टन किन्नू का उत्पादन
जिले में करीब 40 हजार एकड़ में फल व सब्जियों की खेती की जा रही है। जिनमें केवल 22 हजार एकड़ में सिर्फ किन्नू का बाग है। पिछले काफी समय से किसानों का पारंपरिक खेती को छोड़कर बागवानी की तरफ रुझान बढ़ा है। वैसे बागवानी करने के लिए सरकार की तरफ से किसानों को अनुदान भी दिया जाता है। वाटर टैंक से लेकर पौधे लगाए जाने तक सरकार अनुदान के रूप में सहायता राशि देती है। लेकिन किसानों की मांग है कि सरकार जिले को किन्नू जोन घोषित करे ताकि अन्य सुविधा किसानों को मिलने लगे। यहां उत्पादन होने वाले किन्नू की डिमांड सीमावर्ती राज्य पंजाब, राजस्थान, चंडीगढ़ व दिल्ली तक हैं। लेकिन विडंबना की बात है कि अभी तक सरकार का ध्यान सिरसा जिले की तरफ नहीं गया है, नहीं तो अब तक इसे किन्नू जोन घोषित कर दिया जाना चाहिए था। संवाद
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किन्नू जोन बनने से फायदा
अगर जिले को किन्नू जोन बना दिया जाए तो यहां कई अन्य सुविधाएं स्थापित हो जाएंगी। वहीं सरकार का सारा ध्यान इस तरफ होगा और बागवानी की अनेक योजनाओं का सीधा लाभ किसानों का मिलेगा। वहीं प्राइवेट कंपनियां भी यहां उद्योग स्थापित करने में रूचि दिखाएगी। क्योंकि किन्नू से जूस से लेकर टॉफी व फ्लेवर तैयार किए जाते हैं। इसके साथ ही यहां के लोगों को रोजगार भी मिलेगा।
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अन्य फलों की भी हो रही बागवानी
यही नहीं कि यहां के किसानों की रुचि सिर्फ किन्नू में ही है। इसके अलावा यहां के किसान सब्जियां व अन्य फलों की बागवानी में भी कदम उठा रहे हैं। यहां करीब 12 हेक्टेयर में आम, 210 हेक्टेयर में अमरूद, आंवला व अंगूर की बागवानी की जा रही है।
किसानों के लिए चल रही भावांतर योजना
किन्नू उत्पादन करने वाले किसानों को सरकार की तरफ से भावांतर योजना का लाभ दिया जाता है। जिसके तहत जिन किसानों का किन्नू का भाव 11 रुपये से कम रहता है तो उन्हें 100 रुपये क्विंटल के हिसाब से दिया जाता है। वहीं 100 प्रतिशत प्राकृतिक आपदा से नुकसान होने पर 40 हजार रुपये की मुआवजा राशि दी जाती है। वहीं सब्जियों पर 30 हजार रुपये की मुआवजा राशि दी जाती है।
अगर जिले को किन्नू जोन बनाया जाता है तो इसका हर प्रकार से मूल्य बढ़ेगा और किसानों को लाभ भी मिलेगा। वहीं समय-समय पर किसानों का सरकार की तरफ से दी जाने वाली योजनाओं का लाभ दिया जाता रहता है। इसके अलावा बागवानी के लिए किसानों को जागरूक भी किया जाता है।
-डॉ. रघुवीर सिंह झोरड़, उद्यान विभाग अधिकारी।