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स्टाफ का टोटा, सीएचसी खुद बीमार, मरीज परेशान
ब्यूरो/अमर उजाला सिरसा
Updated Wed, 06 Jul 2016 12:35 AM IST
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सेहत विभ्ााग के हालात
- फोटो : Bureau
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आमजन को बेहतर स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के दावे करने वाले सरकारी अस्पताल चिकित्सकों के टोटे के कारण खुद बीमार हैं। उदाहरण ओढां के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में देखने को मिल रहा है, जिसको लेकर कुछ पंचायतों ने मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री व अन्य विभागीय अधिकारियों को शिकायत भेजकर समस्या को हल करने की मांग की है।
गांव मलिकपुरा, जगमालवाली, हस्सु, घुंकावाली, ओढां व रोहिड़ांवाली की पंचायतों ने भेजी गई शिकायत में बताया है कि ओढां सीएचसी के अधीन दादू, पन्नीवाला मोटा व कालांवाली सहित तीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र व 39 गांव पड़ते हैं, जिनमें दिनभर में वहां पर 200 से अधिक मरीजों की ओपीडी रहती है। इसके अलावा इमरजेंसी व डिलीवरी केस अलग हैं। कुछ समय पूर्व वहां पर सात चिकित्सकों की नियुक्ति थी, जिनमें से तीन चिकित्सकों का एसडी में सेलेक्शन हो गया, इसके अलावा एक चिकित्सक को सिरसा डिप्यूट कर दिया गया। नेत्र विशेषज्ञ सुमित जैन को तीन माह के लिए हैदराबाद में रेटिना की ट्रेंनिग हेतु भेज दिया गया है। बता दें कि उक्त चिकित्सक के पास हर रोज नेत्र रोगियों की अच्छी खासी भीड़ लगी रहती है, उनके ट्रेंनिग पर जाने के बाद मरीजों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। इस समय अस्पताल में महज दो चिकित्सक ही मौजूद हैं जो दिन व रात की ड्यूटी कर रहे हैं। ग्राम पंचायतों ने स्वास्थ्य मंत्री से मांग किया है कि सिरसा डेप्यूट किए गए चिकित्सक का डेप्यूटेशन रद्द करते हुए अन्य स्टाफ की नियुक्ति की जाए। बताया जा रहा है कि सीएचसी के एसएमओ डॉ. भूषण गर्ग भी करीब एक माह की छुट्टी पर चले गए हैं।
कबाड़ बनी लाखों की एक्स-रे मशीन
अस्पताल में स्टाफ के टोटे ने पूरी व्यवस्था प्रभावित कर रखी है तो वहीं लाखों रुपये के उपकरण भी कबाड़ हालत में होकर रह गए हैं। करीब तीन वर्ष पूर्व वहां पर एक महिला रेडियोग्राफर की नियुक्ति थी जिसके तबादले के बाद यहां पर न ही तो कोई अन्य आया और न ही किसी ने लाखों रुपये की एक्स-रे मशीन की सार ली। जिसके चलते उक्त मशीन कमरे के एक कोने में कबाड़ में पड़ी धूल फांक रही हैं।
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प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में स्टाफ मारता है फरलो
विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों में स्टाफ लगभग फरलो पर रहता है। जब मरीज उपचार के लिए आते हैं तो मौजूद कर्मचारी का एक ही जवाब होता है कि डॉक्टर साहब कोर्ट गए हैं या फिर सिविल अस्पताल की बात कही जाती है। लगभग स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉक्टर या फार्मासिस्ट मूवमेंट रजिस्टर में इंट्री नहीं करते। नियम के अनुसार कोई भी डॉक्टर या फार्मासिस्ट ड्यूटी के दौरान किसी दूसरी जगह जाता है तो विवरण मूवमेंट रजिस्टर में दर्ज करना होता है पर इस नियम की कोई पालना नहीं कर रहा जिस पर स्वास्थ्य विभाग भी गंभीर नहीं है।
पहले से भी है स्टाफ का टोटा
एक महिला चिकित्सक, एक रेडियोग्राफर, चार पद स्टाफ नर्स, तीन पद एलटी, एक स्वीपर, छह क्लास-फॉर, 13 पद एएनएम, दो क्लर्क, एक अकांऊटेंट, एक माली, एक चौकीदार व एक धोबी सहित करीब तीन दर्जन पद पहले से ही रिक्त पड़े हैं ऐसे में चिकित्सकों के टोटे ने अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं को बुरी तरह से चरमराकर रख दिया है।
देखिए ये समस्या अकेले ओढां में नहीं है अपितु जिले में हर जगह है, हम अपनी मासिक रिपोर्ट में इस समस्या को अधिकारियों तक भेजते रहते हैं। अब चिकित्सकों की नियुक्ति करना तो सरकार का काम है, जब तक नई भर्ती नहीं हो जाती तब तक काम तो चलाना ही पड़ेगा।
सूरजभान कंबोज, सीएमओ सिरसा
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गांव मलिकपुरा, जगमालवाली, हस्सु, घुंकावाली, ओढां व रोहिड़ांवाली की पंचायतों ने भेजी गई शिकायत में बताया है कि ओढां सीएचसी के अधीन दादू, पन्नीवाला मोटा व कालांवाली सहित तीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र व 39 गांव पड़ते हैं, जिनमें दिनभर में वहां पर 200 से अधिक मरीजों की ओपीडी रहती है। इसके अलावा इमरजेंसी व डिलीवरी केस अलग हैं। कुछ समय पूर्व वहां पर सात चिकित्सकों की नियुक्ति थी, जिनमें से तीन चिकित्सकों का एसडी में सेलेक्शन हो गया, इसके अलावा एक चिकित्सक को सिरसा डिप्यूट कर दिया गया। नेत्र विशेषज्ञ सुमित जैन को तीन माह के लिए हैदराबाद में रेटिना की ट्रेंनिग हेतु भेज दिया गया है। बता दें कि उक्त चिकित्सक के पास हर रोज नेत्र रोगियों की अच्छी खासी भीड़ लगी रहती है, उनके ट्रेंनिग पर जाने के बाद मरीजों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। इस समय अस्पताल में महज दो चिकित्सक ही मौजूद हैं जो दिन व रात की ड्यूटी कर रहे हैं। ग्राम पंचायतों ने स्वास्थ्य मंत्री से मांग किया है कि सिरसा डेप्यूट किए गए चिकित्सक का डेप्यूटेशन रद्द करते हुए अन्य स्टाफ की नियुक्ति की जाए। बताया जा रहा है कि सीएचसी के एसएमओ डॉ. भूषण गर्ग भी करीब एक माह की छुट्टी पर चले गए हैं।
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कबाड़ बनी लाखों की एक्स-रे मशीन
अस्पताल में स्टाफ के टोटे ने पूरी व्यवस्था प्रभावित कर रखी है तो वहीं लाखों रुपये के उपकरण भी कबाड़ हालत में होकर रह गए हैं। करीब तीन वर्ष पूर्व वहां पर एक महिला रेडियोग्राफर की नियुक्ति थी जिसके तबादले के बाद यहां पर न ही तो कोई अन्य आया और न ही किसी ने लाखों रुपये की एक्स-रे मशीन की सार ली। जिसके चलते उक्त मशीन कमरे के एक कोने में कबाड़ में पड़ी धूल फांक रही हैं।
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प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में स्टाफ मारता है फरलो
विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों में स्टाफ लगभग फरलो पर रहता है। जब मरीज उपचार के लिए आते हैं तो मौजूद कर्मचारी का एक ही जवाब होता है कि डॉक्टर साहब कोर्ट गए हैं या फिर सिविल अस्पताल की बात कही जाती है। लगभग स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉक्टर या फार्मासिस्ट मूवमेंट रजिस्टर में इंट्री नहीं करते। नियम के अनुसार कोई भी डॉक्टर या फार्मासिस्ट ड्यूटी के दौरान किसी दूसरी जगह जाता है तो विवरण मूवमेंट रजिस्टर में दर्ज करना होता है पर इस नियम की कोई पालना नहीं कर रहा जिस पर स्वास्थ्य विभाग भी गंभीर नहीं है।
पहले से भी है स्टाफ का टोटा
एक महिला चिकित्सक, एक रेडियोग्राफर, चार पद स्टाफ नर्स, तीन पद एलटी, एक स्वीपर, छह क्लास-फॉर, 13 पद एएनएम, दो क्लर्क, एक अकांऊटेंट, एक माली, एक चौकीदार व एक धोबी सहित करीब तीन दर्जन पद पहले से ही रिक्त पड़े हैं ऐसे में चिकित्सकों के टोटे ने अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं को बुरी तरह से चरमराकर रख दिया है।
देखिए ये समस्या अकेले ओढां में नहीं है अपितु जिले में हर जगह है, हम अपनी मासिक रिपोर्ट में इस समस्या को अधिकारियों तक भेजते रहते हैं। अब चिकित्सकों की नियुक्ति करना तो सरकार का काम है, जब तक नई भर्ती नहीं हो जाती तब तक काम तो चलाना ही पड़ेगा।
सूरजभान कंबोज, सीएमओ सिरसा